Dhanbad Politics : बागी संजीव सिंह के सामने BJP नतमस्तक अब कार्रवाई नहीं, गले लगाएगी पार्टी जानें क्यों बदला हाई कमान का मन

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News India Live, Digital Desk: नगर निकाय चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी की करारी हार और बागी संजीव सिंह की रिकॉर्ड जीत ने पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को आत्ममंथन पर मजबूर कर दिया है।

1. शिष्टाचार या सियासी मजबूरी?

चुनाव जीतने के तुरंत बाद भाजपा के धनबाद विधायक राज सिन्हा का 'सिंह मेंशन' (संजीव सिंह का निवास) पहुँचना और उन्हें बधाई देना बड़े बदलाव का संकेत है।

मिठाई खिलाकर स्वागत: राज सिन्हा ने न केवल संजीव सिंह को जीत की बधाई दी, बल्कि उनका मुँह मीठा कराकर यह साफ कर दिया कि पार्टी अब उनके खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई के मूड में नहीं है।

विधायक का बयान: राज सिन्हा ने इसे 'शिष्टाचार' बताया और कहा कि धनबाद के विकास के लिए मेयर के साथ मिलकर काम करना जरूरी है।

2. संजीव सिंह की प्रचंड जीत (Record Victory)

संजीव सिंह ने निर्दलीय (बागी) प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर इतिहास रच दिया:

जीत का अंतर: उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी और झामुमो (JMM) समर्थित प्रत्याशी चंद्रशेखर अग्रवाल को 31,902 मतों से हराया।

BJP की दुर्गति: भाजपा द्वारा आधिकारिक तौर पर समर्थित प्रत्याशी संजीव कुमार इस दौड़ में चौथे नंबर पर पिछड़ गए, जो पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

3. 'सिंह मेंशन' का बढ़ा कद

इस जीत के साथ ही धनबाद की राजनीति में 'सिंह मेंशन' का दबदबा फिर से स्थापित हो गया है।

पति-पत्नी जनप्रतिनिधि: संजीव सिंह के मेयर बनने और उनकी पत्नी रागिनी सिंह के पहले से ही झरिया से भाजपा विधायक होने के कारण, यह परिवार अब जिले की राजनीति का सबसे शक्तिशाली केंद्र बन गया है।

समर्थकों का जोश: जीत के बाद सोशल मीडिया पर संजीव सिंह को "असली भगवाधारी" और "भाजपा का शेर" बताकर पोस्ट साझा किए जा रहे हैं, जो कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता को दर्शाता है।

4. पार्टी क्यों अपना रही है नरम रुख?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा 2029 के आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए संजीव सिंह को नाराज नहीं करना चाहती।

जनाधार: संजीव सिंह ने साबित कर दिया है कि पार्टी सिंबल न होने के बावजूद उनके पास मजबूत जनाधार है।

भीतरी नाराजगी: भाजपा के भीतर एक गुट पहले से ही टिकट वितरण को लेकर स्थानीय संगठन से नाराज था। संजीव सिंह को वापस गले लगाना इस डैमेज कंट्रोल की एक कोशिश है।