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April 05 2026 12:19 pm

Democracy in Kashmir : मुझे श्रीनगर में नजरबंद कर दिया गया , AAP सांसद संजय सिंह का सनसनीखेज आरोप, मचा सियासी बवाल

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News India Live, Digital Desk: Democracy in Kashmir : आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद और तेज-तर्रार नेता संजय सिंह ने एक सनसनीखेज दावा किया है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में, खासकर जम्मू-कश्मीर को लेकर, एक नया विवाद खड़ा हो गया है। संजय सिंह का आरोप है कि उन्हें श्रीनगर में 'हाउस अरेस्ट' यानी नजरबंद कर दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि जिस होटल में वह ठहरे हुए हैं, वहां से उन्हें न तो बाहर जाने दिया जा रहा है और न ही किसी को उनसे मिलने की इजाजत है।

आखिर क्यों गए थे संजय सिंह कश्मीर?

संजय सिंह जम्मू-कश्मीर के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा मुख्य रूप से उन कश्मीरी पंडितों और अन्य समुदाय के लोगों से मिलने के लिए था, जो हाल ही में हुई टारगेट किलिंग (लक्षित हत्याओं) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। संजय सिंह का कहना था कि वह इन पीड़ित परिवारों का दर्द बांटने और उनकी आवाज को संसद में उठाने के लिए वहां पहुंचे थे।

क्या हैं संजय सिंह के आरोप?

संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी नजरबंदी का दावा किया। उन्होंने कहा:

"मैं इस वक्त श्रीनगर में हूं। कल जब मैं यहां टारगेट किलिंग के शिकार हुए कश्मीरी पंडितों और सेब के किसानों से मिला, तो आज मुझे मेरे होटल में नजरबंद कर दिया गया है। मेरे दरवाजे पर पुलिस लगा दी गई है और कहा गया है कि मैं बाहर नहीं निकल सकता। किसी को भी मुझसे मिलने की इजाजत नहीं है।"

उन्होंने सीधे तौर पर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कश्मीर में 'तानाशाही' चल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कश्मीर में 'सब कुछ ठीक होने' का दावा करते हैं, तो फिर एक सांसद को पीड़ित परिवारों से मिलने से क्यों रोका जा रहा है? उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या है और वह इस तरह की 'कैद' से डरने वाले नहीं हैं।

प्रशासन ने क्या कहा?

हालांकि, संजय सिंह के इन आरोपों पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन या पुलिस की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन, इस घटना ने एक बार फिर कश्मीर की स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार कश्मीर में सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है, और जो भी इस हकीकत को दिखाने की कोशिश करता है, उसकी आवाज को दबा दिया जाता है।

यह मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और इसने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक गतिविधियों की स्वतंत्रता को लेकर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।