डिमांड गाजियाबाद से, सप्लाई दिल्ली तक जानिए कैसे पकड़ा गया यह ऑनलाइन सेक्स रैकेट गिरोह

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News India Live, Digital Desk : आज के ज़माने में टेक्नोलॉजी ने ज़िंदगी जितनी आसान बनाई है, कुछ अपराधी उसका इस्तेमाल उतना ही गलत काम करने के लिए कर रहे हैं। हम घर बैठे पिज़्ज़ा और सामान मंगाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अपराधी इसी तर्ज़ पर सेक्स रैकेट (Sex Racket) भी चला सकते हैं?

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद (Ghaziabad) से एक ऐसी ही हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो कहने को तो कूरियर सर्विस जैसा दिखता था, लेकिन असल में यह 'जिस्मफरोशी' का एक ऑनलाइन अड्डा था।

क्या था पूरा मामला? (The Modus Operandi)

इंदिरापुरम (Indirapuram) पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। जब पुलिस ने गहराई से जांच की, तो एक बड़ा नेटवर्क सामने आया।
ये शातिर अपराधी ग्राहकों को फंसाने के लिए WhatsApp और Telegram जैसे सोशल मीडिया एप्स का इस्तेमाल करते थे।

बिल्कुल किसी ई-कॉमर्स साइट की तरह, यहाँ भी कस्टमर्स के पास लड़कियों की तस्वीरें (Photos) भेजी जाती थीं। एक बार जब 'डील' पक्की हो जाती थी, तो डिलीवरी की बारी आती थी। लेकिन यहाँ डिलीवरी पिज़्ज़ा या कपड़ों की नहीं, बल्कि लड़कियों की होती थी।

'कूरियर' की तरह होती थी सप्लाई

पुलिस की पूछताछ में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि यह रैकेट दिल्ली-एनसीआर में बिल्कुल 'कूरियर बॉय' मॉडल पर काम करता था।
ग्राहकों की डिमांड पर लड़कियों को कैब या पर्सनल गाड़ियों से दिल्ली और आसपास के होटलों या फ्लैट्स में भेजा जाता था। जैसे कूरियर में ट्रैकिंग होती है, वैसे ही दलाल पूरी निगरानी रखते थे कि लड़की कब पहुंची और कब वापस आ रही है।

ऑनलाइन पेमेंट और कमीशन का खेल

यह पूरा धंधा इतना हाई-टेक था कि कैश का लेन-देन कम ही होता था। एडवांस बुकिंग और पेमेंट UPI या ऑनलाइन माध्यमों से लिए जाते थे। लड़कियों को प्रति 'बुकिंग' के हिसाब से पैसे मिलते थे, जबकि बड़ा हिस्सा ये दलाल (Agents) खा जाते थे।
ये लोग 'स्पा' या 'कूरियर एजेंसी' की आड़ में ग्राहकों से संपर्क करते थे ताकि किसी को शक न हो।

पुलिस का एक्शन

गाजियाबाद पुलिस ने जाल बिछाकर इस गिरोह के सरगना समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है। मौके से कुछ लड़कियों को रेस्क्यू (Rescue) भी किया गया है, जो शायद मजबूरी या पैसों की तंगी के कारण इस दलदल में फंस गई थीं। उनके पास से कई मोबाइल फोन्स और गाड़ियाँ बरामद हुई हैं, जिनमें ग्राहकों की पूरी लिस्ट मिली है।

यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे आसपास क्या चल रहा है, इस पर नजर रखना कितना जरूरी है। कूरियर या सर्विस के नाम पर चल रहे ऐसे धंधे न सिर्फ कानून का मज़ाक हैं, बल्कि समाज के लिए भी नासूर हैं।

सतर्क रहें और अगर अपने आस-पड़ोस में ऐसी कोई संदिग्ध हलचल देखें, तो पुलिस को सूचना जरूर दें।