टोल कलेक्शन में धांधली पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त! NHAI को रियल-टाइम निगरानी सिस्टम बनाने का दिया आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने टोल प्लाजा पर होने वाली कमाई में पारदर्शिता लाने और सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को निर्देश दिया है कि वह टोल कलेक्शन की रियल-टाइम (तुरंत) निगरानी के लिए एक स्वचालित (Automated) और तकनीक-आधारित सिस्टम विकसित करे। यह कदम "विंडफॉल गेन" (अपेक्षित से अधिक कमाई) जैसी स्थितियों की पहचान करने और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
क्या है पूरा मामला? पावनगांव टोल प्लाजा से जुड़ी है कड़ी
यह पूरा मामला महाराष्ट्र के पावनगांव टोल प्लाजा से संबंधित है। दरअसल, यहाँ टोल कलेक्शन का अनुबंध (Contract) समय से पहले समाप्त कर दिया गया था, जिसे अदालत में चुनौती दी गई थी। जस्टिस अनिल क्षत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की खंडपीठ ने इस अनुबंध समाप्ति को सही ठहराया। कोर्ट ने पाया कि टोल राजस्व में अचानक हुई बढ़ोतरी की समय पर पहचान नहीं हो पाई, जिसके कारण सरकारी खजाने को भारी चपत लगी।
'विंडफॉल गेन' और NHAI को प्रतिदिन 7.5 लाख का नुकसान
सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। NHAI ने खुद स्वीकार किया कि निगरानी और कार्रवाई में देरी के कारण उसे लगभग 7.5 लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान उठाना पड़ा।
विंडफॉल गेन का मतलब: जब किसी टोल प्लाजा पर वाहनों की संख्या बढ़ने से कमाई उम्मीद से बहुत ज्यादा हो जाती है, तो उसे 'विंडफॉल गेन' कहा जाता है।
अदालत की टिप्पणी: कोर्ट ने कहा कि विंडफॉल गेन से जुड़े नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि अधिक कमाई होने पर सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर सके। लेकिन मौजूदा सिस्टम की सुस्ती ने इन नियमों के उद्देश्य को ही विफल कर दिया है।
लापरवाह अधिकारियों पर गिरेगी गाज, 6 महीने में पूरी होगी जांच
दिल्ली हाईकोर्ट ने केवल सिस्टम सुधारने की बात नहीं कही, बल्कि जवाबदेही भी तय की है। इस मामले में लापरवाही बरतने वाले एक जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस कार्रवाई को अगले 6 महीने के भीतर पूरा किया जाए और कारण बताओ नोटिस पर लिए गए अंतिम निर्णय को रिकॉर्ड पर रखा जाए।
भविष्य का रोडमैप: तकनीक से रुकेगी राजस्व की चोरी
अदालत ने उम्मीद जताई है कि NHAI जल्द ही एक ऐसा मजबूत तकनीकी ढांचा तैयार करेगा जिससे:
टोल कलेक्शन की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सके।
कमाई में उछाल आते ही सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करे।
पारदर्शिता और समयबद्ध निर्णय लेने की प्रक्रिया सुनिश्चित हो।