रोते बच्चे और टूटा मकान बीजापुर में प्रशासन की सर्जिकल स्ट्राइक ने लील ली जवानों की छत, जानिये पूरा सच

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के बीजापुर (Bijapur) में कुछ ऐसा ही हुआ है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। यहाँ प्रशासन ने 'अतिक्रमण हटाओ अभियान' (Anti-Encroachment Drive) के तहत जिन मकानों को तोड़ा है, उनमें कई घर DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) के जवानों के थे।

क्या है पूरा मामला?
बीजापुर शहर में सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए प्रशासन की टीम बुलडोजर लेकर पहुंची थी। उनका दावा था कि यह जमीन बेशकीमती है और इस पर अवैध कब्ज़ा है। लेकिन, जिन लोगों के घर तोड़े गए, उनमें DRG के वो जवान भी शामिल थे जो इस वक्त भी जंगलों में नक्सली मोर्चे पर तैनात हैं।

जब बुलडोजर ने दीवारों को गिराना शुरू किया, तो जवानों के परिवार वाले रोते-बिलखते रहे, लेकिन किसी की एक न सुनी गई। आँखों के सामने अपनी गाढ़ी कमाई का आशियाना टूटता देख जवानों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

"हमें बेघर कर दिया"
DRG जवानों का कहना है कि वे अपनी जान हथेली पर रखकर देश सेवा कर रहे हैं, और प्रशासन ने उन्हें बिना पर्याप्त समय दिए बेघर कर दिया। उनका सवाल है— "अगर हम अवैध थे, तो इतने साल से हमें नोटिस क्यों नहीं दिया? और अब हम अपने बीवी-बच्चों को लेकर कहाँ जाएं?"

इस कार्रवाई ने प्रशासन और पुलिस बल के बीच एक लकीर खींच दी है। जवानों के समर्थन में कई लोग उतर आए हैं और इसे प्रशासन की संवेदनहीनता (Insensitivity) बता रहे हैं।

हालाँकि, प्रशासन अपनी दलील दे रहा है कि कानून सबके लिए बराबर है और अवैध कब्जा हटाया ही जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या जवानों के पुनर्वास (Rehabilitation) का कोई इंतज़ाम नहीं किया जा सकता था? बीजापुर में फिलहाल माहौल काफी तनावपूर्ण है और जवानों का गुस्सा अभी थमा नहीं है।