भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराया पश्चिम एशिया संकट का साया: CRISIL ने दी व्यापार घाटे और GDP में गिरावट की चेतावनी
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ता सैन्य तनाव अब भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनता जा रहा है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारत के आयात बिल में भारी उछाल आएगा, जिससे न केवल व्यापार घाटा बढ़ेगा, बल्कि देश की जीडीपी (GDP) विकास दर भी सुस्त पड़ सकती है।
प्रमुख चिंता: चालू खाता घाटा (CAD) 2% के पार?
क्रिसिल की रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को लेकर कही गई है।
चेतावनी: रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के कारण भारत का चालू खाता घाटा बढ़कर जीडीपी के 2 फीसदी तक पहुंच सकता है।
आयात बिल में उछाल: कच्चे तेल की कीमतों में सालाना आधार पर 23% तक की वृद्धि का अनुमान है, जिससे पेट्रोलियम आयात बिल में जबरदस्त इजाफा होगा।
महंगाई और रुपये पर दबाव
पश्चिम एशिया संकट का असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ेगा:
महंगाई (Inflation): ईंधन और खाद के दाम बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिससे खाने-पीने की चीजों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
रुपये की गिरावट: आयात बिल बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ेगी, जिससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया और कमजोर हो सकता है।
शिपिंग और बीमा लागत: रेड सी (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण जहाजों का किराया और बीमा प्रीमियम बढ़ गया है, जिससे भारतीय निर्यातकों की लागत में वृद्धि हुई है।
निर्यात पर भी 'ब्रेक' लगने की आशंका
निर्यात संगठनों (FIEO) और आर्थिक विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु निर्यात 2-3% तक घट सकता है।
वैश्विक मांग में नरमी: युद्ध की स्थिति में वैश्विक स्तर पर मांग कम होने से भारतीय उत्पादों (विशेषकर टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी और इंजीनियरिंग गुड्स) के निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
विकास दर में कटौती: मूडीज (Moody's) और अन्य रेटिंग एजेंसियों ने भी संकेत दिया है कि वैश्विक तनाव के चलते भारत की विकास दर के अनुमान में 1 फीसदी तक की कटौती संभव है।