मैदान छोड़कर अब बोर्ड से लड़ रहे क्रिकेटर? बांग्लादेश में क्रिकेट का भविष्य खतरे में

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News India Live, Digital Desk : क्रिकेट को हम 'जेेंटलमैन गेम' कहते हैं, लेकिन हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में आजकल जो चल रहा है, उसे देखकर किसी भी क्रिकेट फैन का दिल टूट जाएगा। वहां खबरों में चौके-छक्के नहीं, बल्कि विवाद, लड़ाइयां और पुलिस केस छाए हुए हैं।

हाल ही में, एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। बांग्लादेश के खिलाड़ी, जो देश के लिए खेलते हैं, अब अपनी ही क्रिकेट को बचाने के लिए हाथ जोड़कर गुहार लगा रहे हैं। उनका साफ़ कहना है "प्लीज, क्रिकेट को बचा लीजिए।"

क्या है पूरा मामला?
जैसा कि आप जानते हैं, बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों से राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। इसका सीधा असर वहां के क्रिकेट बोर्ड (BCB) पर भी पड़ा है। जब से सरकार बदली है, क्रिकेट बोर्ड का ढांचा भी चरमरा गया है। कभी बोर्ड प्रेसिडेंट भाग रहे हैं, तो कभी दिग्गज खिलाड़ी शाकिब अल हसन पर मर्डर केस दर्ज हो रहा है।

इस सब के बीच, जो आम खिलाड़ी हैं, जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं, वो बुरी तरह फंस गए हैं।

खिलाड़ियों का दर्द: "हमारा काम खेलना है, ये सब झेलना नहीं"
रिपोर्ट्स बताती हैं कि वहां के घरेलू और सीनियर खिलाड़ी बहुत परेशान हैं। एक नया विवाद सामने आया है जहां बोर्ड के अंदर की गुटबाजी अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। खिलाड़ियों का कहना है कि रोज-रोज के इन नाटक और विवादों की वजह से उनका फोकस खेल से हट रहा है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वो आने वाले मैचों की प्रैक्टिस करें या अपनी सुरक्षा और भविष्य की चिंता करें।

सोचिए, एक खिलाड़ी के मानसिक हालत का क्या होगा जब उसे पता ही न हो कि कल उसका बोर्ड रहेगा या नहीं?

क्रिकेट पर गहरा असर
बांग्लादेश की टीम ने हाल ही में पाकिस्तान को हराकर इतिहास रचा था, लेकिन उसके बाद भारत दौरे पर उनकी बुरी तरह हार हुई। जानकारों का मानना है कि मैदान के बाहर जो "तनाव" है, वही मैदान के अंदर खिलाड़ियों के प्रदर्शन को खराब कर रहा है।

आगे क्या होगा?
क्रिकेट फैंस बस यही दुआ कर रहे हैं कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाए। बांग्लादेशी खिलाड़ियों की यह पुकार सिर्फ़ उनकी नहीं, बल्कि खेल की पुकार है। अगर समय रहते हालात नहीं सुधरे, तो एक अच्छी-खासी उभरती हुई टीम बिखर सकती है।

अब देखना यह होगा कि क्या वहां के जिम्मेदार लोग इस "SOS" (आपातकालीन संदेश) को सुनते हैं या क्रिकेट यूँ ही राजनीति की पिच पर हिट-विकेट होता रहेगा।