Cricket Training : वो पिच पर नहीं, रेत पर गेंदबाजी करते थे,कुलदीप यादव की सफलता के पीछे का वो राज जो आपको हैरान कर देगा
News India Live, Digital Desk: आज जब अब्दुल्ला यादव अपनी घूमती हुई गेंदों से दुनिया के बड़े-बड़े बल्लेबाजों को नाचते हैं, तो हर कोई उनकी कला का लोहा मनवाता है। चोट से उबरने के बाद 'कुलदीप 2.0' ने जो वापसी की, उसमें कोई चमत्कार नहीं दिखा। लेकिन इस चमत्कार के पीछे एक ऐसी मेहनत और लगन की कहानी है, जिसे देखकर आप दंग रह गए।
इस राज से पर्दा उठाया है मशहूर क्रिकेट कोच और पूर्व खिलाड़ी अभिषेक नायर ने, जिन्होंने कुलदीप के संघर्ष के दिनों को करीब से देखा है।
क्या है सफलता का वो 'रेतीला' राज?
अभिषेक नायर ने खुलासा किया कि जब कुलदीप यादव खराब फॉर्म और चोट से जूझ रहे थे, तब उन्होंने अपनी गेंदबाजी में वही पुरानी धार वापस लाने के लिए एक ऐसा तरीका अपनाया, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। कुलदीप ने क्रिकेट की पिच पर नहीं, बल्कि रेत पर गेंदबाजी करना शुरू कर दिया था।
नायर ने बताया, "यह सुनने में किसी किंवदंती या कहानी जैसा लगता है, लेकिन यह सच है। कुलदीप रेत पर गेंदबाजी का अभ्यास करते थे।"
क्यों करते थे रेत पर प्रैक्टिस?
इसके पीछे का विज्ञान बहुत सीधा और असरदार है।
- ज्यादा ताकत, ज्यादा स्पिन: क्रिकेट की पिच थोड़ी सख्त होती है और गेंद को घूमने में मदद करती हैं।, लेकिन रेत एक बिलकुल 'मुर्दा' सतह होती है। रेत पर गेंद को टर्न कराने के लिए एक गेंदबाज को अपनी उंगलियों, कलाई और कंधे से लगभग दोगुनी ताकत लगानी पड़ती हैं।.
- मजबूत मसल मेमोरी: रोज रेत पर इतनी ज्यादा ताकत लगाकर गेंदबाजी करने से कुलदीप के कंधे और उंगलियों की मांसपेशियां बेहद मजबूत हो गईं। उनके शरीर को गेंद को ज्यादा घुमाने की आदत पड़ गई।
- पिच पर आसान लगा खेल: जब महीनों तक रेत पर इस मुश्किल ट्रेनिंग के बाद कुलदीप वापस क्रिकेट की पिच पर आए, तो उन्हें गेंदबाजी करना बच्चों के खेल जैसा लगा। अब उन्हें गेंद को घुमाने के लिए बहुत कम मेहनत करनी पड़ रही थी और गेंद पहले से कहीं ज्यादा घूम रही थी।
अभिषेक नायर ने बताया कि इस अनोखी ट्रेनिंग ने ही कुलदीप को वह आत्मविश्वास और ताकत वापस दी, जिसकी उन्हें तलाश थी। आज हम जो उनकी गेंदों में तीखा टर्न और ड्रिफ्ट देखते हैं, उसकी नींव उसी रेत पर रखी गई थी।
यह कहानी दिखाती है कि कुलदीप यादव सिर्फ एक प्रतिभाशाली गेंदबाज ही नहीं, बल्कि एक ऐसे योद्धा भी हैं जो अपनी कला को निखारने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।