Cricket Shock : क्या गोरों के लिए नियम अलग हैं? पर्थ टेस्ट पर ICC की रिपोर्ट ने मचाया बवाल

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News India Live, Digital Desk: क्रिकेट फैंस, आज हमें एक बहुत ही गंभीर मुद्दे पर बात करनी है जो आपको भी सोचने पर मजबूर कर देगा। क्या क्रिकेट के नियम सभी के लिए एक जैसे हैं, या फिर 'घर' देखकर फैसले बदले जाते हैं?

ताज़ा मामला पर्थ (Perth) का है। ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही एशेज सीरीज का पहला टेस्ट मैच। उम्मीद थी कि पांच दिन का कड़ा मुकाबला होगा, लेकिन हुआ क्या? मैच महज़ दो दिन  जी हाँ, सिर्फ दो दिन में खत्म हो गया! बल्लेबाजों के लिए क्रीज पर टिकना मानो किसी जंग लड़ने जैसा हो गया था। पहले ही दिन 19 विकेट गिर गए। लेकिन हैरान करने वाली बात मैच का नतीजा नहीं, बल्कि मैच के बाद ICC का फैसला है।

2 दिन के मैच को बताया 'Very Good'
सबको लगा था कि जैसे भारत में अगर कोई मैच 3 दिन में खत्म हो जाए, तो ICC की तरफ से 'खराब' (Poor) या 'औसत' (Average) रेटिंग आती है, वैसा ही कुछ यहाँ भी होगा। लेकिन नहीं, आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि ICC ने पर्थ की उस पिच को "Very Good" (बहुत अच्छी) रेटिंग दी है!

मैच रेफरी का अजीब तर्क
मैच रेफरी रंजन मदुगले ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पर्थ की पिच पर "गेंद और बल्ले के बीच अच्छा संतुलन" था। उन्होंने तर्क दिया कि पिच पर शुरुआती सीम मूवमेंट और बाउंस एकदम सही था। उनके मुताबिक, भले ही मैच जल्दी खत्म हो गया हो, लेकिन इसमें पिच की कोई गलती नहीं थी, बल्कि यह गेंदबाजों का शानदार प्रदर्शन था।

अब सवाल यह उठता है कि जब यही चीज भारत में होती है, तो नजरिया क्यों बदल जाता है?

स्पिन और पेस के बीच का 'दोगलापन'
जरा पीछे मुड़कर देखें। जब भारत में स्पिनर्स का जादू चलता है और मैच 3 दिन के अंदर खत्म होता है (जैसे इंदौर या अहमदाबाद में हुआ था), तो दुनिया भर के दिग्गज और खुद ICC उसे 'Average' या 'Poor' करार देते हैं। कहा जाता है कि पिच बल्लेबाजी के लायक नहीं थी।

तो क्या पेस (Pace) गेंदबाजों का दबदबा होना "क्रिकेट का क्लास" है और स्पिन (Spin) गेंदबाजों का दबदबा होना "पिच की खराबी"?

भारतीय फैंस सोशल मीडिया पर यही सवाल पूछ रहे हैं। पर्थ में 1888 के बाद यह एशेज इतिहास का सबसे छोटा मैच था (गेंदों के लिहाज से)। सिर्फ 847 गेंदों में खेल खत्म हो गया। फिर भी इसे "स्पोर्टिंग विकेट" का तमगा दिया गया।

क्या ये भारतीय क्रिकेट के लिए एक सबक है?
इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है। क्या एशियाई पिचों को जज करने का ICC का पैमाना पश्चिमी देशों से अलग है? जब हमारे घर में धूल उड़ती है तो बवाल होता है, लेकिन जब पर्थ या गाबा में गेंद कंचे की तरह उछलती है, तो उसे 'असली टेस्ट क्रिकेट' कहा जाता है।

फैंस के मन में यह बात घर कर गई है कि शायद नियम तो एक ही हैं, लेकिन चश्मा अलग-अलग है। बहरहाल, पर्थ की इस 'Very Good' रेटिंग पर आपकी क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि ICC को अपना पैमाना सुधारने की जरूरत है?

क्रिकेट अनिश्चितताओं का खेल है, लेकिन फैसले अगर निश्चित और निष्पक्ष हों, तभी खेल का असली मजा है।