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April 08 2026 06:29 am

Corporate Amendment Bill 2026 : लोकसभा में पेश होगा संशोधन विधेयक, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों की राह होगी आसान

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News India Live, Digital Desk :  केंद्र सरकार देश के कॉरपोरेट ढांचे को और अधिक सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा तैयार 'कॉरपोरेट संशोधन विधेयक' (Corporate Amendment Bill) को जल्द ही लोकसभा में पेश किया जा सकता है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य व्यापार करने की सुगमता यानी 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है। इस कानून के लागू होने से विशेष रूप से देश के उभरते स्टार्टअप्स और लघु उद्योगों (MSMEs) के लिए नियमों का जंजाल कम होगा और उन्हें अपनी विकास यात्रा में नई गति मिलेगी।

विधेयक की बड़ी बातें: क्या बदलेगा उद्यमियों के लिए?

इस नए संशोधन विधेयक में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारों को राहत देंगे। रिपोर्टों के अनुसार, विधेयक में गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनियों के लिए अनुपालन (Compliance) बोझ को कम करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, कॉर्पोरेट प्रशासन के नियमों को और अधिक लचीला बनाया जा रहा है ताकि स्टार्टअप्स को विदेशी निवेश जुटाने और अपने ऑपरेशंस को विस्तार देने में कानूनी अड़चनों का सामना न करना पड़े। सरकार का मानना है कि नियमों में ढील देने से न केवल निवेश बढ़ेगा बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए खुलेगा तरक्की का द्वार

भारत इस समय दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। हालांकि, कई युवा उद्यमियों की शिकायत रहती है कि भारी-भरकम कागजी कार्रवाई और जटिल कॉरपोरेट कानूनों के कारण उनका काफी समय और संसाधन नष्ट हो जाते हैं। नया विधेयक डिजिटल फाइलिंग और स्व-घोषणा (Self-declaration) आधारित प्रणालियों को बढ़ावा दे सकता है। छोटे उद्योगों के लिए ऑडिटिंग और रिपोर्टिंग के मानदंडों को सरल बनाकर उन्हें बड़ी कंपनियों के समान कड़े नियमों से मुक्ति दी जा सकती है, जिससे उनकी परिचालन लागत (Operating Cost) में कमी आएगी।

लोकसभा में चर्चा के बाद लागू होंगे नए नियम

संसद के आगामी सत्र में इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। विपक्ष और उद्योग जगत की प्रतिक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार इसमें कुछ और महत्वपूर्ण संशोधन भी कर सकती है। कॉरपोरेट विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह विधेयक अपने मूल स्वरूप में पारित हो जाता है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेम-चेंजर साबित होगा। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने और देश को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।