Coral Bangles : सिर्फ खूबसूरती नहीं, सुहाग और समृद्धि की निशानी है शाखा पोला,जानिए बंगाली महिलाओं के लिए क्यों है इतना खास
News India Live, Digital Desk: Coral Bangles : भारत अपनी विविध संस्कृतियों के लिए जाना जाता है, और हर संस्कृति की अपनी कुछ खास परंपराएं होती हैं जो उसे दूसरों से अलग बनाती हैं. ऐसी ही एक खूबसूरत परंपरा बंगाली समुदाय में देखने को मिलती है, जहां शादीशुदा महिलाएं अपनी कलाई में लाल और सफेद रंग की खास चूड़ियां पहनती हैं. इन्हें 'शाखा पो-ला' (Shakha Pola) कहा जाता है. यह सिर्फ एक गहना नहीं, बल्कि सुहाग, पवित्रता और सौभाग्य का प्रतीक है, जिसके बिना एक बंगाली महिला का श्रृंगार अधूरा माना जाता है
क्या है शाखा और पोला का मतलब?
शाखा-पोला दो अलग-अलग कंगन का जोड़ा होता है:
- शाखा: यह सफेद रंग का कंगन होता है जिसे पवित्र शंख को काटकर बनाया जाता है. सफेद रंग को पवित्रता और शुद्धि का प्रतीक माना जाता है.
- पोला: यह गहरे लाल रंग का कंगन होता है, जो पारंपरिक रूप से मूंगे (कोरल) से बनता था. लाल रंग को ऊर्जा, खुशी और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
इन दोनों को एक साथ पहनना एक विवाहित महिला के जीवन में संतुलन और पूर्णता का प्रतीक है. यह उसके वैवाहिक जीवन की पहचान है
क्यों पहनी जाती है शाखा-पोला? क्या है इसके पीछे की कहानी?
शाखा-पोला पहनने की परंपरा सदियों पुरानी है और इसके पीछे धार्मिक और सामाजिक दोनों महत्व छिपे हैं.
एक प्रचलित लोककथा के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत मछुआरा समुदाय से हुई थी. गरीब मछुआरों के पास अपनी बेटियों की शादी में सोने-चांदी के महंगे जेवर देने के लिए पैसे नहीं होते थे. इसलिए, वे समुद्र से शंख और मूंगे निकालकर उनके सुंदर कंगन बनाते और अपनी बेटी को विवाह में उपहार के रूप में देते थे. धीरे-धीरे यह प्रथा बंगाली संस्कृति का एक अभिन्न अंग बन गई
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाखा-पोला पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की समृद्धि की कामना के लिए पहना जाता है इसे नकारात्मक ऊर्जा से बचाने वाला एक सुरक्षा कवच भी माना जाता है.
'दोधी मोंगल': जब दुल्हन पहनती है शाखा-पोला
बंगाली शादियों में 'दोधी मोंगल' नाम की एक बेहद महत्वपूर्ण रस्म होती है, जो शादी वाले दिन सुबह-सुबह निभाई जाती है. इस रस्म के दौरान, सात विवाहित महिलाएं शंख से बने सफेद कंगन (शाखा) और मूंगे से बने लाल कंगन (पोला) को हल्दी मिले पानी में डुबोकर पवित्र करती हैं और फिर दुल्हन को पहनाती हैं यह मां की तरफ से अपनी बेटी को सुखी वैवाहिक जीवन के लिए दिया गया एक आशीर्वाद होता है.
शाखा-पोला के साथ ही दुल्हन के बाएं हाथ में एक लोहे का कड़ा भी पहनाया जाता है, जिसे 'लोहा' कहते हैं. यह आमतौर पर सास अपनी बहू को उपहार में देती है और माना जाता है कि यह बुरी नजर से बचाता है.
आज के आधुनिक समय में भी, शाखा-पोला का महत्व कम नहीं हुआ है. फैशन के अनुसार इनके डिजाइन में भले ही बदलाव आ गए हों, लेकिन इसके पीछे की आस्था और परंपरा आज भी उतनी ही मजबूती से कायम है.