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March 13 2026 04:24 am

कोमा (Coma): क्या होता है जब दिमाग 'स्लीप मोड' में चला जाता है? एक्सपर्ट से जानें क्यों कुछ मरीज जल्दी जाग जाते हैं और कुछ को लगते हैं साल

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नई दिल्ली: चिकित्सा जगत में 'कोमा' एक ऐसी रहस्यमयी और गंभीर स्थिति है, जिसे समझना आम इंसान के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। यह वह अवस्था है जहां इंसान जीवित तो होता है, लेकिन बाहरी दुनिया से उसका संपर्क पूरी तरह टूट जाता है। न वह बोल सकता है, न हिल सकता है और न ही अपनी मर्जी से आंखें खोल सकता है। अक्सर फिल्मों में दिखने वाला कोमा असल जिंदगी में एक 'मेडिकल इमरजेंसी' है, जहां हर बीतता सेकंड मरीज के भविष्य के लिए कीमती होता है।

आखिर क्यों आता है कोमा? क्या हैं मुख्य कारण

कोमा तब होता है जब मस्तिष्क के उस हिस्से को नुकसान पहुँचता है जो हमें जागरूक और सतर्क रखता है। इसके पीछे कई ट्रिगर हो सकते हैं:

सिर की गंभीर चोट: एक्सीडेंट या ऊंचाई से गिरने के कारण दिमाग पर लगा गहरा आघात।

ब्रेन स्ट्रोक या ब्लीडिंग: दिमाग की नसों में खून का थक्का जमना या नस फट जाना।

ऑक्सीजन की कमी: डूबने, दिल का दौरा पड़ने या दम घुटने से जब दिमाग को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाए।

संक्रमण और बीमारियां: मेनिनजाइटिस (दिमागी बुखार), बहुत अधिक शुगर लेवल या नशीले पदार्थों का ओवरडोज।

रिकवरी में देरी क्यों? डॉ. दलजीत सिंह का विश्लेषण

दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ. दलजीत सिंह बताते हैं कि कोमा से बाहर आने का समय हर मरीज के लिए अलग होता है। यह मुख्य रूप से दो बातों पर निर्भर करता है: चोट की गंभीरता और दिमाग का प्रभावित हिस्सा।

डॉ. सिंह के अनुसार, "यदि दिमाग को मामूली क्षति हुई है और इलाज तुरंत मिल गया है, तो मरीज कुछ दिनों में होश में आ सकता है। लेकिन अगर दिमाग के 'ब्रेन स्टेम' (जो बुनियादी कार्यों को नियंत्रित करता है) को नुकसान पहुँचा है, तो रिकवरी में महीनों या साल लग सकते हैं।" इसके अलावा मरीज की उम्र और उसकी शारीरिक शक्ति भी रिकवरी की गति तय करती है।

बेहोशी के पीछे की हलचल: क्या मरीज सब सुन सकता है?

मेडिकल साइंस में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ कोमा से बाहर आने के बाद मरीजों ने दावा किया कि उन्हें आसपास की बातें सुनाई दे रही थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही मरीज प्रतिक्रिया न दे पाए, लेकिन उसके दिमाग की कुछ गतिविधियां सक्रिय रह सकती हैं। इसलिए डॉक्टर्स अक्सर सलाह देते हैं कि कोमा के मरीज के पास सकारात्मक बातें करें, क्योंकि वे आवाज और स्पर्श को महसूस कर सकते हैं।

कोमा के बाद की चुनौतियां: सिर्फ होश में आना काफी नहीं

कोमा से जागना रिकवरी का केवल पहला कदम है। लंबे समय तक बेहोश रहने के कारण शरीर की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। मरीज को दोबारा चलने, बोलने और याददाश्त वापस पाने के लिए फिजियोथेरेपी और स्पीच थेरेपी की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।

लाइफ सपोर्ट और देखभाल का महत्व

कोमा के मरीज पूरी तरह से मेडिकल टीम और परिवार पर निर्भर होते हैं। उन्हें वेंटिलेटर (सांस लेने के लिए), फीडिंग ट्यूब (पोषण के लिए) और इन्फेक्शन से बचाने के लिए विशेष सफाई की जरूरत होती है। परिवार का धैर्य और सही समय पर न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह ही मरीज को मौत के मुंह से बाहर ला सकती है।