CJI सूर्यकांत ने बताया भारतीय न्याय प्रणाली का सबसे बड़ा संकट, इन चुनौतियों से निपटना बड़ी प्राथमिकता
News India Live, Digital Desk: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने देश की कानूनी प्रणाली के सामने मौजूद सबसे बड़ी चुनौतियों को लेकर अपनी राय स्पष्ट की है। एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान उन्होंने न्यायपालिका की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए उन बाधाओं पर प्रकाश डाला, जो न्याय मिलने की प्रक्रिया को सुस्त और जटिल बनाती हैं। उनके संबोधन ने एक बार फिर न्यायिक सुधारों की आवश्यकता पर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
पेंडिंग केसों का अंबार और बुनियादी ढांचे की कमी
CJI ने जोर देकर कहा कि अदालतों में लंबित मामलों (Pending Cases) की बढ़ती संख्या आज के समय में सबसे बड़ी चिंता है। न्याय मिलने में होने वाली देरी न केवल वादियों के धैर्य की परीक्षा लेती है, बल्कि यह न्याय प्रणाली के प्रति आम आदमी के भरोसे को भी प्रभावित करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निचली अदालतों से लेकर उच्च न्यायपालिका तक, बुनियादी ढांचे में सुधार और जजों के खाली पदों को भरना समय की मांग है।
कानूनी प्रक्रिया का सरलीकरण और तकनीक का उपयोग
मुख्य न्यायाधीश ने कानूनी भाषा और प्रक्रियाओं की जटिलता को भी एक बड़ी चुनौती माना। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो एक सामान्य नागरिक की समझ में आ सके। आधुनिक युग में तकनीक (AI और डिजिटलीकरण) को अपनाना अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। CJI के अनुसार, यदि हम ई-कोर्ट्स और डिजिटल डेटाबेस का सही इस्तेमाल करें, तो मामलों के निपटारे की गति में भारी इजाफा हो सकता है।
आम आदमी की पहुंच में हो न्याय
संबोधन का एक मुख्य हिस्सा न्याय की सुलभता (Accessibility) पर केंद्रित रहा। CJI सूर्यकांत ने चिंता जताई कि कानूनी लड़ाई का महंगा होना गरीबों और वंचितों को न्याय से दूर कर रहा है। उन्होंने कानूनी सहायता क्लीनिकों और मुफ्त कानूनी सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने पर जोर दिया ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी समय पर न्याय मिल सके। उनके इस बयान को भविष्य के न्यायिक रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।