चीन का भारत को खुला ऑफर: अमेरिका के खिलाफ हम आपके साथ हैं, पर क्या हैं इसके मायने?

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भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ सालों से काफी तनाव भरे रहे हैं, खासकर सीमा विवाद को लेकर। लेकिन अब चीन की तरफ से एक ऐसा बयान आया है, जिसने दुनिया भर के जानकारों को चौंका दिया है और भारत, चीन और अमेरिका के रिश्तों में एक नया मोड़ ला दिया है।

चीन ने साफ-साफ कहा है कि अगर अमेरिका भविष्य में भारत पर कोई सख्त व्यापारिक नियम या भारी टैक्स (टैरिफ) लगाता है, तो चीन पूरी मजबूती के साथ भारत के साथ खड़ा होगा।

चीन ने यह बात क्यों और अभी ही क्यों कही?

यह बयान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में वापसी की संभावनाओं को देखते हुए आया है। ट्रंप अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के लिए जाने जाते हैं, और उन्होंने ऐलान किया है कि अगर वह दोबारा राष्ट्रपति बने, तो चीन से आने वाले सामान पर 60% से भी ज़्यादा का भारी-भरकम टैक्स लगाएंगे। उन्होंने यह भी इशारा किया है कि दूसरे देशों पर भी ऐसे ही सख्त नियम लागू किए जा सकते हैं।

इसी खतरे को देखते हुए, भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग (Xu Feihong) ने यह बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा, "अगर ट्रंप की टैरिफ नीतियां भारत और दूसरे विकासशील देशों को भी निशाना बनाती हैं, तो चीन उनके खिलाफ भारत के साथ मिलकर खड़ा होगा।"

क्या हैं इस बयान के गहरे मायने?

सीमा पर तनाव के बावजूद चीन का यह 'दोस्ती का हाथ' बढ़ाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा लगता है:

  • कॉमन दुश्मन: चीन यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि इस समय भारत और चीन, दोनों का साझा दुश्मन अमेरिका की संरक्षणवादी व्यापार नीति है। यह 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त' वाली रणनीति है।
  • अमेरिका-भारत की दोस्ती में दरार डालने की कोशिश: पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं, जो चीन को पसंद नहीं आ रहा। इस बयान के जरिए चीन भारत को यह सोचने पर मजबूर करना चाहता है कि मुश्किल समय में कौन उसका असली साथी है।
  • खुद को विकासशील देशों का नेता दिखाना: चीन यह भी दिखाना चाहता है कि वह दुनिया के विकासशील देशों का नेता है और अमेरिका की दादागिरी के खिलाफ उनकी आवाज़ उठा सकता है।

यह बयान सिर्फ एक व्यापारिक प्रस्ताव नहीं है, बल्कि एक बड़ा कूटनीतिक दांव है। अब देखना यह होगा कि भारत चीन के इस surprising ऑफर पर कैसे प्रतिक्रिया देता है, क्योंकि भारत अपनी विदेश नीति को बहुत सावधानी और अपने हितों को ध्यान में रखकर तय करता है।