उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के पत्र पर पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव का अब तक का सबसे बड़ा कबूलनामा
छत्तीसगढ़ की सियासी सरजमीं से इस वक्त की एक बेहद बड़ी, सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सूबे के वर्तमान उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा लिखे गए एक पत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति में एक नया और जबरदस्त उबाल आ गया है। इस पूरे सियासी घमासान के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव (TS Singh Deo) ने एक ऐसा ऐतिहासिक और बड़ा कबूलनामा कर दिया है, जिसने न सिर्फ उनकी अपनी पार्टी बल्कि पूरी राजनीतिक बिरादरी को हैरान कर दिया है। विजय शर्मा के पत्र का जवाब देते हुए टीएस सिंहदेव ने बेहद बेबाकी और साफगोई से स्वीकार किया है कि, "हां, हमारे समय में काम रुका था, और इसी वजह से मैंने अपना पद छोड़ दिया था।" पूर्व उपमुख्यमंत्री के इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों में आरोपों-प्रत्यारोपों का एक नया दौर शुरू हो गया है, जिसने राज्य की राजनीति के कई पुराने पन्नों को एक बार फिर से खोलकर रख दिया है। आइए एक खोजी रिपोर्टर की नजर से देखते हैं कि आखिर डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने अपने पत्र में ऐसा क्या लिखा था और सिंहदेव के इस कबूलनामे के पीछे के असली सियासी मायने क्या हैं।
जानिए क्या था उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के उस पत्र में, जिसने बढ़ाई कांग्रेस की धड़कनें
पूरे विवाद की शुरुआत वर्तमान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के उस पत्र से हुई जो उन्होंने हाल ही में पूर्व डिप्टी सीएम टीएस सिंहदेव को संबोधित करते हुए लिखा था। इस पत्र में विजय शर्मा ने राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान रुकी हुई विकास योजनाओं, विशेषकर ग्रामीण विकास और प्रधानमंत्री आवास योजना (PM Awas Yojana) के क्रियान्वयन में हुई देरी को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। विजय शर्मा ने अपने पत्र में तंज कसते हुए और पुराने रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए पूछा था कि आखिर क्यों उस समय छत्तीसगढ़ के लाखों गरीबों के आशियाने का काम अधर में लटका रहा। वर्तमान सरकार के इस आक्रामक रुख ने कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि इस पर टीएस सिंहदेव का इतना सीधा और विस्फोटक जवाब सामने आएगा।
सिंहदेव की बेबाकी: पुराने मतभेदों और अंतर्कलह को फिर से किया सार्वजनिक
अक्सर अपनी शालीनता और स्पष्टवादिता के लिए जाने जाने वाले टीएस सिंहदेव ने विजय शर्मा के पत्र का जवाब देते हुए किसी भी तरह की लीपापोती करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह मानकर सबको चौंका दिया कि उनके कार्यकाल के दौरान कुछ महत्वपूर्ण विभागों में बजटीय दिक्कतों और प्रशासनिक कारणों से काम वाकई प्रभावित हुआ था। सिंहदेव ने कहा कि जब उन्हें लगा कि वे पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री के तौर पर जनता की उम्मीदों और वादों को पूरा करने में असमर्थ हो रहे हैं और योजनाओं के लिए पर्याप्त फंड आवंटित नहीं हो पा रहा है, तो उन्होंने बिना किसी देरी के नैतिकता के आधार पर खुद ही उस विभाग के मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका यह बयान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल के दौरान हुई अंदरूनी खींचतान और ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री पद के विवाद की यादों को एक बार फिर ताजा कर गया है।
बीजेपी को मिला बड़ा मुद्दा, कांग्रेस के भीतर मची भारी खलबली
टीएस सिंहदेव के इस बयान के सामने आते ही सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) को कांग्रेस के खिलाफ एक बहुत बड़ा और अचूक सियासी हथियार मिल गया है। बीजेपी के बड़े नेताओं और प्रवक्ताओं ने कहना शुरू कर दिया है कि सिंहदेव के इस कबूलनामे ने यह पूरी तरह साबित कर दिया है कि कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में सिर्फ आपसी लड़ाई लड़ी और राज्य के विकास को पूरी तरह ठप करके रख दिया। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के भीतर इस बयान को लेकर भारी खलबली और असहजता की स्थिति बनी हुई है। पार्टी के कई नेता इस मुद्दे पर कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, क्योंकि सिंहदेव का यह बयान सीधे तौर पर पूर्ववर्ती सरकार की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
छत्तीसगढ़ की जनता के बीच चर्चा तेज, क्या आगामी राजनीति पर पड़ेगा इसका गहरा असर?
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ की आम जनता और सोशल मीडिया पर भी लोग टीएस सिंहदेव के इस कदम की अपने-अपने तरीके से समीक्षा कर रहे हैं। जहां एक तरफ विपक्ष और आलोचक इसे कांग्रेस सरकार की विफलता का पुख्ता प्रमाण मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता का एक बड़ा वर्ग टीएस सिंहदेव की इस बात के लिए तारीफ भी कर रहा है कि उन्होंने राजनीति में इतनी ईमानदारी दिखाई और अपनी गलती को स्वीकार करने का साहस दिखाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंहदेव का यह कबूलनामा आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति को एक नया मोड़ दे सकता है और इसके चलते कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी गुटबाजी एक बार फिर से खुलकर सड़क पर आ सकती है।