बीजेपी के सीनियर नेता ने नाराज होकर छोड़ा मंच

बीजेपी के सीनियर नेता ने नाराज होकर छोड़ा मंच

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर अंदरूनी कलह और टिकट वितरण या सांगठनिक बैठकों में नाराजगी के किस्से अक्सर सुर्खियों में आते रहते हैं, लेकिन हाल ही में एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जिसने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। पार्टी के एक कद्दावर और वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंच पर अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेतृत्व और प्रबंधन से इस कदर खफा हुए कि उन्होंने गुस्से में भरा मंच बीच कार्यक्रम में ही छोड़ दिया। इतना ही नहीं, वीवीआईपी कुर्सियों और मंचीय गरिमा को दरकिनार करते हुए वे सीधे नीचे जमीन पर अपने समर्थकों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच दरी पर जाकर बैठ गए। कार्यक्रम में मौजूद मुख्य अतिथि और मंच पर बैठे राज्य सरकार के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री जब उस नाराज दिग्गज नेता को मनाने के लिए नीचे पहुंचे, तो उन्होंने मंत्री की सुलह की बात मानने से भी साफ इनकार कर दिया। इस अप्रिय घटना ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और विपक्षी दलों को भी बैठे-बिठाए सरकार व संगठन पर निशाना साधने का बड़ा मौका मिल गया है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि इस सियासी बगावत की असली पटकथा किसने और किन परिस्थितियों में लिखी।

क्या थी नाराजगी की असली वजह? मंचीय उपेक्षा और कार्यकर्ताओं की अनदेखी से फूटा गुस्सा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा वाकया उस समय हुआ जब स्थानीय स्तर पर पार्टी का एक बड़ा राजनीतिक सम्मेलन या जनसभा आयोजित की जा रही थी। मंच पर जिले के तमाम दिग्गज नेता, पदाधिकारी और प्रशासनिक अमले के खास लोग आसीन थे। लेकिन पार्टी के उस वरिष्ठ और पुराने नेता को, जिनका उस क्षेत्र में खासा जनाधार माना जाता है, या तो मंच पर सम्मानजनक स्थान नहीं दिया गया या फिर उनके समर्थकों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की लगातार हो रही उपेक्षा से उनका सब्र टूट गया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान जब भाषण देने या वरिष्ठ नेताओं के स्वागत का सैंडविच दौर चल रहा था, तब उस नेता की लगातार अनदेखी की जा रही थी। इस अपमानजनक स्थिति से आहत होकर वरिष्ठ नेता ने तुरंत अपना माइक बंद किया, मंच पर मौजूद अन्य नेताओं की तरफ देखा तक नहीं और गुस्से में सीधा नीचे उतर आए।

नीचे दरी पर बैठे सीनियर नेता, समर्थकों ने लगाए जिंदाबाद के नारे

मंच छोड़कर नीचे उतरे वरिष्ठ नेता जब आम कार्यकर्ताओं के बीच आकर दरी पर बैठ गए, तो उनके समर्थक भी उनके समर्थन में नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते उस कोने में कार्यकर्ताओं का भारी हुजूम इकट्ठा हो गया और पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी गूंजने लगी। नीचे बैठे नेता का साफ कहना था कि जो कार्यकर्ता दिन-रात पार्टी के लिए खून-पसीना बहाते हैं, जब उन्हीं की कोई पूछ नहीं होती और चापलूसों को मंच पर तरजीह दी जाती है, तो ऐसे मंच पर बैठने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। वरिष्ठ नेता के इस तेवर को देखकर वहां मौजूद तमाम स्थानीय नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। जमीन पर बैठकर उन्होंने पार्टी के भीतर चल रही मनमानी और गुटबाजी के खिलाफ अपना विरोध खुलकर दर्ज कराना शुरू कर दिया, जिससे सभा में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

मनाने पहुंचे कैबिनेट मंत्री भी हुए बैरंग वापस, सुलह की सारी कोशिशें हुईं फेल

मामले की गंभीरता को भांपते हुए मंच पर मौजूद राज्य सरकार के एक प्रभावशाली कैबिनेट मंत्री तुरंत अपनी कुर्सी छोड़कर नीचे आए। मंत्री महोदय ने पार्टी के वरिष्ठ नेता को गले लगाने और मनाने का पुरजोर प्रयास किया। उन्होंने कैमरों के सामने हाथ जोड़कर और अकेले में बातचीत करके मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की, ताकि पार्टी की सार्वजनिक किरकिरी न हो। लेकिन नाराज वरिष्ठ नेता अपने रुख पर पूरी तरह अड़े रहे। उन्होंने मंत्री की एक भी बात सुनने या मनाने से साफ इनकार कर दिया और दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक पार्टी के भीतर जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान बहाल नहीं किया जाता और मनमानी करने वालों पर लगाम नहीं लगती, तब तक वे किसी भी समझौते का हिस्सा नहीं बनेंगे। आखिरकार मंत्री को बैरंग वापस मंच पर लौटना पड़ा और उनकी यह मध्यस्थता पूरी तरह से विफल साबित हुई।

आगामी चुनावों से पहले बीजेपी के लिए बड़ी चेतावनी, आंतरिक कलह पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरी घटना ने राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आगामी चुनावों और राजनीतिक नियुक्तियों के ठीक पहले पार्टी के भीतर इस तरह का खुला विद्रोह संगठन के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है। यदि वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं में इसी तरह का असंतोष पनपता रहा, तो उसका सीधा असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। विपक्षी दल इस मौके को भुनाने में जुट गए हैं और लगातार बयानबाजी कर रहे हैं कि जिस पार्टी में अपने ही सीनियर नेता सुरक्षित और सम्मानित महसूस नहीं कर रहे, वह जनता का भला क्या करेगी। फिलहाल पार्टी का प्रदेश नेतृत्व इस पूरे प्रकरण पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन अंदरखाने डैमेज कंट्रोल करने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं ताकि इस बगावत की आग को और फैलने से रोका जा सके।