रायपुर बवाल : आक्रोशित वेंडरों ने नगर निगम कर्मियों और पुलिस बल पर बोला हमला
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से इस वक्त एक बहुत बड़ी, सनसनीखेज और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है, जिसने प्रशासनिक महकमे और पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। रायपुर के व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले भाठागांव (Bhatagaon, Raipur) इलाके में अवैध सब्जी बाजार को हटाने और अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई करने पहुंची नगर निगम की टीम और स्थानीय पुलिस बल पर अचानक गुस्साए वेंडरों और दुकानदारों ने हिंसक हमला बोल दिया। स्थिति इतनी बेकाबू हो गई कि देखते ही देखते सड़क रणक्षेत्र में तब्दील हो गई, जहां दोनों तरफ से पथराव और झड़प शुरू हो गई। इस भीषण संघर्ष के दौरान कई निगम कर्मी, पुलिस के जवान और स्थानीय वेंडर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत इलाज के लिए पास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और पूरे इलाके में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है। इस विशेष रिपोर्ट के माध्यम से हम विस्तार से जानेंगे कि रायपुर के भाठागांव में यह खूनी संघर्ष कैसे भड़का और इसके पीछे की पूरी प्रशासनिक व जमीनी सच्चाई क्या है।
भाठागांव में अतिक्रमण हटाने गई निगम टीम और वेंडरों के बीच कैसे भड़का विवाद?
राजधानी रायपुर के भाठागांव क्षेत्र में पिछले काफी समय से सड़क किनारे और अनाधिकृत जमीनों पर अवैध रूप से सब्जी बाजार लगाने की शिकायतें मिल रही थीं। इस अवैध कब्जे के कारण आए दिन मुख्य मार्गों पर भीषण ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होती थी और राहगीरों तथा स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। जनता और यातायात विभाग की लगातार शिकायतों के बाद रायपुर नगर निगम (Raipur Municipal Corporation) और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से एक अभियान चलाने का फैसला किया। तय योजना के तहत निगम का अमला भारी पुलिस बल के साथ भाठागांव पहुंचा और सड़क किनारे व सार्वजनिक भूमि पर लगी अवैध दुकानों व ठेलों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। प्रशासन का कहना था कि वेंडरों को पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी और उन्हें वेंडिंग जोन में शिफ्ट होने के लिए कहा गया था, लेकिन जब वेंडरों ने सामान हटाने से इनकार कर दिया, तो विवाद और अधिक गहरा गया।
अचानक हिंसक हुई झड़प: पथराव और लाठीचार्ज से रणक्षेत्र बना भाठागांव का इलाका
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जब निगम कर्मियों ने जेसीबी और अन्य उपकरणों की मदद से अस्थाई दुकानों को हटाना शुरू किया, तो वहां मौजूद सब्जी विक्रेता और वेंडर आक्रोशित हो गए। शुरुआती तीखी नोकझोंक और बहस के बाद मामला इतनी तेजी से बिगड़ा कि भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस और निगम की टीम पर पथराव शुरू कर दिया। अचानक हुए इस हमले से मौके पर अफरातफरी मच गई। निगम कर्मियों और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हल्का बल प्रयोग करने का प्रयास किया, जिससे माहौल और अधिक उग्र हो गया। आक्रोशित भीड़ ने पुलिस के वाहनों को भी निशाना बनाया और नारेबाजी शुरू कर दी। इस हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मियों के सिर और हाथों में चोटें आई हैं, जबकि कुछ निगम कर्मचारी और स्थानीय वेंडर भी घायल हुए हैं। खून से लथपथ घायल कर्मियों को तुरंत मौके से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
पुलिस का सख्त एक्शन, आरोपियों की पहचान और इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती
घटना की सूचना मिलते ही रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP), कलेक्टर और अन्य अलौकिक प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस फोर्स के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गए। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए पूरे भाठागांव चौक और आसपास के इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस ने उपद्रवियों की पहचान करने के लिए मौके पर मौजूद वीडियोग्राफी और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन ने यह कड़ा संदेश दिया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, कानून हाथ में लेने और पुलिस बल पर हमला करने वाले किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने इस मामले में कई उपद्रवियों को हिरासत में ले लिया है और उनके खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
शहरी नियोजन, वेंडिंग जोन नीति और प्रशासन के सामने खड़े हुए बड़े सवाल
भाठागांव की इस दर्दनाक और हिंसक घटना ने एक बार फिर से इस पुरानी और गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है कि शहरी क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने और गरीबों की आजीविका (Livelihood Issues) के बीच तालमेल कैसे बैठाया जाए। एक तरफ जहां शहर को सुंदर, व्यवस्थित और ट्रैफिक मुक्त बनाने के लिए नगर निगम को अवैध कब्जे हटाने जरूरी लगते हैं, वहीं दूसरी तरफ हजारों छोटे दुकानदार और सब्जी विक्रेता अपनी रोजी-रोटी छिन जाने के डर से आक्रामक हो जाते हैं। जानकारों का यह मानना है कि प्रशासन को किसी भी कड़ी कार्रवाई से पहले वेंडरों के लिए वैकल्पिक और स्थायी वेंडिंग जोन की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि इस तरह के खूनी संघर्षों से बचा जा सके। बहरहाल, रायपुर के भाठागांव में हुई इस घटना ने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है और हर तरफ इसी बात की चर्चा हो रही है कि आखिर इस समस्या का स्थायी समाधान क्या है।