वन्यजीव संरक्षण में बड़ी कामयाबी: तीन राज्यों के जंगलों में साझा एक्शन
भारत के समृद्ध जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा के मोर्चे पर सुरक्षा एजेंसियों, स्पेशल टास्क फोर्स और वन विभागों की संयुक्त टीमों ने एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय वन्यजीव तस्करों के अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय नेटवर्क पर एक साथ बड़ा प्रहार करते हुए अधिकारियों ने तीन अलग-अलग राज्यों के जंगलों और ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस सनसनीखेज और सुनियोजित कार्रवाई के दौरान खूंखार तस्करों के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो लंबे समय से देश के राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित जंगलों में बेखौफ होकर बेकसूर मूक वन्यजीवों का शिकार कर रहे थे। इस जॉइंट ऑपरेशन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें तस्करों के पास से वन्यजीवों के अंगों का ऐसा जखीरा बरामद हुआ, जिसे देखकर कानून और वन संरक्षण से जुड़े अधिकारियों के भी होश उड़ गए।
43 बाघ की हड्डियों का जखीरा और छह शातिर तस्कर गिरफ्तार
इस बड़े एंटी-पोचिंग ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों और वन विभाग की टीमों ने मौके से कुल छह शातिर वन्यजीव तस्करों को धर दबोचा, जो लंबे समय से इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे थे। पूछताछ और छानबीन के दौरान इन तस्करों की निशानदेही पर जो बरामदगी हुई, वह देश के वन्यजीव इतिहास को झकझोर देने वाली थी। तस्करों के ठिकानों से कुल 43 बाघ की हड्डियां बरामद की गईं, जो इस बात का सीधा और खौफनाक सबूत थीं कि इन शातिर अपराधियों ने न जाने कितने ही बाघों का क्रूरता से शिकार किया है। अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में बाघ की हड्डियों, खाल और अन्य अंगों की मांग बहुत ज्यादा होती है, जिसका इस्तेमाल अवैध दवाओं और तस्करों के जरिए विदेशों में सप्लाई करने के लिए किया जाता है। इन छह तस्करों की गिरफ्तारी से वन्यजीव तस्करी के एक बहुत बड़े सिंडिकेट की कमर टूट गई है और पुलिस अब इनके बाकी साथियों और खरीददारों की तलाश में जुटी हुई है।
बच्चे को सीने से लगाए मिली दुर्लभ पैंगोलिन की हृदयविदारक तस्वीर
इस पूरे अभियान के दौरान एक ऐसा दृश्य भी सामने आया जिसने कानून के रखवालों और वन्यजीव प्रेमियों का दिल पिघला दिया। तस्करों के चंगुल से मुक्त कराई गई वन्यजीवों की इस खेप में दुनिया के सबसे ज्यादा तस्करी किए जाने वाले और दुर्लभ जीवों में गिने जाने वाले 'पैंगोलिन' (Pangolin) को भी सुरक्षित बचा लिया गया। जब वन विभाग की टीम ने तस्करों के ठिकाने पर छापा मारा, तो एक मादा पैंगोलिन अपने छोटे से बच्चे को अपने सीने से मजबूती से चिपकाए हुए डरी-सहमी बैठी थी। तस्करों की इस निर्ममता के बीच मां का अपने बच्चे के प्रति वह असीम प्रेम और सुरक्षा का भाव इस बात का प्रतीक था कि इंसानियत किस हद तक गिर चुकी है। वन अधिकारियों ने तुरंत संवेदनशीलता दिखाते हुए दोनों को अपनी देखरेख में लिया और उनके स्वास्थ्य की जांच कराई। विशेषज्ञों के अनुसार, पैंगोलिन की यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है और इसकी खाल के अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैरकानूनी रूप से करोड़ों रुपये मिलते हैं।
वन्यजीवों की सुरक्षा और तस्करों के खिलाफ कड़े कदम की जरूरत
तीन राज्यों के जंगलों में चलाए गए इस सफल ऑपरेशन के बाद एक बार फिर यह बहस छिड़ गई है कि हमारे देश के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए अभी और कितने पुख्ता और कड़े इंतजाम करने की जरूरत है। पर्यावरणविदों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक तस्करों के इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट को जड़ से खत्म नहीं किया जाता, तब तक बाघ, तेंदुए और पैंगोलिन जैसे बेकसूर जीव सुरक्षित नहीं हो पाएंगे। हालांकि, इस बार वन विभाग और पुलिस ने जिस तत्परता, समन्वय और मुखबिर तंत्र का परिचय देते हुए इस कार्रवाई को अंजाम दिया है, वह निश्चित रूप से सराहनीय है। पकड़े गए छहों तस्करों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की सबसे सख्त धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज कर लिए गए हैं और उन्हें अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जा रहा है ताकि इस अवैध नेटवर्क की गहरी जड़ों तक पहुंचा जा सके।