छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग में बड़ा एक्शन: जुगाड़ के दम पर प्रमोट हुए 42 टैक्स इंस्पेक्टरों पर गिरी गाज

छत्तीसगढ़ जीएसटी विभाग में बड़ा एक्शन: जुगाड़ के दम पर प्रमोट हुए 42 टैक्स इंस्पेक्टरों पर गिरी गाज

भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी विभागों में पारदर्शिता के दावों के बीच कई बार ऐसे सनसनीखेज खुलासे सामने आते हैं जो सिस्टम की चूलें हिलाकर रख देते हैं। देश के तेजी से उभरते हुए औद्योगिक और ऊर्जा संपन्न राज्य छत्तीसगढ़ से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और प्रशासनिक हलचल पैदा करने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य के वाणिज्यिक कर यानी जीएसटी (GST) विभाग में भूचाल ला दिया है। विभाग के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी गड़बड़ियों, नियमों को ताक पर रखकर किए गए पदोन्नति के खेल और जुगाड़ की राजनीति का पर्दाफाश करते हुए शासन ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाया है। प्राप्त पुख्ता जानकारी के अनुसार, जुगाड़ और अनुचित तरीकों से टैक्स इंस्पेक्टर (Tax Inspector) के पद पर तैनात कर दिए गए कुल 42 अधिकारियों और कर्मचारियों को डिमोट (Demotion) कर दिया गया है। यानी कि जिन लोगों ने अपनी योग्यता के बजाय सिफारिश और सेटिंग के दम पर इंस्पेक्टर की कुर्सी हासिल की थी, उन्हें वापस उनके पुराने और मूल पद यानी 'बाबू' (Lower Division Clerk / Assistant) के रूप में डिग्रेड कर दिया गया है। इस ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है और भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट से जुड़े लोगों में खौफ का माहौल साफ देखा जा सकता है।

नियमों को ताक पर रखकर हुआ था प्रमोशन का खेल: कैसे खुली इस बड़े फर्जीवाड़े की पोल?

छत्तीसगढ़ के जीएसटी विभाग में हुए इस बहुचर्चित डिमोशन कांड की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभाग में विभिन्न पदों पर कार्यरत लिपिक वर्गीय कर्मचारियों (बाबुओं) को नियमों को दरकिनार करते हुए और चयन प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाते हुए टैक्स इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत कर दिया गया था। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस प्रमोशन के पीछे न तो वरिष्ठता सूची (Seniority List) के नियमों का पालन किया गया और न ही विधिक और प्रशासनिक योग्यताओं को प्राथमिकता दी गई, बल्कि विशुद्ध रूप से 'जुगाड़, रसूख और सांठगांठ' के बूते फाइलों को आगे बढ़ाकर इन आदेशों को अंजाम दिया गया था। जब इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायतें शासन और उच्च स्तर के अधिकारियों तक पहुंचीं, तो मामले की एक उच्चस्तरीय गोपनीय जांच बिठाई गई। जांच के दौरान जब एक-एक फाइल और प्रमोशन के दस्तावेजों की स्क्रूटनी की गई, तो विभाग के नुमाइंदों के होश उड़ गए क्योंकि दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर हेरफेर और नियमों की अनदेखी पकड़ी गई। इसके बाद बिना किसी लीपापोती के सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन सभी 42 फर्जी तरीके से बने टैक्स इंस्पेक्टरों के प्रमोशन आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया और उन्हें उनके मूल पदों पर वापस भेज दिया।

प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप और ईमानदार कर्मचारियों में जगी न्याय की उम्मीद

इस एक बड़े प्रशासनिक एक्शन के बाद से छत्तीसगढ़ के सचिवालय से लेकर तमाम जिला स्तरीय जीएसटी कार्यालयों तक सिर्फ इसी बात की चर्चा हो रही है। जो लोग जुगाड़ और ऊंची पहुंच के बल पर रातोंरात बाबू से इंस्पेक्टर बनकर शान से घूम रहे थे, अचानक डिमोट होकर वापस अपनी पुरानी टेबल पर लौटने से उनकी हवाइयां उड़ी हुई हैं। दूसरी तरफ, विभाग के उन सैकड़ों ईमानदार और योग्य कर्मचारियों में एक नई उम्मीद और खुशी की लहर दौड़ गई है जो वर्षों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे लेकिन सिफारिशी संस्कृति के कारण पीछे छूट जाते थे। कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए कहा है कि इस तरह की कार्रवाई से सरकारी तंत्र की साख फिर से बहाल होगी और भविष्य में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी नियमों के साथ खिलवाड़ करने का दुःसाहस नहीं करेगा। इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि देर-सवेर भ्रष्टाचार की दीवारें ढहती ही हैं और कानून का शिकंजा हर उस शख्स तक पहुंचता है जो शॉर्टकट अपनाकर आगे बढ़ने की कोशिश करता है।

शासन की सख्त चेतावनी: भ्रष्टाचार और बैकडोर एंट्री करने वालों पर आगे भी जारी रहेगा हंटर

छत्तीसगढ़ शासन और वाणिज्यिक कर विभाग के उच्च अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में यह संकेत दे दिया है कि महकमे के भीतर किसी भी प्रकार की अनियमितता, भाई-भतीजावाद या बैकडोर एंट्री को अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग अब उन तमाम अन्य मामलों की भी समीक्षा कर रहा है जहां पिछले कुछ वर्षों में संदेहास्पद तरीके से पदोन्नतियां या नियुक्तियां की गई हैं। इस कार्रवाई से यह कड़ा संदेश गया है कि सरकारी सेवा में केवल और केवल योग्यता, निष्ठा और ईमानदारी का ही बोलबाला होना चाहिए। जिन 42 लोगों को वापस बाबू बनाया गया है, उनके मामलों में यदि आगे किसी आपराधिक षड्यंत्र या वित्तीय गड़बड़ी के सुराग मिलते हैं, तो उन पर विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई का शिकंजा भी कसा जा सकता है। शासन के इस सख्त रुख से भ्रष्टाचार में लिप्त तत्वों की नींद उड़ चुकी है।