दिवाली से पहले खत्म होगा महानदी जल विवाद? बीजेपी शासित दो राज्यों और केंद्र की बैठक में बड़ा फैसला

दिवाली से पहले खत्म होगा महानदी जल विवाद? बीजेपी शासित दो राज्यों और केंद्र की बैठक में बड़ा फैसला

देश के दो पड़ोसी राज्यों—ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय से चला आ रहा महानदी जल विवाद अब अपने अंतिम दौर की बातचीत और समाधान की तरफ बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की सक्रिय मध्यस्थता और पहल के बाद दोनों राज्यों ने अगले तीन से चार महीनों के भीतर इस अंतर-राज्यीय जल विवाद का एक सौहार्दपूर्ण और सर्वसम्मत हल निकालने पर सहमति व्यक्त की है। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में एक बेहद महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आमने-सामने बैठकर चर्चा की। इस अहम बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस बहुप्रतीक्षित विवाद को इस साल दिवाली से पहले सुलझा लिया जाएगा।

तीनों जगह बीजेपी सरकार होने से आम सहमति की राह हुई आसान

राजनीतिक जानकारों और अधिकारियों का मानना है कि इस बार इस जटिल मामले का समाधान निकलना काफी आसान नजर आ रहा है, क्योंकि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और केंद्र—तीनों ही जगहों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकारें सत्ता में हैं। इसी राजनीतिक तालमेल को देखते हुए केंद्र सरकार ने दोनों राज्यों को मामले में लगातार तकनीकी परामर्श जारी रखने का सुझाव दिया है। केंद्र ने अतीत में संवाद के जरिए सुलझाए गए कई अन्य अंतर-राज्यीय जल विवादों का उदाहरण देते हुए इस मसले को भी आपसी सद्भाव और बातचीत से हल करने पर जोर दिया है। महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने अपने पिछले आदेश में साफ कर दिया था कि यदि दोनों राज्य किसी साझा फॉर्मूले को तय समय में अंतिम रूप नहीं दे पाते हैं, तो न्यायाधिकरण अपने स्तर पर मेरिट के आधार पर अंतिम फैसला सुनाएगा।

क्या है महानदी जल विवाद का इतिहास और दोनों राज्यों का पक्ष?

गौरतलब है कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर यह खींचतान साल 2016 से चली आ रही है। महानदी के निचले तटीय राज्य होने के नाते ओडिशा सरकार का लगातार यह आरोप रहा है कि छत्तीसगढ़ ने नदी पर एकतरफा तरीके से कम से कम 8 बैराजों का निर्माण करवा लिया है, जिसकी वजह से मानसून के बाद के महीनों में ओडिशा में पानी का प्राकृतिक प्रवाह बुरी तरह प्रभावित होता है। इसके विपरीत, छत्तीसगढ़ का अपना तकनीकी और भौगोलिक तर्क रहा है कि राज्य में नदी का एक बड़ा जलग्रहण क्षेत्र स्थित है, जिसके चलते उसे विकास और सिंचाई के लिए महानदी के पानी का उपयोग करने का पूरा अधिकार है। साल 2016 में केंद्र ने जब बातचीत से हल निकालने की कोशिश की थी, तब ओडिशा की तत्कालीन बीजेडी सरकार ने कानूनी रास्ता चुनते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके बाद मार्च 2018 में ट्रिब्यूनल का गठन हुआ था।

बदली राजनीतिक फिजा और परस्पर लाभकारी समझौतों की ओर बढ़ते कदम

साल 2024 में ओडिशा की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया और वहां बीजेडी के 24 लंबे सालों के शासन का अंत होने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सत्ता की कमान संभाली। इसके बाद से ही दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच संबंधों में नरमी आई है और आपसी सहयोग से मामलों को सुलझाने के रास्ते खुले हैं। हालिया बैठक के बाद ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि राज्य का रुख हमेशा से अपने लोगों के अधिकारों, किसानों के हितों और जल संसाधनों की सुरक्षा को लेकर सर्वोपरि रहा है। दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी और संयुक्त तकनीकी समिति पहले ही कई दौर की बातचीत पूरी कर चुकी हैं, जिससे यह उम्मीद बंध गई है कि बहुत जल्द महानदी के पानी का यह पुराना गतिरोध हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।

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