लोगों का दिल जीतना सीखें और उनके बीच जाएं', जेपी नड्डा की राहुल गांधी को खरी-खरी सलाह

लोगों का दिल जीतना सीखें और उनके बीच जाएं', जेपी नड्डा की राहुल गांधी को खरी-खरी सलाह

देश की राष्ट्रीय राजनीति में चुनाव नतीजों और प्रशासनिक निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर वाकयुद्ध छिड़ गया है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (JP Nadda) ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। हालिया चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस और विपक्षी दलों द्वारा लगातार चुनाव आयोग (Election Commission) और ईवीएम (EVM) पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को एक अहम नसीहत दी है। जेपी नड्डा ने तंज कसते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद हर बार संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने के बजाय विपक्ष को ज़मीनी स्तर पर जाकर 'लोगों का दिल जीतना सीखना चाहिए'। उन्होंने कहा कि जब जनता आपको नकार देती है, तब चुनाव आयोग को दोषी ठहराना अपनी कमियों पर पर्दा डालने का एक पुराना और घिसा-पिटा पैंतरा बन चुका है। जेपी नड्डा के इस बयान के बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर काफी तेज हो गया है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि बीजेपी अध्यक्ष ने अपने इस आक्रामक बयान में कौन-कौन से मुख्य मुद्दे उठाए हैं।

चुनाव हारने पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना कांग्रेस की पुरानी आदत: जेपी नड्डा का हमला

एक सार्वजनिक कार्यक्रम और मीडिया संबोधन के दौरान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में चुनाव जनता की अदालत में लड़े जाते हैं, न कि बयानों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए। उन्होंने कहा कि जब भी कांग्रेस चुनाव जीतती है (जैसे हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना या कर्नाटक में), तब चुनाव आयोग और ईवीएम मशीनें पूरी तरह से सही और निष्पक्ष हो जाती हैं। लेकिन जैसे ही देश या किसी बड़े राज्य की जनता उन्हें खारिज कर देती है, वैसे ही पूरी कांग्रेस पार्टी और उनके शीर्ष नेता राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने का काम शुरू कर देते हैं। जेपी नड्डा ने दो टूक शब्दों में कहा कि लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान करना सीखना सबसे बड़ी बात होती है और जब बीजेपी चुनाव जीतती है, तब वह चुनाव आयोग की मेहरबानी से नहीं बल्कि जनता के अटूट विश्वास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों की बदौलत जीतती है।

'जनता के बीच जाएं और उनका दिल जीतें': राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन को दी सीधी नसीहत

कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए जेपी नड्डा ने राहुल गांधी को एसी कमरों और विदेश दौरों की राजनीति छोड़कर देश के आम नागरिकों के बीच जाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में वोट किसी के मांगने या आरोप लगाने से नहीं मिलता, बल्कि जनता के दुख-दर्द में उनका साथ निभाने और उनके लिए काम करने से मिलता है। जेपी नड्डा ने कहा कि 'यदि आप चुनाव जीतना चाहते हैं, तो सबसे पहले देश के गरीब, युवा, महिला और किसान वर्ग का दिल जीतना सीखें'। जब तक विपक्ष जनता की नब्ज और जमीनी धरातल से दूर रहेगा, तब तक उसे केवल हार का सामना ही करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अपनी सांगठनिक कमजोरियों और विफलता को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ना लोकतंत्र की बुनियादी मर्यादाओं का उल्लंघन है।

बीजेपी के मजबूत संगठन और मोदी सरकार की नीतियों का दिया हवाला

अपने संबोधन के दौरान जेपी नड्डा ने भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता का राज उजागर करते हुए कहा कि बीजेपी 365 दिन जनता के बीच रहने वाला और बूथ स्तर पर काम करने वाला दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही जन-कल्याणकारी योजनाओं जैसे—मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और बुनियादी ढांचे के विकास ने देश के कोने-कोने में रहने वाले लोगों के जीवन को आसान बनाया है। इसी वजह से देश का हर नागरिक बार-बार चुनाव में बीजेपी और एनडीए के पक्ष में मतदान करता है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे नकारात्मक और नकारात्मकता फैलाने वाली राजनीति को छोड़कर देश के विकास में सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएं।

सियासी घमासान तेज: नड्डा के बयान के बाद कांग्रेस ने भी दिया करारा जवाब

जेपी नड्डा के इस तीखे और आक्रामक बयान के सामने आते ही कांग्रेस पार्टी और मुख्य विपक्षी नेताओं की ओर से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने बीजेपी अध्यक्ष के बयान को सच्चाई से भागने की कोशिश बताया है और कहा है कि निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की मांग करना किसी भी लोकतांत्रिक देश में विपक्ष का अधिकार और कर्तव्य है। कांग्रेस का कहना है कि वे जनता के मुद्दों को लेकर लगातार सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, जेपी नड्डा के इस कड़े रुख ने एक बार फिर से देश में चुनाव आयोग की निष्पक्षता, ईवीएम बहस और राजनीतिक बयानों के तापमान को बढ़ा दिया है। आने वाले समय में यह जुबानी जंग और कितनी तीखी होती है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहेंगी।