रॉयल ब्लू साड़ी में एके-47 थामे नजर आईं IPS अंकिता शर्मा
भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के इतिहास में कई ऐसे जांबाज और दबंग अधिकारी हुए हैं जिनके नाम से ही अपराधियों के पसीने छूट जाते हैं, लेकिन जब कोई महिला अधिकारी अपनी खूबसूरती और शालीनता के साथ-साथ हाथों में अत्याधुनिक हथियार थामकर रणक्षेत्र में उतरती है, तो उसका अंदाज देखने लायक होता है। सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों छत्तीसगढ़ की एक महिला आईपीएस अधिकारी की तस्वीरें और चर्चे आग की तरह फैल रहे हैं, जिसमें वे एक खूबसूरत रॉयल ब्लू साड़ी पहने हुए कंधे पर एके-47 राइफल लटकाए हुए पूरी शान से नजर आ रही हैं। यह कोई फिल्मी शूट या किसी फोटोशूट की तस्वीर नहीं है, बल्कि यह उस हकीकत की बानगी है जो देश के सबसे खूंखार और संवेदनशील नक्सल प्रभावित बस्तर के जंगलों के बीच ड्यूटी निभा रही हैं। छत्तीसगढ़ कैडर की यह युवा और तेज-तर्रार आईपीएस अफसर कोई और नहीं बल्कि बस्तर की पहली महिला एडिशनल एसपी और अपनी बहादुरी के लिए पूरे देश में पहचानी जाने वाली अंकिता शर्मा हैं। उनके इस अनोखे और निडर रूप ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नारी शक्ति चाहे तो साड़ी पहनकर भी देश की सुरक्षा के सबसे बड़े मोर्चे को संभाल सकती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि कौन हैं IPS अंकिता शर्मा और क्यों उनके नाम से नक्सलियों के खेमे में हड़कंप मच जाता है।
कौन हैं IPS अंकिता शर्मा, जिन्होंने पहले ही प्रयास में बिना किसी कोचिंग के क्रैक किया था UPSC
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दुर्ग जिले से ताल्लुक रखने वाली अंकिता शर्मा का शुरुआती जीवन और यहां तक पहुंचने का सफर किसी प्रेरणादायक कहानी से कम नहीं है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा दुर्ग से ही पूरी करने के बाद बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की पढ़ाई की, जिसके बाद उनके मन में प्रशासनिक सेवा में जाकर देश की सेवा करने का विचार आया। आमतौर पर यूपीएससी (UPSC) जैसी देश की सबसे कठिन परीक्षा को पास करने के लिए दिल्ली या अन्य बड़े महानगरों के महंगे कोचिंग संस्थानों का सहारा लिया जाता है, लेकिन अंकिता ने घर पर ही रहकर सेल्फ स्टडी (स्वयं अध्ययन) करने का फैसला किया। अपने पहले दो प्रयासों में असफलता मिलने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और अपनी गलतियों से सीखते हुए साल 2018 के यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में शानदार सफलता हासिल करते हुए आईपीएस (IPS) का पद प्राप्त किया। छत्तीसगढ़ कैडर मिलने के बाद उन्होंने अपनी पहली पोस्टिंग से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वे एसी कमरों में बैठकर फाइलें निपटाने वाली अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे धरातल पर उतरकर कानून व्यवस्था सुधारने और देश से आतंकवाद तथा नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने में विश्वास रखती हैं।
छत्तीसगढ़ के लाल आतंक के गढ़ बस्तर में संभाली कमान, नक्सलियों के लिए बनीं काल
आईपीएस अंकिता शर्मा की असली परीक्षा तब शुरू हुई जब उन्हें देश के सबसे खूंखार नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर संभाग और छत्तीसगढ़ के माओवादी गढ़ में तैनात किया गया। बस्तर का यह वह इलाका है जहां परिंदा भी पर मारने से डरता है और आए दिन सुरक्षा बलों पर बारूदी सुरंगों तथा घात लगाकर हमले किए जाते हैं। ऐसे संवेदनशील और खतरनाक क्षेत्र में एडिशनल एसपी के रूप में कार्यभार संभालना किसी साधारण इंसान के बस की बात नहीं है, लेकिन अंकिता ने अपने फौलादी हौसलों से यह साबित कर दिया कि खाकी वर्दी सिर्फ कपड़े का रंग नहीं बल्कि जिगर का नाम है। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ चलाए जाने वाले कई बड़े एंटी-नक्सल ऑपरेशंस (Anti-naxal operations) की खुद फ्रंटलाइन से अगुवाई की है। घने जंगलों, पथरीले रास्तों और गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच वे अपने जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलती हैं। उनके इसी आक्रामक और निडर नेतृत्व शैली के कारण आज बस्तर के जंगलों में सक्रिय नक्सलियों और उनके कमांडरों के दिलों में अंकिता शर्मा का खौफ साफ तौर पर देखा जा सकता है।
साड़ी में हथियार के साथ तस्वीर के पीछे का सच और देश की बेटियों के लिए बनीं मिसाल
सोशल मीडिया पर जब अंकिता शर्मा की रॉयल ब्लू साड़ी में एके-47 थामे तस्वीर वायरल हुई, तो लोगों के मन में यह सवाल आया कि आखिर ड्यूटी के दौरान इस लिबास में रहने का क्या कारण था। दरअसल, कई बार महिला अधिकारी जनता के बीच उनके कार्यक्रमों में शामिल होने जाती हैं, जहाँ उन्हें अपनी पारंपरिक गरिमा का भी ध्यान रखना होता है और साथ ही अपनी सुरक्षा तथा तुरंत एक्शन लेने की तैयारी भी रखनी पड़ती है। अंकिता ने यह दिखा दिया कि एक आधुनिक भारतीय महिला अपनी संस्कृति और पारंपरिक परिधानों से जुड़े रहकर भी देश के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण दायित्व को पूरी निपुणता के साथ निभा सकती है। उनके इस रूप ने देश भर की लाखों युवा लड़कियों और बेटियों के मन में यह विश्वास जगा दिया है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। चाहे वह कला और संस्कृति का मंच हो या फिर छत्तीसगढ़ के खूंखार जंगलों की खूनी लड़ाई, अंकिता शर्मा हर मोर्चे पर एक अजेय योद्धा की तरह डटी हुई हैं। उनकी इस असाधारण बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के लिए उन्हें देश भर में सराहा जा रहा है और वे आने वाली पीढ़ी के लिए एक सच्ची प्रेरणा बन चुकी हैं।