6 घंटे बिजली नहीं जाती तो मोदी पूर्व प्रधानमंत्री होते', पूर्व सीएम का सनसनीखेज दावा

6 घंटे बिजली नहीं जाती तो मोदी पूर्व प्रधानमंत्री होते', पूर्व सीएम का सनसनीखेज दावा

देश की सियासत में एक बार फिर बयानों के बाण चलने शुरू हो गए हैं, जिसने चुनावी समर और राजनीतिक गलियारों में भारी तहलका मचा दिया है। राज्य के एक कद्दावर पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर अब तक का सबसे तीखा और सनसनीखेज हमला बोला है। एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनावों में यदि वाराणसी संसदीय सीट पर मतगणना के दौरान 6 घंटे के लिए बिजली की कटौती न हुई होती, तो देश के राजनीतिक नतीजे कुछ और ही होते। उन्होंने भरे मंच से कहा कि अगर वो 6 घंटे बिजली की बत्ती गुल न हुई होती, तो नरेंद्र मोदी आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री बन चुके होते और वाराणसी से अपनी संसदीय सीट भी गंवा चुके होते। पूर्व मुख्यमंत्री के इस धमाकेदार और विवादित बयान के बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। आइए इस विस्तृत रिपोर्ट में जानते हैं कि पूर्व सीएम ने इस दावे के पीछे क्या-क्या तर्क दिए हैं और बीजेपी ने इस पर किस तरह पलटवार किया है।

'6 घंटे बिजली गुल होने का खेल': पूर्व सीएम ने मतगणना के दिन की पूरी कहानी पर उठाए गंभीर सवाल

जनसभा में जनता की भारी भीड़ को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने मतगणना वाले दिन की घटनाओं को परत-दर-परत जनता के सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी लोकसभा सीट पर राउंड दर राउंड वोटों की गिनती के दौरान मुकाबला बेहद कड़ा चल रहा था और एक वक्त ऐसा आया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से पीछे चल रहे थे। पूर्व सीएम का दावा है कि ठीक उसी समय मतगणना केंद्र की बिजली अचानक 6 घंटे के लिए गुल हो गई। उन्होंने गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी हाई-प्रोफाइल सीट पर जहां खुद देश के प्रधानमंत्री चुनाव लड़ रहे हों, वहां घंटों बिजली का गायब होना किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। उनका आरोप है कि इसी 6 घंटे के अंधेरे और बिजली कटौती के खेल का फायदा उठाकर नतीजों को प्रभावित किया गया, वरना नतीजे पूरी तरह से उलट आते।

'वाराणसी से हार जाते चुनाव': नतीजे और प्रशासनिक तंत्र पर बोला करारा हमला

अपने भाषण में पूर्व सीएम यहीं नहीं रुके, उन्होंने केंद्र और राज्य के प्रशासनिक तंत्र पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2024 के आम चुनावों में देश की जनता बदलाव के मूड में थी और वाराणसी की जनता ने भी अपना जनादेश दे दिया था। लेकिन सरकारी मशीनरी और प्रशासनिक दबाव के दम पर चुनाव परिणामों का रुख मोड़ा गया। पूर्व सीएम ने जनता से कहा कि यदि निष्पक्ष तरीके से बिना किसी बाधा के गिनती पूरी होती, तो वाराणसी का नतीजा देश में एक नया इतिहास लिखता। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ 6 घंटे के उस बिजली संकट ने चुनाव के नतीजे बदल दिए और एक ऐसी सरकार को दोबारा सत्ता में ला खड़ा किया जिसे जनता नकार चुकी थी। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

भारतीय जनता पार्टी का करारा पलटवार: 'हार की बौखलाहट में मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रहा है विपक्ष'

पूर्व मुख्यमंत्री के इस सनसनीखेज और विवादित बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश और राष्ट्रीय नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। बीजेपी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने पूर्व सीएम के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे 'हार की हताशा और बौखलाहट' करार दिया है। बीजेपी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि जब भी विपक्ष चुनाव हारता है, तो वे कभी ईवीएम (EVM) पर, कभी चुनाव आयोग पर तो कभी बिजली जाने जैसे हास्यास्पद आरोप लगाने लगते हैं। बीजेपी का कहना है कि वाराणसी की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों और उनकी नीतियों पर भरोसा जताकर उन्हें ऐतिहासिक जनादेश दिया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि मतगणना केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों और जनरेटर की बैकअप व्यवस्था के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ गिनती संपन्न कराई गई थी।

सियासी गलियारों में गरमाई राजनीति: आगामी चुनावों पर क्या पड़ेगा इसका असर?

चुनावों में धांधली और बिजली कटौती के इन सनसनीखेज आरोपों ने आने वाले राज्य और राष्ट्रीय चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल को पूरी तरह से गरमा दिया है। एक तरफ जहां विपक्षी दल इस बयान को भुनाकर सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष इसे जनता को गुमराह करने की कोशिश बता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के तीखे आरोप आगामी रैलियों और चुनावी अभियानों का मुख्य मुद्दा बनने वाले हैं। अब देखना यह होगा कि इस बयानबाजी की आग आने वाले दिनों में क्या नया मोड़ लेती है और जनता इस पर अपनी क्या राय कायम करती है।