यूसीसी और बिजली के निजीकरण पर गरमाई छत्तीसगढ़ की सियासत, पीसीसी चीफ दीपक बैज बोले- हर मोर्चे पर करेंगे कड़ा विरोध
छत्तीसगढ़ में इन दिनों राजनीतिक पारे में लगातार उबाल देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार द्वारा लिए जा रहे एक के बाद एक नीतिगत फैसलों के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपना लिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राजधानी रायपुर में एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सरकार पर निशाना साधते हुए दो बड़े मुद्दों पर जोरदार हमला बोला है। पहला मुद्दा समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) से जुड़ा है, तो दूसरा गंभीर मुद्दा राज्य में बिजली वितरण प्रणाली को निजी हाथों में सौंपने और निजी कंपनियों को लाइसेंस देने की तैयारियों का है। कांग्रेस का साफ तौर पर कहना है कि सरकार की ये नीतियां न केवल आम जनता की जेब पर भारी पड़ने वाली हैं, बल्कि यह राज्य के मूल अधिकारों और सामाजिक ताने-बाने पर भी एक बड़ा प्रहार हैं। विपक्षी दल ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जनता से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार ने अपना रुख नहीं बदला, तो कांग्रेस पार्टी चुप बैठने वाली नहीं है और सड़क से लेकर सदन तक हर मोर्चे पर इस तानाशाही का पुरजोर विरोध किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इन बयानों के बाद से सरगर्मी काफी तेज हो गई है और यह माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इन मुद्दों को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ सकता है।
यूसीसी (समान नागरिक संहिता) को लेकर आदिवासियों के अधिकारों का मुद्दा
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी लागू करने की सुगबुगाहट और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के तेज होने के बाद से ही सियासी तापमान काफी चढ़ गया है। राज्य सरकार ने यूसीसी के प्रारूप और उसके क्रियान्वयन पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जिसने हाल ही में राजधानी रायपुर में विभिन्न समाज के प्रमुखों और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक भी की है। हालांकि सरकार की ओर से यह संकेत दिए गए हैं कि आदिवासी वर्ग को इसके दायरे से बाहर रखा जा सकता है, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी इस प्रक्रिया के विरोध में पूरी तरह से हमलावर मुद्रा में आ गई है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए इसे सीधे तौर पर आदिवासियों के अधिकारों और उनके पारंपरिक हितों पर एक बड़ा हमला करार दिया है। उनका आरोप है कि यह सब कुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है जिससे राज्य के मूल निवासियों की संस्कृति और रूढ़िवादी अधिकारों को कमजोर किया जा सके। कांग्रेस का मानना है कि विविधता से भरे हमारे देश और प्रदेश में इस तरह के कानून थोपने से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का यह भी कहना है कि वे आदिवासियों और आम जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और राजनीतिक संघर्ष करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। सरकार और विपक्ष के बीच छिड़ी इस वैचारिक जंग ने अब तूल पकड़ लिया है, और विभिन्न आदिवासी संगठनों की ओर से भी इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिससे यह मामला और अधिक संवेदनशील बनता जा रहा है।
बिजली वितरण में निजी कंपनियों की एंट्री पर गरमाई सियासत
यूसीसी के साथ-साथ जिस दूसरे सबसे बड़े मुद्दे ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में भूचाल ला रखा है, वह राज्य के विद्युत क्षेत्र में निजी भागीदारी और कंपनियों को बांटे जा रहे लाइसेंस का मामला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ की रीढ़ मानी जाने वाली सार्वजनिक विद्युत कंपनियों को धीरे-धीरे बेचने और निजी घरानों को सौंपने का षड्यंत्र रच रही है। हाल ही में राजधानी रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में बिजली वितरण के लिए एक निजी नामी गिरामी कंपनी (जैसे टाटा समूह) द्वारा लाइसेंस की अनुमति मांगे जाने के बाद से कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि जब राज्य की अपनी सरकारी बिजली कंपनियां पूरी तरह से सक्षम और आत्मनिर्भर हैं, तो फिर बिजली वितरण का जिम्मा निजी हाथों में देकर उपभोक्ताओं को महंगे दामों पर बिजली खरीदने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है। विपक्षी दल का दावा है कि निजी कंपनियों के आने से बिजली की दरों में भारी बढ़ोतरी होगी और आम जनता को भारी-भरकम बिजली बिलों के जरिए लूटा जाएगा। पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रही बिजली दरों, स्मार्ट मीटर के विरोध और फ्यूल सरचार्ज को लेकर जनता के बीच पहले से ही असंतोष का माहौल बना हुआ है। ऐसे में बिजली वितरण में निजी क्षेत्र के प्रवेश की सुगबुगाहट ने आग में घी डालने का काम किया है। कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे आम उपभोक्ताओं के हितों पर किसी भी कीमत पर डाका नहीं डालने देंगे और बिजली कंपनियों के इस निजीकरण के विरोध में जोरदार जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
कांग्रेस का आक्रामक रुख, हर मोर्चे पर विरोध की चेतावनी
छत्तीसगढ़ में आगामी समय में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों और राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से ये दोनों ही मुद्दे कांग्रेस के लिए बहुत बड़े हथियार साबित हो रहे हैं। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने दो टूक शब्दों में ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी जनता के अधिकारों की सुधि लेते हुए चुप नहीं बैठने वाली है। चाहे वह आदिवासियों के हितों से जुड़ा यूसीसी का मामला हो या फिर घर-घर की जेब पर असर डालने वाली बिजली वितरण की निजी कंपनियों का मुद्दा हो, पार्टी हर एक फ्रंट पर सरकार को घेरेगी। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी वार्डों तक जाकर आम जनता को इन नीतियों के दुष्प्रभावों के बारे में बताएं और उन्हें जागरूक करें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के लिए आने वाले दिन आसान नहीं होने वाले हैं क्योंकि विपक्ष इन दोनों संवेदनशील मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर एक बड़ा जनांदोलन खड़ा करने की तैयारी में है। सरकार के नुमाइंदों का भले ही यह तर्क हो कि ये सारे बदलाव पारदर्शिता और बेहतर सेवाओं के लिए किए जा रहे हैं, लेकिन विपक्ष के आक्रामक तेवर यह बताने के लिए काफी हैं कि विधानसभा से लेकर सड़कों तक इन नीतियों को लेकर तीखी रस्साकशी देखने को मिलेगी। जनता भी अब यह बड़ी बारीकी से देख रही है कि इन राजनीतिक कारों के बीच उनके हितों की रक्षा आखिर किस प्रकार से सुनिश्चित की जाती है।