Unesco World Heritage List में भारत की 3 नई जगहें शामिल

Unesco World Heritage List में भारत की 3 नई जगहें शामिल

भारतीय पर्यटन और सांस्कृतिक इतिहास के पन्नों में एक बार फिर से स्वर्ण अक्षरों में नया अध्याय जुड़ गया है। देश के लिए यह गर्व का पल है क्योंकि यूनेस्को (UNESCO) की प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची में भारत के तीन और अद्भुत स्थलों को आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। दुनिया भर में अपनी प्राकृतिक विविधता, प्राचीन संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पहचाने जाने वाले भारत के इन नए स्थलों के वैश्विक मानचित्र पर आने से देश के टूरिज्म सेक्टर को एक जबरदस्त और ऐतिहासिक पंख लग गए हैं। इस बार इस सूची में शामिल होने वाले स्थान कोई आम जगहें नहीं हैं, बल्कि ये भारत के सबसे खूबसूरत और रहस्यों से भरे कोनों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें से कुछ स्थल बंगाल की खाड़ी के नीले पानी के बीच बसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अनछुई सुंदरता से जुड़े हैं, तो वहीं दूसरा महत्वपूर्ण स्थल छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और प्राचीन आदिवासी संस्कृति की गोद से सामने आया है। जैसे ही यूनेस्को की तरफ से इन तीनों स्थलों के चयन की आधिकारिक घोषणा हुई, वैसे ही देश भर के पर्यटन प्रेमियों, इतिहासविदों और स्थानीय निवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। आइए विस्तार से जानते हैं कि वे कौन सी तीन जादुई जगहें हैं जिन्हें इस वैश्विक सूची में जगह मिली है और इनकी क्या खास विशेषताएं हैं।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अनूठी प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता का डंका

यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में अपनी जगह बनाने वाले स्थलों में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के दो प्रमुख और प्राकृतिक रूप से समृद्ध स्थान शामिल किए गए हैं। बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के बीच फैला यह द्वीपसमूह अपनी क्रिस्टल जैसी साफ नीले पानी की तहों, मूंगा चट्टानों (Coral Reefs) और घने सदाबहार जंगलों के लिए पूरी दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। यहां की भौगोलिक और पारिस्थितिकीय विशेषताएं इतनी अनूठी हैं कि दुनिया में शायद ही कहीं और ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिलता हो। इन स्थलों के यूनेस्को सूची में शामिल होने से न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन द्वीपों की पहचान और अधिक मजबूत होगी, बल्कि सरकार और स्थानीय प्रशासन को भी इनके संरक्षण तथा पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन (Eco-tourism) को बढ़ावा देने में भारी मदद मिलेगी। शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के अनुसार, इन क्षेत्रों में पाई जाने वाली वनस्पतियों और जीवों की कई दुर्लभ प्रजातियां ऐसी हैं जो पृथ्वी पर अन्यत्र कहीं और नहीं मिलतीं। इस वैश्विक मान्यता के बाद अब देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए अंडमान और निकोबार की इन धरोहरों को देखना और भी अधिक रोमांचक और गौरवशाली अनुभव बन जाएगा।

छत्तीसगढ़ के घने जंगलों और प्राचीन ऐतिहासिक विरासत को मिला वैश्विक सम्मान

अंडमान के बाद इस सूची में तीसरा महत्वपूर्ण स्थान छत्तीसगढ़ राज्य से शामिल किया गया है, जिसने देश के मध्य भाग की समृद्ध और प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर वैश्विक मंच पर ला खड़ा किया है। छत्तीसगढ़ को वैसे तो उसके प्राकृतिक सौंदर्य, झरनों और आदिवासी संस्कृति के लिए 'धान का कटोरा' और प्रकृति का वरदान कहा जाता है, लेकिन अब इसकी ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहरों ने भी दुनिया भर का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। छत्तीसगढ़ के जिस विशेष स्थल को यूनेस्को की सूची में जगह मिली है, वह सदियों पुराने इतिहास, वास्तुकला और स्थानीय जनजातीय परंपराओं का एक बेजोड़ संगम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता के मिलने से छत्तीसगढ़ में पर्यटन की असीम संभावनाएं खुल जाएंगी और राज्य के सुदूर इलाकों तक देश-विदेश के पर्यटक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि वहां की पारंपरिक कला, शिल्प और लोक संस्कृति को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान और सम्मान मिलेगा। राज्य सरकार और स्थानीय नागरिकों के लिए यह किसी बड़े उत्सव से कम नहीं है क्योंकि उनकी वर्षों की मेहनत और इन धरोहरों का संरक्षण अब रंग लाया है।

भारत में पर्यटन का स्वर्णिम भविष्य और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सांस्कृतिक कूटनीति

भारत में अब यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की कुल संख्या में इजाफा होने के बाद देश दुनिया के उन चुनिंदा देशों की पंक्ति में और अधिक मजबूती से खड़ा हो गया है जिनकी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत सबसे समृद्ध मानी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह 'देखो अपना देश' और भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। इन स्थलों के चयन से पहले अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीमों ने कई महीनों तक यहां का दौरा किया था और इनकी ऐतिहासिक, पारिस्थितिकीय तथा सांस्कृतिक प्रासंगिकता की बारीकी से जांच की थी, जिसके बाद इन तीनों स्थलों को खरा पाया गया। जैसे-जैसे देश के इन नए टूरिस्ट डेस्टिनेशंस पर दुनिया भर के पर्यटकों की निगाहें टिकेंगी, वैसे-वैसे भारतीय आतिथ्य और पर्यटन उद्योग को एक नई वैश्विक उड़ान मिलेगी। यदि आप भी इस छुट्टियों के सीजन में कुछ नया, प्राकृतिक और ऐतिहासिक देखने की योजना बना रहे हैं, तो अंडमान-निकोबार और छत्तीसगढ़ की इन विश्व धरोहरों की यात्रा करना आपकी बकेट लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।