Chhattisgarh : अफीम की तलाश में खेतों की खाक छानेंगे तहसीलदार और पटवारी, बिलासपुर कलेक्टर का सर्च ऑपरेशन शुरू
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में लगभग 8 करोड़ रुपये की अवैध अफीम की खेती पकड़े जाने के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना से सबक लेते हुए बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले के सभी तहसीलदारों, पटवारियों और पंचायत सचिवों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब ये अधिकारी दफ्तर छोड़कर सीधे खेतों में उतरेंगे और संदिग्ध फसलों की जांच करेंगे।
जांच का मास्टर प्लान: प्रशासन ने नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए एक विस्तृत योजना बनाई है:
गांव-गांव सर्वे: पटवारी और पंचायत सचिव प्रत्येक गांव के बाहरी इलाकों और ऐसे खेतों का दौरा करेंगे जहां तारबंदी (Fencing) की गई है या जहां आम लोगों का प्रवेश वर्जित है।
तहसीलदार की निगरानी: तहसीलदार रैंडम आधार पर खेतों की खाक छानेंगे और संदिग्ध पौधों की पहचान के लिए कृषि विशेषज्ञों की मदद लेंगे।
ड्रोन का उपयोग: दुर्ग में हुए खुलासे के बाद, बिलासपुर में भी दुर्गम इलाकों और बड़े फार्म हाउसों की निगरानी के लिए ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है।
दुर्ग मामले ने बढ़ाई चिंता: दुर्ग जिले के समोदा गांव में जिस तरह से पिछले 5 साल से अफीम की खेती हो रही थी और स्थानीय प्रशासन को भनक तक नहीं लगी, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में अवैध खेती पाई गई, तो संबंधित पटवारी और सचिव की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
जनता से अपील: प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि यदि उनके आसपास किसी भी खेत में संदिग्ध गोल फल वाले पौधे या कली वाले फूल दिखें, तो उसकी सूचना तत्काल कंट्रोल रूम या पुलिस को दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।