Chhattisgarh Naxalism : जब बंदूक और जंगल का रास्ता छोड़, 16 नक्सलियों ने चुना जिंदगी का नया सवेरा
News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जो शांति और उम्मीद की एक नई किरण जगाती है। यहां एक-दो नहीं, बल्कि 16 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता हमेशा के लिए छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। जिन हाथों ने कभी देश के खिलाफ बंदूकें उठाई थीं, आज उन्हीं हाथों ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं। यह नक्सलवाद की खोखली विचारधारा पर करारा तमाचा और सरकार की पुनर्वास नीति की एक बड़ी जीत है।
क्यों छोड़ा आतंक का रास्ता?
यह सवाल सबसे अहम है कि आखिर दशकों से जंगल और हिंसा की दुनिया में जी रहे इन लोगों ने अचानक आत्मसमर्पण क्यों किया? इसके पीछे की कहानी अंदर से टूटे हुए एक संगठन की सच्चाई बयां करती है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि वे संगठन के बड़े नेताओं के भेदभाव और शोषण से तंग आ चुके थे। उन्हें नक्सलियों की खोखली विचारधारा का सच समझ में आ गया था, जो सिर्फ आदिवासियों को बहला-फुसलाकर उनका इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा, पुलिस और सुरक्षाबलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे 'ऑपरेशन मानसून' ने भी जंगलों में उनकी कमर तोड़ दी थी। उन पर लगातार दबाव बढ़ रहा था और भागने के सारे रास्ते बंद हो रहे थे।
इन सबके बीच, सरकार की "पुनर्वास नीति" उनके लिए एक उम्मीद की किरण बनकर आई। इस नीति के तहत, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को समाज में एक सामान्य और सम्मानजनक जीवन जीने का मौका दिया जाता है, उन्हें आर्थिक सहायता दी जाती है और मुख्यधारा से जोड़ा जाता है। इसी भरोसे ने उन्हें हथियार डालने का हौसला दिया।
कौन हैं ये सरेंडर करने वाले नक्सली?
आत्मसमर्पण करने वालों में 13 पुरुष और 3 महिला नक्सली शामिल हैं। ये सभी नक्सली संगठन के अलग-अलग पदों पर काम कर रहे थे और कई बड़ी हिंसक वारदातों में शामिल रहे हैं। इनमें से कुछ पर सरकार ने इनाम भी घोषित कर रखा था। ये लोग हत्या, लूट, आगजनी और पुलिस पर हमला करने जैसे कई संगीन अपराधों में शामिल थे।
इनका आत्मसमर्पण करना नारायणपुर पुलिस और सुरक्षाबलों के लिए एक बहुत बड़ी सफलता है। यह इस बात का सबूत है कि सरकार का 'विश्वास-विकास-सुरक्षा' का मंत्र अब असर दिखा रहा है। यह घटना न सिर्फ नक्सली संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि जंगल में भटके हुए दूसरे युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर वापस लौटने के लिए प्रेरित करेगी।