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April 10 2026 05:36 pm

Chhattisgarh Liquor Scam: सौम्या चौरसिया और के.के. श्रीवास्तव को मिली जमानत, 500 से ज्यादा दिनों बाद जेल से बाहर आएंगी पावरफुल अधिकारी

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 2,000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले (Liquor Scam) और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप-सचिव रहीं सौम्या चौरसिया (Saumya Chaurasia) को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। उनके साथ ही आबकारी विभाग के पूर्व अधिकारी के.के. श्रीवास्तव को भी राहत मिली है। सौम्या चौरसिया पिछले करीब 16 महीनों (500 से अधिक दिनों) से रायपुर की केंद्रीय जेल में बंद थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने किन आधारों पर दी जमानत?

सौम्या चौरसिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने लंबी न्यायिक हिरासत और मामले की जांच की वर्तमान स्थिति को आधार बनाया।

लंबी कैद: अदालत ने माना कि आरोपी लंबे समय से जेल में है और मुकदमे (Trial) के जल्द पूरा होने की संभावना कम है।

शर्तों के साथ राहत: कोर्ट ने जमानत देते समय सख्त शर्तें भी लागू की हैं। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और जांच में पूरा सहयोग करना होगा। साथ ही, वे गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगी।

कौन हैं सौम्या चौरसिया?

सौम्या चौरसिया छत्तीसगढ़ कैडर की राज्य प्रशासनिक सेवा (SCS) की अधिकारी रही हैं। पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में सबसे शक्तिशाली अधिकारियों में गिना जाता था।

गिरफ्तारी: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 2 दिसंबर 2022 को कोयला लेवी और शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया था।

आरोप: ईडी का दावा है कि सौम्या चौरसिया भ्रष्टाचार के जरिए जुटाए गए अवैध धन के प्रबंधन और निवेश में मुख्य भूमिका निभा रही थीं।

के.के. श्रीवास्तव को भी मिली राहत

आबकारी विभाग के पूर्व ओएसडी (OSD) के.के. श्रीवास्तव को भी इसी मामले में जमानत मिल गई है। उन पर आरोप था कि उन्होंने सिंडिकेट के साथ मिलकर शराब की बोतलों पर फर्जी होलोग्राम लगाने और अवैध बिक्री को बढ़ावा देने में मदद की थी। इससे पहले कोर्ट ने इसी मामले में अनवर ढेबर और अन्य आरोपियों को भी जमानत दी थी।

भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक जुबानी जंग

इस जमानत के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है:

भाजपा का रुख: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि जमानत मिलना दोषमुक्ति नहीं है। जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं और भ्रष्टाचार के दोषियों को सजा मिलकर रहेगी।

कांग्रेस का रुख: कांग्रेस ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भाजपा सरकार राजनीतिक द्वेष के चलते अधिकारियों को प्रताड़ित कर रही थी।

ED की जांच पर क्या होगा असर?

भले ही मुख्य आरोपियों को जमानत मिल गई हो, लेकिन ईडी और एसीबी (ACB/EOW) की जांच अभी भी जारी है। हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस ने इस मामले में नई एफआईआर भी दर्ज की है। जानकारों का मानना है कि सौम्या चौरसिया के बाहर आने से मामले की कानूनी लड़ाई और दिलचस्प हो जाएगी, क्योंकि वे प्रशासन की कई आंतरिक कड़ियों की जानकार रही हैं।