Chhattisgarh case : पुलिस उसे चोरी के शक में उठाकर लाई थी, लेकिन थाने से लौटी उसकी लाश19 साल के श्रवण की कहानी

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News India Live, Digital Desk: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से एक ऐसी झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए उठाए गए सिर्फ 19 साल के एक लड़के की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है. इस घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और मृतक के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं.

मामले की गंभीरता को देखते हुए, प्रशासन ने तुरंत न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के आदेश दे दिए हैं.

क्या है पूरा मामला?

घटना रायगढ़ के जूटमिल पुलिस चौकी इलाके की है. मृतक का नाम श्रवण निषाद, उम्र 19 साल, बताया जा रहा है और वह कैलाश नगर का रहने वाला था. पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके की एक सरिया फैक्ट्री से सरिया (Iron Rods) चोरी हो गए हैं. इसी चोरी के शक में, जूटमिल पुलिस सोमवार की शाम श्रवण को उसके घर से पूछताछ के लिए उठाकर चौकी ले आई थी.

लेकिन, चौकी में कुछ ही घंटों बाद श्रवण की तबीयत अचानक बिगड़ गई.

पहले बोले- "चक्कर आ रहा है", फिर तोड़ दिया दम

पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान श्रवण ने सीने में दर्द और चक्कर आने की शिकायत की. उसे तुरंत पास के संजीवनी नर्सिंग होम ले जाया गया. हालत में सुधार न होने पर उसे वहां से मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

परिजनों का आरोप: पुलिस की पिटाई से हुई मौत

दूसरी तरफ, श्रवण के परिवार वालों ने पुलिस के इस बयान को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका सीधा और गंभीर आरोप है कि श्रवण की मौत सामान्य नहीं है, बल्कि पुलिस की पिटाई की वजह से उसकी जान गई है. उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत में उसके साथ बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई.

परिजनों ने मामले की उच्च-स्तरीय जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

अब न्यायिक जांच करेगी दूध का दूध, पानी का पानी

इस घटना के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, रायगढ़ के कलेक्टर ने तुरंत मजिस्ट्रियल जांच (न्यायिक जांच) के आदेश दिए हैं. अब इस जांच में ही यह साफ हो पाएगा कि श्रवण की मौत का असली कारण क्या था. क्या वाकई उसकी तबीयत खराब हुई थी, या फिर परिवार वालों के आरोपों में सच्चाई है.

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या पुलिस को हिरासत में पूछताछ के दौरान अपनी हदों को लांघने का अधिकार है? फिलहाल, सभी को न्यायिक जांच की रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि सच सामने आ सके और अगर कोई दोषी है तो उसे सजा मिल सके.