Chhath Puja 2025: नहाय-खाय के साथ शुरू होगा महापर्व, भूलकर भी न करें ये गलतियां
News India Live, Digital Desk: लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। यह पर्व सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि प्रकृति और सूर्य देव के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत की शुरुआत 'नहाय-खाय' की परंपरा से होती है। इस साल नहाय-खाय 26 अक्टूबर 2025, रविवार को है।
यह दिन व्रत की नींव रखता है, इसलिए इस दिन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं कि नहाय-खाय के दिन व्रतियों को किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
क्या है नहाय-खाय का महत्व?
'नहाय-खाय' का मतलब है 'स्नान करके भोजन करना'। इस दिन से ही व्रती और उनका पूरा परिवार सात्विकता के नियमों का पालन करना शुरू कर देता है। यह आत्म-शुद्धि और व्रत के लिए खुद को तैयार करने का पहला कदम है। इस दिन व्रती किसी पवित्र नदी, तालाब या घर पर ही गंगाजल डालकर स्नान करते हैं और सूर्य देव की उपासना के बाद ही कुछ ग्रहण करते हैं।
नहाय-खाय पर क्या करें? (Do's)
- पवित्र स्नान: दिन की शुरुआत किसी पवित्र नदी में स्नान के साथ करें। अगर यह संभव न हो तो घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
- साफ-सुथरे वस्त्र: स्नान के बाद साफ-सुथरे और धुले हुए वस्त्र ही पहनें। कई लोग इस दिन नए वस्त्र भी धारण करते हैं।
- सूर्य को अर्घ्य: स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना न भूलें।
- सात्विक भोजन: इस दिन का भोजन बहुत ही सात्विक और शुद्ध तरीके से बनाया जाता है। इसमें मुख्य रूप से अरवा चावल (कच्चा चावल), चने की दाल और कद्दू (लौकी) की सब्जी बनाई जाती है।
- भोजन बनाने के नियम: भोजन को पीतल या मिट्टी के बर्तन में बनाना शुभ माना जाता है। साथ ही, इसे आम की लकड़ी या चूल्हे पर बनाना सबसे उत्तम होता है।
- सेंधा नमक का प्रयोग: इस दिन भोजन में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है।
- पहले व्रती भोजन करें: घर में सबसे पहले व्रती भोजन करते हैं, उसके बाद ही परिवार के अन्य सदस्य उसी भोजन को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
नहाय-खाय पर क्या न करें? (Don'ts)
- तामसिक भोजन से दूरी: इस दिन से घर में लहसुन, प्याज या किसी भी तरह का तामसिक भोजन बनाना पूरी तरह से वर्जित होता है।
- झूठ और क्रोध से बचें: व्रती को इस दिन किसी से भी झूठ नहीं बोलना चाहिए और न ही किसी पर क्रोध करना चाहिए। मन को शांत और शुद्ध रखना बहुत जरूरी है।
- बिस्तर पर न सोएं: नहाय-खाय के दिन से ही व्रती को जमीन पर चटाई बिछाकर सोना चाहिए।
- अशुद्धता से बचें: घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें और किसी भी तरह की अशुद्धता से बचें।
नहाय-खाय का दिन छठ महापर्व की आत्मा है। इस दिन का अनुशासन और शुद्धता ही अगले तीन दिनों के कठिन व्रत के लिए व्रती को शक्ति प्रदान करती है।