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April 24 2026 01:04 pm

Char Dham Yatra 2026: चार धाम की यात्रा शुरू होने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, किस धाम में बसते हैं कौन से देवता?

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News India Live, Digital Desk:  देवभूमि उत्तराखंड में चार धाम यात्रा 2026 का बिगुल बज चुका है। लाखों श्रद्धालु बाबा केदार, बद्री विशाल, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शनों के लिए अपना पंजीकरण करा रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हिमालय की गोद में स्थित इन चार पवित्र धामों का धार्मिक महत्व क्या है और वहां किन देवताओं की पूजा की जाती है? शास्त्रों के अनुसार, इन धामों की यात्रा का एक विशेष क्रम है और हर धाम की अपनी एक पौराणिक गाथा है।

यात्रा का सही क्रम: यमुनोत्री से शुरू होकर बद्रीनाथ पर समापन

सनातन परंपरा के अनुसार, चार धाम की यात्रा हमेशा 'पश्चिम से पूर्व' की दिशा में की जाती है। यात्रा की शुरुआत सबसे पहले यमुनोत्री धाम से होती है, जिसके बाद गंगोत्री, फिर केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम के दर्शन किए जाते हैं। माना जाता है कि इसी क्रम में यात्रा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है और साधक के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।

1. यमुनोत्री धाम: सूर्यपुत्री यमुना का पावन वास

यात्रा का पहला पड़ाव यमुनोत्री है। यहाँ माता यमुना की पूजा की जाती है, जिन्हें सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन माना गया है। यमुनोत्री में भक्त 'सूर्य कुंड' के गर्म पानी में चावल पकाकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि यहाँ स्नान करने से मनुष्य को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है।

2. गंगोत्री धाम: जहाँ धरती पर अवतरित हुई थीं मां गंगा

दूसरा पड़ाव गंगोत्री धाम है, जो माता गंगा को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा इसी स्थान पर स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। यहाँ स्थित शिवलिंग के रूप में एक शिला है, जो जलमग्न रहती है और केवल सर्दियों में जल स्तर कम होने पर दिखाई देती है।

3. केदारनाथ धाम: ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग बाबा भोलेनाथ का दरबार

तीसरा और सबसे दुर्गम पड़ाव केदारनाथ है। यहाँ भगवान शिव के ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग की पूजा की जाती है। मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित यह धाम शिव भक्तों के लिए स्वर्ग के समान है। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को पाप मुक्ति के लिए भगवान शिव ने इसी स्थान पर बैल के पीठ वाले भाग (कूबड़) के रूप में दर्शन दिए थे।

4. बद्रीनाथ धाम: जगत के पालनहार भगवान विष्णु का निवास

यात्रा का अंतिम और सबसे प्रमुख पड़ाव बद्रीनाथ धाम है। इसे 'बैकुंठ' के समान माना गया है। यहाँ भगवान विष्णु के 'बद्री विशाल' रूप की पूजा की जाती है। भगवान यहाँ ध्यान मुद्रा में विराजमान हैं। कहा जाता है कि माता लक्ष्मी ने उन्हें धूप और बारिश से बचाने के लिए 'बदरी' (बेर) के पेड़ का रूप धारण किया था, इसलिए इस स्थान का नाम बद्रीनाथ पड़ा।