Chanakya Niti: जिस घर की स्त्री में हैं ये 5 गुण, वहां खुद चलकर आती हैं लक्ष्मी, जानिए क्या आपमें हैं ये खूबियां
जब भी समझदारी और कूटनीति की बात आती है, आचार्य चाणक्य का नाम सबसे ऊपर आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि चाणक्य सिर्फ एक महान राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि उन्हें इंसानी स्वभाव और रिश्तों की बहुत गहरी और बारीक समझ थी। उन्होंने जिंदगी को लेकर ऐसी कई बातें कही हैं जो सदियों पहले भी सच थीं और आज के कलयुग में भी उतनी ही सटीक बैठती हैं।
आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में खास तौर पर महिलाओं के कुछ ऐसे गुणों का जिक्र किया है, जो अगर किसी स्त्री में हों, तो वह न सिर्फ अपने पति बल्कि पूरे कुल की किस्मत बदल सकती है। उनका मानना था कि एक समझदार और गुणी महिला ईंट-पत्थर के मकान को खुशहाल 'घर' बना देती है।
चलिए, आज बिल्कुल सरल भाषा में जानते हैं उन 5 गुणों के बारे में, जो चाणक्य के अनुसार एक आदर्श महिला की पहचान हैं।
1. मुश्किल में जो न खोए आपा (धैर्य और संयम)
जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं चलती, कभी खुशी तो कभी गम आते रहते हैं। चाणक्य कहते हैं कि जिस महिला के अंदर 'धैर्य' यानी सब्र होता है, वो पूरे परिवार की सबसे बड़ी ढाल होती है। चाहे आर्थिक तंगी हो या पारिवारिक झगड़े, जो महिला हड़बड़ी मचाने के बजाय शांति और संयम से काम लेती है, वह बड़े से बड़े संकट को टाल सकती है। उसका शांत स्वभाव घर के बाकी सदस्यों को भी टूटने से बचा लेता है।
2. जिसकी जुबान और दिमाग में हो संतुलन (समझदारी)
चाणक्य नीति कहती है कि एक घर की असली ड्राइवर वहां की स्त्री होती है। अगर महिला बुद्धिमान है, तो वह जानती है कि किस बात को कहां कहना है और कहां चुप रहना है। बोलने से ज्यादा, 'सही समय पर बोलने' की कला जिस महिला को आती है, उसके घर में कभी क्लेश नहीं होता। ऐसी समझदार महिलाएं भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि सोच-समझकर फैसला लेती हैं, जिससे पूरे परिवार का भला होता है।
3. जिसके दिल में हो प्यार और अपनापन (ममता)
एक औरत की सबसे बड़ी शक्ति उसका 'प्यार' है। चाणक्य मानते थे कि एक स्नेही महिला गोंद की तरह होती है जो पूरे परिवार को जोड़कर रखती है। उसका स्वभाव रूखा नहीं, बल्कि दयालु और ममतामयी होना चाहिए। जिस घर में महिला के अंदर कड़वाहट नहीं बल्कि प्यार होता है, वहां लड़ाई-झगड़े टिक ही नहीं पाते। ऐसी माएं अपने बच्चों को भी अच्छे संस्कार देती हैं और घर में हमेशा पॉजिटिव एनर्जी बनी रहती है।
4. झूठ से जिसका न हो नाता (ईमानदारी)
रिश्ता कोई भी हो, उसकी नींव 'भरोसे' पर टिकी होती है। चाणक्य कहते हैं कि जो महिला अपने रिश्तों में ईमानदार होती है, वो परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। छल-कपट या झूठ का सहारा लेने के बजाय, जो सच का साथ देती है, उस पर पूरा परिवार आँख मूंदकर विश्वास करता है। यह ईमानदारी पति-पत्नी के रिश्ते को तो मजबूत बनाती ही है, साथ ही परिवार का मान-सम्मान भी बढ़ाती है।
5. अपनी जड़ों से जुडी रहने वाली (संस्कार और सम्मान)
आज के दौर में मॉडर्न होना गलत नहीं है, लेकिन चाणक्य के अनुसार जो महिला अपनी संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों का सम्मान करना नहीं भूलती, वो घर में सुख-समृद्धि लेकर आती है। बड़ों का आदर करना और परिवार की परम्पराओं को साथ लेकर चलना-ये गुण जिस महिला में होते हैं, उसकी आने वाली पीढ़ी अपने आप संस्कारी हो जाती है। ऐसी महिलाएं समाज में अपने परिवार का नाम ऊंचा करती हैं।
निष्कर्ष:
चाणक्य की ये बातें सिर्फ किताबें ज्ञान नहीं हैं। अगर आप अपने आसपास देखेंगे, तो पाएंगे कि जिन घरों में महिलाओं को सम्मान मिलता है और जिनमें ये गुण होते हैं, वहां सच में खुशहाली बसती है।