CBSE School Recognition 2026: सीबीएसई स्कूल खोलना हुआ आसान! जमीन के नियमों में मिली बड़ी छूट, जानें अब कितने कम स्पेस में शुरू कर सकेंगे 12वीं तक का स्कूल
एजुकेशन डेस्क, नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूल मान्यता (Affiliation) की प्रक्रिया में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव किया है। अब महानगरों की भीड़भाड़ वाली गलियों से लेकर पहाड़ों की ऊंचाइयों तक, कम जमीन पर भी सीनियर सेकेंडरी स्कूल खोलना मुमकिन होगा। बोर्ड ने हाल ही में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में जमीन से जुड़े पुराने और जटिल नियमों को हटाकर एक नई सरल तालिका पेश की है। साल 2026 में लागू हुए ये नए नियम उन शिक्षा उद्यमियों (Education Entrepreneurs) के लिए संजीवनी साबित होंगे, जो जमीन की कमी के कारण स्कूल शुरू नहीं कर पा रहे थे।
कैटेगरी के हिसाब से जमीन की नई जरूरत (तालिका)
सीबीएसई ने पूरे देश को तीन श्रेणियों—A, B और C में बांटा है। इससे हर इलाके की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से नियमों में लचीलापन आया है:
| श्रेणी (Category) | क्षेत्र (Area) | 10वीं तक (Secondary) | 12वीं तक (Sr. Secondary) |
|---|---|---|---|
| श्रेणी A | सामान्य इलाके (जहां जमीन प्रचुर है) | 4000 वर्ग मीटर | 6000 वर्ग मीटर |
| श्रेणी B | राज्य की राजधानियां, Y कैटेगरी शहर (जैसे जयपुर, लखनऊ), और पहाड़ी क्षेत्र | 2400 वर्ग मीटर | 3200 वर्ग मीटर |
| श्रेणी C | मेट्रो शहर (दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता) और दूरस्थ क्षेत्र (सिक्किम, अंडमान) | 1600 वर्ग मीटर | 2400 वर्ग मीटर |
खेल का मैदान: जगह कम है पर विकास पर कोई समझौता नहीं
बोर्ड ने साफ किया है कि भले ही स्कूल के निर्माण के लिए जमीन कम दी गई हो, लेकिन बच्चों के शारीरिक विकास के लिए खेल का मैदान (Playground) अनिवार्य है।
अनिवार्यता: हर स्कूल कैंपस के अंदर कम से कम 2000 वर्ग मीटर का खेल का मैदान होना चाहिए।
विकल्प: यदि कैंपस के अंदर जगह कम है, तो स्कूल प्रबंधन किसी नजदीकी सरकारी पार्क, स्टेडियम या अन्य स्कूल के मैदान के साथ 15 साल का लिखित समझौता कर सकता है।
शर्त: वह बाहरी मैदान स्कूल से 200 मीटर से ज्यादा दूर नहीं होना चाहिए और बच्चों के वहां जाने के रास्ते में कोई बड़ा नेशनल हाईवे या खतरनाक सड़क नहीं होनी चाहिए।
मौजूदा स्कूलों और नए निवेशकों के लिए क्या है खास?
पुराने स्कूल सुरक्षित: जो सीबीएसई स्कूल पहले से चल रहे हैं, उन पर ये नए नियम लागू नहीं होंगे। उन्हें अपनी पुरानी शर्तों का ही पालन करना होगा।
शिक्षा का विस्तार: बोर्ड के सचिव हिमांशु गुप्ता द्वारा जारी इस अधिसूचना का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में शिक्षा पहुँचाना है जहाँ जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। इससे दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में गुणवत्तापूर्ण स्कूलों का विस्तार तेज होगा।
निवेश को बढ़ावा: अब छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों में भी उद्यमी कम निवेश और कम जमीन के साथ विश्वस्तरीय सीबीएसई स्कूल खोल सकेंगे।
निष्कर्ष: सीबीएसई का यह कदम शिक्षा को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। जमीन के नियमों में यह छूट न केवल स्कूलों की संख्या बढ़ाएगी, बल्कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जोड़ने में मदद करेगी।