CBSE New Rules : अब एडिशनल सब्जेक्' के भरोसे पास होना हुआ मुश्किल, 10वीं और 12वीं के नियमों में हुआ क्रांतिकारी बदलाव
News India Live, Digital Desk: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सत्र 2025-26 से परीक्षा नियमों में एक ऐसा बदलाव किया है, जिसका सीधा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो मुख्य विषयों में कमजोर होने पर 'एडिशनल सब्जेक्ट' (6th या 7th विषय) के सहारे पास होने की उम्मीद रखते थे। बोर्ड ने अब 6वें या 7वें अतिरिक्त विषय के आधार पर पास घोषित करने की नीति को समाप्त करने का निर्णय लिया है।
क्या था पुराना नियम और अब क्या बदला?
पुराना नियम (Best of 5): अब तक यदि कोई छात्र मुख्य 5 विषयों में से किसी एक (जैसे गणित या विज्ञान) में फेल हो जाता था, लेकिन उसने छठा विषय (जैसे स्किल सब्जेक्ट या फिजिकल एजुकेशन) लिया होता था, तो एडिशनल सब्जेक्ट के नंबर मुख्य विषय की जगह ले लेते थे और छात्र को 'पास' घोषित कर दिया जाता था।
नया नियम: अब छात्र को मुख्य विषयों (Core Subjects) में अनिवार्य रूप से पास होना होगा। एडिशनल सब्जेक्ट केवल आपकी ओवरऑल परसेंटेज (प्रतिशत) सुधारने के काम आएगा, लेकिन यह आपको 'फेल' से 'पास' की श्रेणी में नहीं ला पाएगा।
बोर्ड ने क्यों लिया यह कड़ा फैसला?
मुख्य विषयों की महत्ता: बोर्ड का मानना है कि छात्र गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे मुख्य विषयों को नजरअंदाज कर रहे थे और केवल एडिशनल सब्जेक्ट के दम पर अगली कक्षा में पहुंच रहे थे।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्र अपनी पसंद के मुख्य विषयों में बुनियादी योग्यता हासिल करें।
उच्च शिक्षा में आने वाली बाधा: कई बार छात्र एडिशनल सब्जेक्ट के आधार पर स्कूल तो पास कर लेते थे, लेकिन कॉलेज एडमिशन या प्रतियोगी परीक्षाओं में उन्हें मुख्य विषयों में फेल होने के कारण रिजेक्शन का सामना करना पड़ता था।
छात्रों और अभिभावकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
अनिवार्य पासिंग मार्क्स: अब छात्रों को अपने मुख्य 5 विषयों (भाषा और कोर सब्जेक्ट्स) में अलग-अलग न्यूनतम 33% अंक लाने होंगे।
स्किल सब्जेक्ट का रोल: स्किल सब्जेक्ट्स अभी भी महत्वपूर्ण रहेंगे, लेकिन वे केवल 'सप्लीमेंट्री' (पूरक) के तौर पर काम करेंगे।
तैयारी की रणनीति: अब छात्रों को अपने कमजोर विषयों पर अधिक ध्यान देना होगा, क्योंकि अब "बैकअप सब्जेक्ट" का सुरक्षा कवच फेल होने की स्थिति में काम नहीं आएगा।
कब से लागू होगा यह नियम?
CBSE के सर्कुलर के अनुसार, यह बदलाव मौजूदा शैक्षणिक सत्र से ही प्रभावी माना जा रहा है, जिसका सीधा असर 2026 की बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों पर दिखेगा।