Windfall Gains Tax: केंद्र सरकार ने फ्यूल एक्सपोर्ट पर घटाया विंडफॉल टैक्स, पेट्रोल पर दर हुई शून्य; रिलायंस-नायरा जैसी रिफाइनर्स को बड़ी राहत
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने फ्यूल एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल गेन्स टैक्स (Windfall Gains Tax) की दरों में बड़ी कटौती करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। वित्त मंत्रालय और अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के तहत पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) यानी विंडफॉल टैक्स को घटाकर पूरी तरह शून्य (Nil) कर दिया गया है। इसके साथ ही डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल यानी विमान ईंधन (ATF) के विदेशी निर्यात पर लागू टैक्स दरों में भी उल्लेखनीय कमी की गई है। सरकार का यह फैसला शनिवार से प्रभावी हो गया है, जिससे देश की प्रमुख तेल रिफाइनिंग और निर्यातक कंपनियों को विदेशी बाजारों में अपने मार्जिन को मजबूत करने का सीधा अवसर मिलेगा।
पेट्रोल, डीजल और एटीएफ की नई टैक्स दरें क्या हैं?
सरकारी आदेश के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर पहले लागू 3.5 रुपये प्रति लीटर की दर को घटाकर अब शून्य रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को 25.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। वहीं एयरलाइंस में इस्तेमाल होने वाले जेट फ्यूल यानी एटीएफ के निर्यात पर लागू लेवी को 22 रुपये प्रति लीटर से कम करके 19.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले पखवाड़े के दौरान क्रैक स्प्रेड्स और रिफाइनिंग मार्जिन में आए बदलावों का बारीक विश्लेषण करने के बाद यह पाक्षिक समीक्षा (Fortnightly Revision) लागू की गई है।
क्या होता है विंडफॉल गेन्स टैक्स और इसे क्यों लगाया जाता है?
विंडफॉल गेन्स टैक्स मूल रूप से उन कंपनियों पर लगाया जाने वाला विशेष कर है जो किसी अप्रत्याशित वैश्विक परिस्थिति, भू-राजनीतिक तनाव या वैश्विक बाजार में अचानक आई उछाल के कारण असामान्य या अप्रत्याशित मुनाफा (Supernormal Profits) कमाती हैं। भारत ने सबसे पहले जुलाई 2022 में रूस-यूक्रेन संकट के समय कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने पर यह कर लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि घरेलू रिफाइनरी कंपनियां केवल विदेशी बाजारों में ऊंचे प्रीमियम पर ईंधन बेचकर भारी मुनाफा न कमाएं, बल्कि देश के भीतर भी पेट्रोल-डीजल की पर्याप्त आपूर्ति बनी रहे। सरकार हर 14 दिनों में अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क और वैश्विक मार्जिन के औसत के आधार पर इन दरों की समीक्षा करती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी जैसी रिफाइनर्स पर बड़ा असर
पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स शून्य होने और डीजल-एटीएफ पर टैक्स में कटौती का सबसे सीधा और सकारात्मक प्रभाव देश की बड़ी प्राइवेट रिफाइनिंग कंपनियों पर पड़ेगा। गुजरात के जामनगर में विश्व की सबसे बड़ी रिफाइनरी संचालित करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और वाडिनार रिफाइनरी चलाने वाली नायरा एनर्जी (Nayara Energy) मुख्य रूप से यूरोप, अमेरिका और एशियाई देशों को परिष्कृत ईंधन निर्यात करती हैं। टैक्स में कटौती होने से इन कंपनियों का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) सुधरेगा और अंतरराष्ट्रीय कार्गो सौदों पर उनकी शुद्ध प्राप्ति में इजाफा होगा। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल उत्पादक कंपनियों जैसे ओएनजीसी (ONGC) और ऑयल इंडिया (Oil India) के लिए भी स्थिर और पारदर्शी टैक्स नीति से कारोबारी विश्वास मजबूत होता है।
क्या आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटेंगी?
इस टैक्स कटौती को लेकर आम उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या इससे घरेलू पेट्रोल पंपों पर ईंधन सस्ता होगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यह टैक्स कटौती केवल विदेशी बाजारों में भेजे जाने वाले फ्यूल एक्सपोर्ट पर लागू होती है, न कि घरेलू खुदरा बिक्री पर। भारत के घरेलू खुदरा बाजार में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम राज्य स्तरीय वैट (VAT), केंद्रीय उत्पाद शुल्क और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के बेस प्राइस पर निर्भर करते हैं। हालांकि, रिफाइनर्स के मार्जिन में सुधार और अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों के स्थिर रहने से घरेलू स्तर पर कीमतों में किसी संभावित बढ़ोतरी का दबाव काफी हद तक कम हो जाता है, जिससे निकट भविष्य में मूल्य स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है।