Dengue Platelets Drop: डेंगू में प्लेटलेट्स गिरने लगें तो क्या करें और किन गलतियों से बचें? जानिए डॉक्टर्स की 5 अहम सलाह

Dengue Platelets Drop: डेंगू में प्लेटलेट्स गिरने लगें तो क्या करें और किन गलतियों से बचें? जानिए डॉक्टर्स की 5 अहम सलाह

बरसात और बदलते मौसम के साथ डेंगू बुखार के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिलता है। एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला यह वायरल संक्रमण मरीज के खून में मौजूद प्लेटलेट्स (Platelets) को तेजी से प्रभावित करता है। डेंगू में अक्सर देखा जाता है कि बुखार उतरने के बाद या तीसरे-चौथे दिन से प्लेटलेट काउंट अचानक नीचे गिरने लगता है, जिससे मरीज और तीमारदार घबरा जाते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि प्लेटलेट्स में हल्की या मध्यम गिरावट आम बात है, लेकिन सही समय पर उचित देखभाल और सही खानपान से शरीर को गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है।

हाइड्रेशन को बनाएं पहली प्राथमिकता: तरल पदार्थों का भरपूर सेवन

डेंगू के दौरान प्लेटलेट्स गिरने और खून के गाढ़े होने का सबसे मुख्य कारण 'प्लाज्मा लीकेज' और डिहाइड्रेशन होता है। इसलिए शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना सबसे अहम है।

  • ओआरएस और नारियल पानी: मरीज को दिनभर में सादे पानी के अलावा ओआरएस (ORS), नारियल पानी, नींबू पानी और पतली छाछ का नियमित सेवन कराएं।

  • सूप और दाल का पानी: सब्जियों का सूप और मूंग दाल का पानी शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है।

प्लेटलेट्स बढ़ाने वाले पोषक आहार शामिल करें

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और प्लेटलेट्स उत्पादन को सक्रिय करने के लिए विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट्स और फोलेट से भरपूर आहार लें।

  • पपीते के पत्ते और गिलोय: डॉक्टर की सलाह से पपीते के पत्तों का ताजा रस या गिलोय का काढ़ा सीमित मात्रा में लिया जा सकता है, जो इम्युनिटी बूस्ट करने में मदद करता है।

  • कीवी और अनार: कीवी, अनार, संतरा और अमरूद जैसे ताजे फल रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स के स्तर को स्थिर रखने में सहायक होते हैं।

दर्द निवारक दवाइयों के गलत चयन से बचें (क्या बिल्कुल न करें)

डेंगू में बिना डॉक्टरी सलाह के कोई भी ओवर-द-काउंटर (OTC) पेनकिलर लेना जानलेवा साबित हो सकता है।

  • एस्पिरिन और ब्रूफेन से परहेज: इबुप्रोफेन (Ibuprofen), एस्पिरिन (Aspirin) या डिक्लोफेनाक जैसी दर्द निवारक दवाएं कभी न लें। ये दवाएं ब्लड थिनर (खून पतला करने वाली) होती हैं, जिससे शरीर के अंदर इंटरनल ब्लीडिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

  • केवल पैरासिटामोल: तेज बुखार या बदन दर्द के लिए चिकित्सक द्वारा सुझाई गई खुराक में केवल पैरासिटामोल का ही सेवन करें।

पूर्ण आराम और भारी गतिविधियों से दूरी

प्लेटलेट्स कम होने पर शरीर की छोटी रक्त वाहिकाएं कमजोर हो जाती हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार का भारी शारीरिक श्रम, जिम, दौड़-भाग या वजन उठाने वाले काम बिल्कुल न करें। जरा सी चोट या खरोंच से भी अधिक रक्तस्राव हो सकता है। मरीज को ज्यादा से ज्यादा बेड रेस्ट करने की सलाह दी जाती है ताकि शरीर की ऊर्जा रिकवरी में लग सके।

खतरे के संकेतों (Warning Signs) पर तुरंत अस्पताल पहुंचें

हर स्थिति में प्लेटलेट्स चढ़ाने (Platelet Transfusion) की जरूरत नहीं होती। जब तक प्लेटलेट काउंट 10,000 से 20,000 से नीचे न जाए या एक्टिव ब्लीडिंग न हो, तब तक घबराने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, यदि मरीज को लगातार उल्टी, पेट में तेज असहनीय दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, शौच का रंग काला होना या अत्यधिक सुस्ती जैसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए।

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