4-5 महीनों में शेयर बाजार में लौटेगी तूफानी तेजी! 26,500 तक जाएगा निफ्टी; US बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में गिरावट बनेगी बड़ा ट्रिगर

4-5 महीनों में शेयर बाजार में लौटेगी तूफानी तेजी! 26,500 तक जाएगा निफ्टी; US बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में गिरावट बनेगी बड़ा ट्रिगर

हालिया हफ्तों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और खुदरा महंगाई के दबाव से जूझ रहे भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत भरी और बेहद सकारात्मक रिपोर्ट सामने आई है। वित्तीय शोध एवं ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल (Monarch Networth Capital - MNCL) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) गौरव भंडारी के अनुसार, अगले 4 से 5 महीनों के भीतर घरेलू शेयर बाजार में एक मजबूत री-बाउंड देखने को मिलेगा। इस नई तेजी के दम पर बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 50 (Nifty 50) वर्तमान स्तरों से करीब 16 से 18 प्रतिशत की छलांग लगाकर 26,000 से 26,500 के नए ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच सकता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्याज दरों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की दिशा में संभावित यू-टर्न भारतीय बाजारों के लिए लिक्विडिटी का नया दरवाजा खोलने जा रहा है।

पहला बड़ा ट्रिगर: अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का अपने चरम से नीचे आना

वैश्विक बाजारों में हालिया बिकवाली की सबसे बड़ी जड़ अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आया अप्रत्याशित उछाल रही है। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.35 प्रतिशत के पार पहुंच गई, जो पिछले 24 वर्षों का उच्चतम स्तर है। जब सुरक्षित अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में 5% से अधिक का रिटर्न मिलने लगता है, तो विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में लगाने लगते हैं।

हालांकि, जानकारों का स्पष्ट मानना है कि 5.35% की यील्ड कोई 'न्यू नॉर्मल' नहीं है, बल्कि यह चरम स्तर (Peak) है जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था को अंदर से नुकसान पहुंचा रहा है। अमेरिका का कुल सार्वजनिक कर्ज $35 ट्रिलियन को पार कर चुका है और उस पर सालाना ब्याज का खर्च $1.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया है, जिसे अमेरिकी सरकार लंबे समय तक वहन नहीं कर सकती। अमेरिका में 30-वर्षीय मॉर्गेज दर 7.03% के पार पहुंचने से वहां का रियल एस्टेट और उपभोक्ता मांग सुस्त पड़ रही है। ऐसे में अमेरिकी फेडरल रिजर्व और ट्रेजरी विभाग पर ब्याज दरों और यील्ड को नीचे लाने का भारी दबाव है। जैसे ही यील्ड में नरमी आएगी, वैश्विक लिक्विडिटी तुरंत रिस्क-ऑन मोड में आएगी और भारत जैसे मजबूत अर्थव्यवस्था वाले देशों में विदेशी पूंजी का प्रवाह तेजी से लौटेगा।

दूसरा बड़ा ट्रिगर: यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) में कमजोरी और 95 का स्तर

शेयर बाजार में तेजी का दूसरा मुख्य आधार अमेरिकी डॉलर में आने वाली संभावित कमजोरी है। अमेरिका के भारी-भरकम राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और लगातार बढ़ते व्यापार घाटे (Trade Deficit) के कारण डॉलर का वैश्विक दबदबा दबाव में आ रहा है।

डॉलर इंडेक्स (DXY) पहले ही 100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे आ चुका है और इसके आगे फिसलकर 95 के स्तर तक जाने की संभावना जताई जा रही है। जब भी डॉलर इंडेक्स कमजोर होता है, तो वैश्विक फंड मैनेजर अपने पोर्टफोलियो का री-एलोकेशन करते हैं और डॉलर आधारित संपत्तियों से पैसा निकालकर उभरते बाजारों की इक्विटीज में डाइवर्सिफाई करते हैं। डॉलर के कमजोर होने से भारतीय रुपया मजबूत होगा, जिससे कच्चे तेल का आयात सस्ता होगा, चालू खाता घाटा (CAD) घटेगा और कंपनियों के इनपुट मार्जिन में सुधार आएगा। यह परिस्थितियां सीधे तौर पर दलाल स्ट्रीट पर विदेशी पूंजी के नए चक्र को जन्म देंगी।

तीसरा बड़ा ट्रिगर: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की शॉर्ट कवरिंग और नई खरीदारी

अक्टूबर और सितंबर के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में आक्रामक बिकवाली की थी, जिसमें केवल छह कारोबारी सत्रों में ₹45,000 करोड़ से अधिक की निकासी देखी गई थी। लेकिन बाजार को सहारा दिया देश के घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा निवेशकों की मासिक एसआईपी (SIP) ने, जिन्होंने विदेशी बिकवाली को पूरी तरह सोख लिया।

विदेशी निवेशक वर्तमान में भारतीय डेरिवेटिव्स और कैश मार्केट में बेहद 'लाइट' (कम एक्सपोजर) और शॉर्ट पोजिशंस पर बैठे हैं। जैसे ही वैश्विक बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स से राहत के संकेत स्पष्ट होंगे, एफआईआई को मजबूरन अपनी शॉर्ट पोजिशंस काटनी पड़ेंगी (Short Covering)। घरेलू म्यूचुअल फंड्स की निरंतर खरीदारी और विदेशी निवेशकों की वापसी का यह 'डबल इंजन' निफ्टी को मौजूदा 22,500-22,700 के दायरे से सीधे 26,000 और फिर 26,500 के स्तर पर धकेलने के लिए पर्याप्त बारूद उपलब्ध कराएगा।

वैल्यूएशन री-रेटिंग: 18x से बढ़कर 22-24x तक जा सकता है निफ्टी का पीई

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, हालिया करेक्शन ने कई दिग्गज लार्ज-कैप शेयरों के मूल्यांकन को बेहद आकर्षक बना दिया है। वर्तमान में निफ्टी का वन-ईयर फॉरवर्ड पीई (P/E Ratio) करीब 18 से 19 गुना के उचित दायरे में आ चुका है। भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7 प्रतिशत के आसपास मजबूत बनी हुई है और आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट अर्निंग्स (प्रति शेयर आय - EPS) में दोहरे अंकों की वृद्धि का अनुमान है। जब अर्निंग्स ग्रोथ और लिक्विडिटी का संगम होता है, तो बाजार में 'मल्टीपल री-रेटिंग' शुरू होती है। यह री-रेटिंग निफ्टी के वैल्यूएशन को 18 गुना से बढ़ाकर 22 से 24 गुना के हिस्टोरिकल पीक की ओर ले जा सकती है, जिससे इंडेक्स के स्तर में सीधी बढ़ोतरी दर्ज होगी।

किन सेक्टर्स और स्टॉक्स में देखने को मिल सकता है सबसे तगड़ा आउटपरफॉर्मेंस

आगामी 4-5 महीनों की इस संभावित रैली में केवल पूरा बाजार ही नहीं दौड़ेगा, बल्कि चुनिंदा सेक्टर्स निवेशकों को सबसे बड़ा मुनाफा बनाकर दे सकते हैं:

  1. बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज: ब्याज दरों के पीक आउट होने और क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रहने से एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई जैसे दिग्गज बैंक इस रैली का नेतृत्व करेंगे।

  2. कैपिटल गुड्स, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर: सरकारी पूंजीगत व्यय (Capex) और निजी निवेश में तेजी से एलएंडटी, बीएचईएल और डिफेंस पीएसयू स्टॉक्स में तेज मोमेंटम बना रहेगा।

  3. एनर्जी, पावर और रिन्यूएबल्स: बिजली की निरंतर बढ़ती मांग और ग्रीन एनर्जी विस्तार के चलते एनटीपीसी और पावर ग्रिड जैसी कंपनियां मजबूत कैश फ्लो जनरेट कर रही हैं।

  4. ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी: ग्रामीण मांग में सुधार और त्योहारी व शादी-ब्याह के सीजन की मजबूत बिक्री से ऑटो और रिटेल सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा।

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह: डिफेंसिव होने के बजाय चुनिंदा खरीदारी का समय

शेयर बाजार के जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार मंदी का रोना रोने या डरकर शेयर बेचने का नहीं, बल्कि अगले बुल-रन की तैयारी करने का है। जब भी बाजार में कोई वैश्विक अनिश्चितता या अल्पकालिक गिरावट आती है, वही समय मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों को सस्ते भाव पर अपने पोर्टफोलियो में जोड़ने का स्वर्णिम अवसर होता है। निवेशकों को किसी एक पेनी स्टॉक में सट्टा लगाने के बजाय लार्ज-कैप और डायवर्सिफाइड फ्लेक्सी-कैप म्यूचुअल फंड्स में अपनी नियमित एसआईपी जारी रखनी चाहिए। अगले 4 से 5 महीनों में जैसे-जैसे मैक्रो-इकोनॉमिक स्थितियां अनुकूल होंगी, धैर्यवान निवेशकों को 26,500 के नए निफ्टी शिखर के साथ शानदार वेल्थ क्रिएशन का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।