बैंक कर्मचारियों का बड़ा ऐलान: 5 डे वर्किंग और बोनस विवाद पर नहीं बनी बात, 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल तय; लगातार 4 दिन ठप रह सकता है शाखाओं में कामकाज, जानिए हड़ताल का पूरा कैलेंडर

बैंक कर्मचारियों का बड़ा ऐलान: 5 डे वर्किंग और बोनस विवाद पर नहीं बनी बात, 11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल तय; लगातार 4 दिन ठप रह सकता है शाखाओं में कामकाज, जानिए हड़ताल का पूरा कैलेंडर

देश भर के करोड़ों बैंक ग्राहकों और कारोबारी जगत के लिए सितंबर का महीना भारी असुविधाओं भरा साबित हो सकता है। बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के सबसे बड़े शीर्ष संगठन 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' (UFBU) ने केंद्र सरकार और प्रबंधन के रुख के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। हफ्ते में पांच दिन काम (5-Day Work Week) की बहुप्रतीक्षित व्यवस्था को लागू करने में हो रही देरी, सरकार की नई परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) नीति में भारी विसंगतियों और पुरानी पेंशन बहाली जैसे लंबित मुद्दों को लेकर सहमति न बन पाने के बाद यूनियनों ने 11 सितंबर 2026 को एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का औपचारिक ऐलान कर दिया है। इस हड़ताल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB), कुछ निजी व विदेशी बैंकों और सहकारी बैंकों के करीब आठ लाख से अधिक अधिकारी व कर्मचारी शामिल होने जा रहे हैं। यूनियनों का स्पष्ट कहना है कि वर्षों से शांतिपूर्ण बातचीत और समझौतों के बावजूद वित्त मंत्रालय स्तर पर फाइलों को दबाकर रखा गया है, जिसके चलते उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

लगातार 4 दिन बंद रह सकते हैं बैंक: वीकेंड और गणेश चतुर्थी से गहराएगा संकट

11 सितंबर को होने वाली इस हड़ताल का समय ऐसा है कि आम जनता को बैंक शाखाओं में लगातार चार दिनों तक ताला लटकने का सामना करना पड़ सकता है। कैलेंडर के अनुसार 11 सितंबर को शुक्रवार का दिन है, जिस दिन हड़ताल के कारण शाखाओं में दैनिक कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा। इसके अगले दिन यानी 12 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार होने के कारण रिज़र्व बैंक के नियमों के तहत पूरे देश के बैंक आधिकारिक रूप से बंद रहेंगे। वहीं 13 सितंबर को रविवार का साप्ताहिक अवकाश रहेगा। इसके तुरंत बाद 14 सितंबर को महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु समेत कई प्रमुख राज्यों में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व होने के कारण स्थानीय अवकाश रहेगा। इस तरह देश के बड़े हिस्से में शुक्रवार से लेकर सोमवार तक लगातार चार दिनों तक बैंकों के गेट बंद रहेंगे। इससे चेक क्लीयरेंस, बड़े ड्राफ्ट बनवाने, नकदी जमा और निकासी, सरकारी चालान भरने और कारोबारी लेन-देन पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है।

क्या है 5-डे बैंकिंग का पूरा विवाद? कर्मचारियों ने दिया था 40 मिनट अतिरिक्त काम का विकल्प

बैंक कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग देश भर के बैंकों में फाइव-डे वर्किंग वीक लागू करने की है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में हुए समझौते के तहत बैंकों में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश देने की शुरुआत की गई थी, जबकि पहले और तीसरे शनिवार को पूरे दिन काम करने का नियम बना था। इसके बाद से ही सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की मांग उठती रही। 8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और बैंक यूनियनों के बीच हुए 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते (12th Bipartite Settlement) में इस मांग को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी।

इस समझौते के तहत बैंक कर्मचारियों ने यह लिखित वचन दिया था कि वे ग्राहकों की सुविधा को कम नहीं होने देंगे और शनिवार की छुट्टी के बदले सोमवार से शुक्रवार तक रोजाना 40 मिनट अतिरिक्त काम करेंगे। आईबीए ने इस प्रस्ताव को केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) को आवश्यक संशोधन के लिए भेजा था। हालांकि, दो साल से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस अधिसूचना पर अपनी अंतिम मुहर नहीं लगाई है। यूनियन नेताओं का तर्क है कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC), जीआईसी और नाबार्ड जैसी शीर्ष वित्तीय संस्थाओं के साथ-साथ केंद्र सरकार के अधिकांश विभागों में पहले से ही 5-दिवसीय कार्य सप्ताह सफलतापूर्वक लागू है, तो फिर वाणिज्यिक बैंकों के कर्मचारियों के साथ यह दोहरा रवैया क्यों अपनाया जा रहा है।

नई पीएलआई (PLI) स्कीम पर तकरार: 5 फीसदी अफसरों को भारी फायदा, 95 फीसदी कर्मचारियों से भेदभाव का आरोप

इस ताजा हड़ताल का दूसरा सबसे विस्फोटक मुद्दा केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही संशोधित परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम है। नवंबर 2020 के द्विपक्षीय समझौते के अनुसार बैंकों में पीएलआई बैंक के समग्र प्रदर्शन और वार्षिक शुद्ध मुनाफे के आधार पर तय होती थी, जो सफाईकर्मी से लेकर जनरल मैनेजर तक सभी कर्मचारियों को एक समान यानी अधिकतम 15 दिनों के मूल वेतन और डीए के रूप में मिलती थी। लेकिन वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) ने स्केल IV से स्केल VII तक के वरिष्ठ बैंक अधिकारियों के लिए एक नई व्यक्तिगत मूल्यांकन आधारित इंसेंटिव प्रणाली लागू करने का निर्देश जारी किया है।

यूनियनों का आरोप है कि इस नए नियम के तहत शीर्ष 5 फीसदी वरिष्ठ अधिकारियों (करीब 40 हजार अफसर) को उनके व्यक्तिगत मूल्यांकन के आधार पर साल में 365 दिनों के वेतन के बराबर भारी-भरकम बोनस मिल सकेगा, जबकि निचले स्तर के 95 फीसदी कर्मचारियों (क्लर्क, चपरासी और जूनियर अधिकारी) को केवल नाममात्र का 1 से 15 दिनों का इंसेंटिव मिलेगा। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA) और ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) ने इसे कर्मचारियों के बीच फूट डालने वाली और गैर-बराबरी पैदा करने वाली नीति करार दिया है। यूनियनों का कहना है कि जब यह विवाद केंद्रीय श्रम आयुक्त (CLC) और दिल्ली उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, तब सरकार द्वारा बैंकों को इस योजना को जबरन लागू करने का निर्देश देना औद्योगिक विवाद अधिनियम का खुला उल्लंघन है।

हड़ताल का आगे का खाका: सितंबर अंत में 3 दिन और अक्टूबर से बेमियादी बंदी की चेतावनी

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने अपनी मांगों को लेकर चरणबद्ध आंदोलन का एक विस्तृत रोडमैप घोषित किया है। यदि 11 सितंबर की एक दिवसीय हड़ताल के बाद भी सरकार और प्रबंधन ने उनकी मांगों का संज्ञान नहीं लिया, तो दूसरा बड़ा प्रहार सितंबर के अंत में किया जाएगा। यूनियनों ने 28, 29 और 30 सितंबर 2026 को लगातार तीन दिनों की देशव्यापी बैंक हड़ताल की घोषणा की है। यह समय बैंकों की अर्धवार्षिक क्लोजिंग (Half-Yearly Closing) का होता है, जब कंपनियों, व्यापारियों और वित्तीय संस्थानों की बैलेंस शीट का मिलान और टैक्स से जुड़े महत्वपूर्ण काम होते हैं। ऐसे महत्वपूर्ण मौके पर तीन दिन बैंक बंद रहने से देश के वित्तीय तंत्र को भारी झटका लग सकता है। इसके अलावा, यूएफबीयू ने चेतावनी दी है कि यदि गतिरोध बरकरार रहा, तो 26 अक्टूबर 2026 से पूरे देश में बैंकिंग व्यवस्था को अनिश्चितकाल के लिए पूरी तरह बंद (Indefinite Strike) कर दिया जाएगा।

पेंशन अपडेशन और ओपीएस (OPS) की बहाली का मुद्दा भी गरमाया

इस आंदोलन में केवल कामकाजी कर्मचारियों के हित ही नहीं, बल्कि लाखों सेवानिवृत्त बैंक कर्मियों के मुद्दे भी मजबूती से शामिल किए गए हैं। बैंक यूनियनें लंबे समय से 1995 से पहले और बाद में रिटायर हुए कर्मचारियों की बेसिक पेंशन को वर्तमान वेतनमान के आधार पर अपडेट करने की मांग कर रही हैं, जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर अब तक नहीं किया गया है। इसके साथ ही सभी श्रेणी के पेंशनभोगियों के लिए 100 प्रतिशत महंगाई भत्ता (DA) न्यूट्रलाइजेशन और चिकित्सा बीमा के प्रीमियम में राहत देने की मांग उठाई जा रही है। यूनियनों की एक और प्रमुख मांग यह है कि 1 अप्रैल 2010 के बाद बैंकिंग सेवा में शामिल हुए उन सभी कर्मचारियों को नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना (OPS) में वापस लौटने का स्पष्ट विकल्प दिया जाए, ताकि उनका बुढ़ापा सुरक्षित हो सके।

शाखाओं में कामकाज ठप, पर क्या डिजिटल लेन-देन और एटीएम सेवाएं रहेंगी चालू?

11 सितंबर की हड़ताल का सबसे गंभीर प्रभाव भारतीय स्टेट बैंक (SBI), पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB), केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बड़े बैंकों पर पड़ेगा, क्योंकि इनका कर्मचारी तंत्र सीधे तौर पर हड़ताल में शामिल है। शाखाओं के भीतर कैश काउंटर, ड्राफ्ट डेस्क, लोन डिस्बर्समेंट और विदेशी मुद्रा सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी। निजी क्षेत्र के प्रमुख बैंकों जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक के कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से इस यूनियन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए इनकी शाखाएं खुली रह सकती हैं; लेकिन इंटरबैंक चेक क्लीयरेंस और सेटलमेंट प्रभावित होने के कारण इन बैंकों के ग्राहकों के चेक भी तीन से चार दिनों तक क्लीयर नहीं हो पाएंगे।

राहत की बात यह है कि यूपीआई (UPI), इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप और आरटीजीएस/नेफ्ट (RTGS/NEFT) जैसी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। रिज़र्व बैंक के अनुसार ऑनलाइन फंड ट्रांसफर 24 घंटे सातों दिन चालू रहते हैं। हालांकि, लंबे सप्ताहांत और लगातार बंदी के चलते शहरों के एटीएम (ATM) में नकदी का संकट खड़ा हो सकता है, क्योंकि बैंकों और कैश मैनेजमेंट कंपनियों द्वारा वेंडरों के जरिए एटीएम में नई नकदी डालने का काम भी प्रभावित हो सकता है।

अतः वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि जिन उपभोक्ताओं या व्यापारियों को शाखा से जुड़े जरूरी काम, नकदी निकासी या चेक क्लियर कराने हैं, वे 10 सितंबर (गुरुवार) तक अपने सभी महत्वपूर्ण बैंकिंग कार्य अवश्य निपटा लें, ताकि 11 से 14 सितंबर के लंबे गतिरोध के दौरान किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके।