चावल की कीमतों पर लगेगी लगाम: केंद्र का बड़ा एक्शन, OMSS बिक्री का लक्ष्य दोगुना

चावल की कीमतों पर लगेगी लगाम: केंद्र का बड़ा एक्शन, OMSS बिक्री का लक्ष्य दोगुना

देश के खुदरा और थोक बाजारों में चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और आम उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने बहुआयामी और सख्त कदम उठाए हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने ओपन मार्केट सेल स्कीम-घरेलू [OMSS (D)] के तहत ई-नीलामी के माध्यम से चावल की बिक्री के वार्षिक लक्ष्य को सीधे दोगुना कर दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पहले तय किए गए 25 लाख मीट्रिक टन (LMT) के बिक्री लक्ष्य को बढ़ाकर अब 50 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 अक्टूबर तक ही ई-नीलामी के जरिए निजी खरीदारों को 25 लाख टन चावल बेचा जा चुका था, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा महज 11 लाख टन था। इस आपूर्ति विस्तार का मुख्य उद्देश्य खुले बाजार में खाद्यान्न की उपलब्धता बढ़ाकर कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर तुरंत रोक लगाना है।

हर शुक्रवार अनिवार्य स्टॉक प्रकटीकरण: 6 श्रेणियों में देना होगा पाई-पाई का हिसाब

बाजार में जमाखोरी (Hoarding) और सट्टेबाजी पर नकेल कसने के लिए सरकार ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में व्यापारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, बिग-चेन रिटेलर्स तथा मिलर्स/प्रोसेसर्स के लिए साप्ताहिक स्टॉक घोषणा को पूरी तरह अनिवार्य बना दिया है। आदेश के तहत चावल और धान का भंडारण करने वाली प्रत्येक इकाई को केंद्र सरकार के आधिकारिक 'फूड स्टॉक पोर्टल' (foodstock.dfpd.gov.in) पर पंजीकरण कराना होगा। कारोबारियों को प्रत्येक सप्ताह शुक्रवार को 6 स्पष्ट श्रेणियों में अपने स्टॉक की स्थिति अपडेट करनी होगी:

  1. बासमती चावल (Basmati Rice)

  2. गैर-बासमती प्रीमियम चावल (Non-Basmati Premium Rice)

  3. सामान्य गैर-बासमती चावल (Non-Basmati Rice)

  4. उसना चावल (Parboiled Rice)

  5. टूटा हुआ चावल (Broken Rice)

  6. धान (Paddy)

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई: जेल और जब्ती की चेतावनी

खाद्य मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो भी व्यापारी या मिलर्स पोर्टल पर खुद को पंजीकृत नहीं करेंगे या झूठे व भ्रामक आंकड़े दर्ज करेंगे, उनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 (Essential Commodities Act, 1955) की धारा 6 और धारा 7 के तहत सीधी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत अवैध रूप से छुपाए गए खाद्यान्न के स्टॉक को सीधे जब्त करने के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों पर भारी जुर्माना और आपराधिक मुकदमा चलाने का प्रावधान है। केंद्र और राज्य सरकारों की प्रवर्तन एजेंसियां जमीनी स्तर पर गोदामों की औचक जांच करेंगी ताकि पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और भौतिक स्टॉक का मिलान किया जा सके।

दक्षिणी राज्यों को स्टॉक लिमिट लगाने की मंजूरी: 31 जनवरी 2027 तक रहेगी छूट

दक्षिण भारत के राज्यों में चावल की मुख्य उपभोग मांग और हालिया मूल्य दबाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 5 प्रमुख दक्षिणी राज्यों—आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को अपने स्तर पर चावल और धान पर कानूनी स्टॉक लिमिट (Stock Limits) लागू करने की औपचारिक सहमति प्रदान कर दी है। ये राज्य सरकारें अपने यहां नियंत्रण आदेश (Control Orders) जारी करके थोक व खुदरा व्यापारियों के लिए अधिकतम स्टॉक धारण करने की कानूनी सीमा तय कर सकती हैं। यह विशेष अधिकार 31 जनवरी 2027 तक प्रभावी रहेगा, जिससे दक्षिणी क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी पैदा न हो सके।

'भारत चावल' का अतिरिक्त आवंटन: नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को जिम्मेदारी

मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को सस्ती दरों पर गुणवत्तापूर्ण अनाज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने रियायती 'भारत चावल' (Bharat Rice) के वितरण को बड़े पैमाने पर तेज करने का निर्णय लिया है। इसके तहत तीन प्रमुख सहकारी व वितरण एजेंसियों—भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED), राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (NCCF) और केंद्रीय भंडार को अतिरिक्त चावल का कोटा आवंटित किया जा रहा है। इन एजेंसियों को मोबाइल वैन, खुदरा आउटलेट्स और ऑनलाइन ई-कॉमर्स चैनलों के जरिए दक्षिण भारत सहित देश के दूरदराज इलाकों में किफायती चावल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। खुले बाजार में आपूर्ति बढ़ने और सख्त निगरानी से आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में चावल के दाम स्थिर होने की पूरी उम्मीद है।