देशभर में 2.5 लाख से ज्यादा पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन और 3 मेगा मैन्युफैक्चरिंग जोन: ग्रीन मोबिलिटी पर सरकार का बड़ा एक्शन प्लान, हाइड्रोजन व्हीकल्स पर भी बड़ा अपडेट
देश में पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने, कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती करने और इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को आम नागरिकों के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक इन्फ्रास्ट्रक्चर रोडमैप तैयार किया है। देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, मेट्रो शहरों और टियर-2/टियर-3 कस्बों में 2.5 लाख से अधिक पब्लिक ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना पर तेजी से काम शुरू हो गया है। इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं के मन में सबसे बड़ा संशय हमेशा 'रेंज एंग्जायटी' (बैटरी खत्म होने का डर) और चार्जिंग पॉइंट की अनुपलब्धता का रहता है। सरकार का यह व्यापक नेटवर्क निजी और सार्वजनिक दोनों तरह के वाहनों को हर कुछ किलोमीटर के दायरे में फास्ट-चार्जिंग की सुविधा मुहैया कराएगा, जिससे देश में ई-मोबिलिटी को व्यापक स्तर पर गति मिलेगी।
पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना से मिला वित्तीय संबल: भारी भरकम बजट आवंटित
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries) द्वारा संचालित 'पीएम ई-ड्राइव' (PM Electric Drive Revolution in Innovative Vehicle Enhancement) योजना के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ₹2,000 करोड़ का विशेष बजटीय आवंटन किया गया है। इसके तहत तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के मौजूदा पेट्रोल पंपों, व्यस्त सार्वजनिक पार्किंग स्थलों, रेलवे स्टेशनों, बस टर्मिनलों और प्रमुख एक्सप्रेसवे पर हाई-कैपेसिटी चार्जर्स लगाए जा रहे हैं:
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फास्ट चार्जर्स का जाल: चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों (e-4Ws) के लिए 22,000 से अधिक अल्ट्रा-फास्ट डीसी (DC) चार्जर्स।
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पब्लिक ट्रांसपोर्ट सपोर्ट: भारी ई-बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए 1,800 से अधिक हाई-पावर चार्जिंग गन।
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टू-व्हीलर व थ्री-व्हीलर नेटवर्क: दोपहिया और तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 48,000 से अधिक स्लो एवं फास्ट चार्जिंग प्वाइंट्स को प्राथमिक रूप से मंजूरी दी जा चुकी है, जिसे चरणबद्ध तरीके से 2.5 लाख के पार ले जाने का लक्ष्य है।
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राजमार्गों पर ग्रिड कनेक्टिविटी: प्रमुख एक्सप्रेसवे (जैसे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल व यमुना एक्सप्रेसवे) पर प्रत्येक 25 से 50 किलोमीटर की दूरी पर डेडिकेटेड ईवी चार्जिंग प्लाजा विकसित किए जा रहे हैं।
देश में बनेंगे 3 मेगा मैन्युफैक्चरिंग जोन: चीन पर निर्भरता होगी खत्म
इलेक्ट्रिक वाहनों के स्पेयर पार्ट्स, बैटरी सेल्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आयात पर निर्भरता समाप्त करने के लिए सरकार ने देश में 3 विशेष ईवी मैन्युफैक्चरिंग जोन (Mega EV & Clean Energy Manufacturing Zones) स्थापित करने का फैसला किया है।
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उन्नत बैटरी और सेमीकंडक्टर क्लस्टर: इन जोनों में एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज, मोटर कंट्रोलर्स, इनवर्टर और ड्राइव-ट्रेन के घरेलू निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा।
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प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर: इन मैन्युफैक्चरिंग जोनों में वैश्विक और घरेलू ऑटोमोबाइल कंपनियों को रियायती दरों पर भूमि, 24 घंटे ग्रीन पावर, जल आपूर्ति और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की सुविधा दी जाएगी।
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लाखों रोजगार के अवसर: स्थानीय स्तर पर पार्ट्स का निर्माण होने से न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों की उत्पादन लागत 15% से 20% तक घटेगी, बल्कि लाखों कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के द्वार खुलेंगे।
हाइड्रोजन मोबिलिटी (Hydrogen Mobility): भारी वाहनों के लिए गेम-चेंजर
बैटरी आधारित इलेक्ट्रिक वाहनों के साथ-साथ सरकार लंबी दूरी के भारी परिवहन के लिए 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' (National Green Hydrogen Mission) पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रही है। भारी ट्रकों, लंबी दूरी की बसों और मालगाड़ियों के लिए अत्यधिक वजनी बैटरी पैक लगाना तकनीकी रूप से कई बार व्यावहारिक नहीं होता, इसलिए हाइड्रोजन फ्यूल सेल (Hydrogen Fuel Cell) को भविष्य का सर्वश्रेष्ठ विकल्प माना गया है:
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हाइड्रोजन बस और ट्रक पायलट प्रोजेक्ट्स: विभिन्न औद्योगिक कॉरिडोर और खनन क्षेत्रों में हाइड्रोजन से चलने वाली वाणिज्यिक बसों और भारी ट्रकों का परीक्षण तेज कर दिया गया है।
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शून्य टेलपाइप उत्सर्जन: हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों के साइलेंसर से केवल पानी की भाप (Water Vapour) निकलती है, जो पर्यावरण को शत-प्रतिशत प्रदूषण-मुक्त रखती है।
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फास्ट रिफ्यूलिंग: जहां बड़ी ईवी बैटरी को चार्ज होने में 45 से 90 मिनट लगते हैं, वहीं हाइड्रोजन वाहन महज 5 से 10 मिनट में पूरी तरह रिफ्यूल हो जाते हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स सेक्टर की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
भारत के ग्रीन मोबिलिटी विजन की प्रमुख रूपरेखा
| घटक / क्षेत्र | सरकारी लक्ष्य एवं स्थिति |
| पब्लिक ईवी चार्जर्स | 2.5 लाख से अधिक चार्जिंग प्वाइंट्स का राष्ट्रीय ग्रिड तैयार करना |
| ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर बजट | ₹2,000 करोड़ का प्राथमिक फंड (PM E-DRIVE के अंतर्गत) |
| मैन्युफैक्चरिंग जोन | बैटरी, मोटर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए 3 मेगा इंडस्ट्रियल जोन |
| वाणिज्यिक वाहन फोकस | 14,000+ ई-बसें और हजारों ई-ट्रक सार्वजनिक परिवहन में शामिल |
| अल्टरनेटिव फ्यूल रणनीति | लंबी दूरी के हेवी-ड्यूटी ट्रांसपोर्ट के लिए ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल |
| अंतिम उद्देश्य (Target 2030) | 30% निजी कारें, 70% कमर्शियल व्हीकल और 80% टू-व्हीलर/थ्री-व्हीलर इलेक्ट्रिक बनाना |
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के इतने बड़े पैमाने पर विस्तार और स्थानीय विनिर्माण को मिलने वाले प्रोत्साहन से भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन वाहनों की स्वीकार्यता में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिलेगा, जिससे आम जनता को महंगे ईंधन से मुक्ति मिलेगी और स्वच्छ पर्यावरण का मार्ग प्रशस्त होगा।