EPFO WhatsApp Service: छुट्टी के दिन करोड़ों नौकरीपेशा लोगों को बड़ा तोहफा
देशभर के करोड़ों नौकरीपेशा और वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है। छुट्टी के दिन सामने आई यह खबर हर उस कर्मचारी के चेहरे पर मुस्कान लाने वाली है जो हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई का एक तय हिस्सा भविष्य निधि में जमा करता है। अक्सर देखा गया है कि जब भी किसी कर्मचारी को अपना प्रोविडेंट फंड यानी पीएफ बैलेंस चेक करना होता था, तो उसे आधिकारिक पोर्टल के धीमे सर्वर, ओटीपी के न आने की समस्या या तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ता था। खासकर महीने की शुरुआत या वित्तीय वर्ष के दौरान वेबसाइट पर इतना ज्यादा ट्रैफिक बढ़ जाता था कि सर्वर डाउन होना आम बात हो गई थी। इस बार EPFO ने डिजिटल इंडिया की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए अपनी सबसे लोकप्रिय और बहुप्रतीक्षित सेवा को इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया है। अब आपको अपने कंप्यूटर पर भारी-भरकम पोर्टल खोलने या साइबर कैफे के चक्कर लगाने की कोई आवश्यकता नहीं है, बस आपके स्मार्टफोन में मौजूद व्हाट्सएप ही आपके पूरे पीएफ खाते की चाबी बन जाएगा।
EPFO WhatsApp Service का आधिकारिक नंबर और इसे एक्टिवेट करने का पूरा तरीका
कर्मचारियों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए EPFO ने एक डेडिकेटेड हेल्पलाइन नंबर जारी किया है जो पूरी तरह से ऑटोमेटेड और सुरक्षित सिस्टम पर काम करता है। इस नई सुविधा का लाभ उठाने के लिए अंशधारकों को सबसे पहले आधिकारिक नंबर +91-7738299899 (अथवा ईपीएफओ के केंद्रीय व्हाट्सएप हेल्पडेस्क नंबर) को अपने मोबाइल फोन की फोनबुक में 'EPFO Helpdesk' या 'EPF WhatsApp' के नाम से सेव करना होगा। ध्यान रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको यह मैसेज उसी मोबाइल नंबर से भेजना होगा जो आपके यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी UAN के साथ आधिकारिक रूप से रजिस्टर्ड और लिंक है। नंबर सुरक्षित करने के बाद व्हाट्सएप ओपन करें और चैट बॉक्स में जाकर केवल 'Hi' या 'EPFOHO' लिखकर सेंड कर दें। जैसे ही आपका मैसेज डिलीवर होगा, सिस्टम की तरफ से तुरंत एक इंटरैक्टिव मेन्यू भेजा जाएगा जिसमें आपकी भाषा का चयन करने और विभिन्न सेवाओं को चुनने का विकल्प स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। यह पूरी प्रक्रिया पलक झपकते ही पूरी हो जाती है और किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप को डाउनलोड करने की झंझट भी पूरी तरह खत्म हो जाती है।
व्हाट्सएप पर बैलेंस के अलावा और क्या-क्या देख सकेंगे खाताधारक
बहुत से लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या व्हाट्सएप पर सिर्फ बैलेंस ही दिखेगा या अन्य सुविधाएं भी मिलेंगी। ईपीएफओ ने इस सिस्टम को आधुनिक यूजर एक्सपीरियंस को ध्यान में रखकर बहुआयामी बनाया है। व्हाट्सएप चैटबॉट के जरिए अब आप अपने खाते का कुल जमा बैलेंस देख सकते हैं, जिसमें कर्मचारी का शेयर और कंपनी का शेयर अलग-अलग साफ तौर पर दर्ज होता है। इसके अलावा खाते में जमा राशि पर मिलने वाले सालाना ब्याज का विवरण और कंपनी द्वारा किया गया आखिरी योगदान किस तारीख को क्रेडिट हुआ, इसकी मुकम्मल जानकारी भी स्क्रीन पर आ जाएगी। जिन कर्मचारियों ने किसी इमरजेंसी, मेडिकल जरूरत, घर निर्माण या शादी-ब्याह के लिए आंशिक अथवा पूर्ण पीएफ निकासी यानी क्लेम के लिए आवेदन किया हुआ है, वे अपने क्लेम का रियल-टाइम स्टेटस भी यहीं ट्रैक कर सकेंगे। इतना ही नहीं, यदि आपको अपनी डिजिटल ई-पासबुक की समरी चाहिए, तो चैटबॉट आपको एक सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड लिंक अथवा पीडीएफ स्लिप तुरंत चैट में भेज देता है, जिससे आपको अपने पूरे सर्विस रिकॉर्ड का ब्यौरा बिना किसी रुकावट के मिल जाता है।
लखनऊ से लेकर देश के हर कोने तक क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय कर्मचारियों को सीधा फायदा
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद जैसे औद्योगिक और आईटी हब से लेकर देश के सुदूर इलाकों में काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों के लिए यह सुविधा वरदान साबित होने वाली है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में बहुत से कर्मचारी ऐसे हैं जो जटिल ऑनलाइन पोर्टल्स, कैप्चा कोड और पासवर्ड रीसेट जैसी तकनीकी औपचारिकताओं से घबराते थे या उनके पास पर्सनल कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। स्थानीय स्तर पर काम करने वाले फैक्ट्री वर्कर्स, आउटसोर्सिंग कर्मचारी और छोटे संस्थानों के कामगार भी अपने स्मार्टफोन में व्हाट्सएप का इस्तेमाल बखूबी करना जानते हैं। ईपीएफओ ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि व्हाट्सएप सेवा में हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ कई प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं का सपोर्ट दिया जाए ताकि भाषाई बाधा के कारण कोई भी कर्मचारी अपने अधिकार और मेहनत की कमाई की जानकारी से वंचित न रहे। क्षेत्रीय ईपीएफओ दफ्तरों में रोजाना लगने वाली लंबी कतारों और पूछताछ काउंटरों पर होने वाली भारी भीड़ में भी अब भारी गिरावट आने की पूरी संभावना है, क्योंकि 80 प्रतिशत से ज्यादा सवाल बैलेंस और क्लेम ट्रैकिंग से ही जुड़े होते हैं।
सुरक्षा, प्राइवेसी और फ्रॉड से बचने के लिए इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ-साथ ऑनलाइन सुरक्षा और साइबर फ्रॉड का खतरा भी लगातार बना रहता है, इसलिए ईपीएफओ ने अंशधारकों के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए हैं। सबसे पहले यह सुनिश्चित करें कि आप जिस नंबर से बातचीत कर रहे हैं, उस पर ईपीएफओ का ऑफिशियल ग्रीन टिक या वेरिफाइड बिजनेस प्रोफाइल बैज लगा हुआ हो। ईपीएफओ ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि विभाग का सिस्टम कभी भी व्हाट्सएप चैट पर आपका पूरा आधार नंबर, बैंक खाते का पासवर्ड, यूपीआई पिन, क्रेडिट या डेबिट कार्ड की गोपनीय जानकारी या ओटीपी नहीं मांगता है। यदि कोई व्यक्ति या अनधिकृत नंबर ईपीएफओ के नाम पर आपसे ओटीपी साझा करने को कहे, तो समझ जाएं कि वह फर्जीवाड़ा हो सकता है। यह सेवा एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के तहत काम करती है और केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर तथा एक्टिवेट यूएएन के सामंजस्य पर ही डेटा फेच करती है, इसलिए आपका डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा आपके खाते की जानकारी निकालना नामुमकिन है।
उमंग ऐप, एसएमएस और मिस्ड कॉल के मुकाबले व्हाट्सएप सर्विस क्यों है ज्यादा असरदार
अब तक ईपीएफओ अपने मेंबर्स को उमंग ऐप, एसएमएस और मिस्ड कॉल के जरिए बैलेंस जानने की सुविधा देता आ रहा था, लेकिन इन सभी में कोई न कोई व्यावहारिक सीमा थी। उदाहरण के तौर पर, मिस्ड कॉल सेवा (011-22901406) में कई बार नेटवर्क जाम होने की वजह से रिटर्न मैसेज नहीं आता था या घंटों देरी से पहुंचता था। वहीं एसएमएस सेवा (7738299899 पर EPFOHO UAN लिखकर भेजना) में मोबाइल रीचार्ज प्लान में टॉक-टाइम या एसएमएस बैलेंस न होने पर मैसेज सेंड ही नहीं होता था, जबकि उमंग ऐप पर भारी ट्रैफिक के वक्त लॉग-इन सेशन बार-बार एक्सपायर हो जाता था। व्हाट्सएप इन सभी समस्याओं का एक सहज और आधुनिक समाधान बनकर उभरा है क्योंकि लगभग हर स्मार्टफोन यूजर के पास एक एक्टिव इंटरनेट डेटा पैक होता ही है और व्हाट्सएप का इंटरफेस बेहद तेज, इंटरएक्टिव और समझने में सबसे आसान है। बटन क्लिक करते ही तुरंत रिस्पॉन्स मिलना इस व्यवस्था को पुरानी सभी प्रणालियों से मीलों आगे खड़ा करता है, जिससे वेतनभोगी वर्ग का कीमती समय बचता है।