नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर की टेंशन खत्म: EPFO का नया नियम लागू, अब नई कंपनी जॉइन करते ही अपने-आप ट्रांसफर होगा पैसा!

नौकरी बदलने पर PF ट्रांसफर की टेंशन खत्म: EPFO का नया नियम लागू, अब नई कंपनी जॉइन करते ही अपने-आप ट्रांसफर होगा पैसा!

नौकरी बदलने पर अधिकांश कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी सिरदर्दी अपने पुराने भविष्य निधि (PF) खाते से नए खाते में पैसे ट्रांसफर कराने की होती थी। कई बार पुरानी कंपनी से अटेस्टेशन न मिलने, फॉर्म 13 के तकनीकी पचड़ों में फंसने या दोनों कंपनियों के बीच सामंजस्य न होने के कारण पीएफ ट्रांसफर महीनों तक लटका रहता था। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इस जटिल और थकाऊ प्रक्रिया को समाप्त करते हुए अपने नए सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) सिस्टम के तहत ऑटोमैटिक पीएफ ट्रांसफर (Auto Transfer) की व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब नौकरी बदलने वाले किसी भी कर्मचारी को पुराने पीएफ बैलेंस को नए संस्थान में ले जाने के लिए अलग से ऑनलाइन ट्रांसफर क्लेम करने या फॉर्म 13 भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जैसे ही कर्मचारी नई कंपनी जॉइन करेगा और वहां से पहला पीएफ अंशदान (Contribution) जमा होगा, बैकएंड सिस्टम अपने-आप पुराने खाते की जमा पूंजी को नए मेंबर आईडी में मर्ज कर देगा।

कैसे काम करता है ऑटो-ट्रांसफर सिस्टम और इसका ट्रिगर पॉइंट?

ईपीएफओ का ऑटो-ट्रांसफर मैकेनिज्म पूरी तरह से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) पर आधारित है। जब आप अपनी पुरानी कंपनी छोड़ते हैं, तो कंपनी द्वारा ईपीएफओ पोर्टल पर आपकी नौकरी छोड़ने की तारीख (Date of Exit) दर्ज कर दी जाती है। इसके बाद जब आप नई कंपनी जॉइन करते हैं और अपना वही पुराना UAN नंबर नए नियोक्ता को सौंपते हैं, तो नई कंपनी आपका नया मेंबर आईडी (Member ID) उसी UAN से लिंक कर देती है।

जैसे ही नई कंपनी आपके पहले महीने की सैलरी से कटा पीएफ अंशदान ईपीएफओ में जमा करती है, सिस्टम में स्वतः एक 'ऑटो-ट्रांसफर ट्रिगर' एक्टिवेट हो जाता है। इसके बाद ईपीएफओ का केंद्रीय सर्वर पिछले खाते के कर्मचारी और नियोक्ता दोनों के शेयर को नए खाते में क्रेडिट कर देता है। इस प्रक्रिया के शुरू और पूरे होने की सूचना सदस्य के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) और ईमेल के जरिए भेज दी जाती है।

ऑटो-ट्रांसफर का लाभ पाने के लिए 4 अनिवार्य शर्तें

हालांकि यह सुविधा पूरी तरह ऑटोमैटिक है, लेकिन इसके सही तरीके से काम करने के लिए सदस्य के खाते में निम्नलिखित 4 शर्तें पूरी होनी अनिवार्य हैं:

  1. UAN का एक्टिवेट और आधार से लिंक होना: आपका यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) सक्रिय होना चाहिए और वह आपके सही आधार नंबर से जुड़ा होना चाहिए।

  2. पूर्ण डिजिटल KYC वेरिफिकेशन: आपके UAN खाते में आधार, पैन कार्ड (PAN) और बैंक खाता विवरण (IFSC कोड सहित) पूरी तरह अपडेटेड और नियोक्ता द्वारा 'डिजिटली अप्रूव्ड' होना चाहिए।

  3. पुरानी कंपनी द्वारा 'Date of Exit' दर्ज होना: पिछली नौकरी छोड़ने के बाद उस कंपनी द्वारा ईपीएफओ रिकॉर्ड में आपकी कार्यमुक्ति की तारीख दर्ज की जानी जरूरी है। यदि पुरानी कंपनी ने एग्जिट डेट नहीं डाली है, तो सदस्य खुद भी यूनिफाइड पोर्टल पर जाकर 'Manage > Mark Exit' विकल्प से इसे दर्ज कर सकता है।

  4. समान व्यक्तिगत विवरण (Name & DOB Match): आपके आधार कार्ड, बैंक खाते और दोनों कंपनियों के रिकॉर्ड में नाम, जन्मतिथि और पिता के नाम की स्पेलिंग में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।

यदि इनमें से कोई भी विवरण अधूरा या गलत होता है, तो ऑटो-ट्रांसफर ब्लॉक हो सकता है और ऐसी स्थिति में सदस्य को मैन्युअल प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ेगा।

किन्हें नहीं मिलेगा इस ऑटोमैटिक ट्रांसफर का फायदा?

ईपीएफओ ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऑटो-ट्रांसफर की यह सुविधा केवल उन कंपनियों और प्रतिष्ठानों के लिए लागू है जिनके पीएफ खाते सीधे ईपीएफओ (Unexempted Establishments) द्वारा मैनेज किए जाते हैं।

यदि कोई कर्मचारी किसी ऐसी प्राइवेट ट्रस्ट या कंपनी में काम करता है जिसका अपना स्वतंत्र छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट (Exempted PF Trust) है, तो उस पर यह ऑटो-ट्रांसफर नियम लागू नहीं होगा। ऐसे मामलों में कर्मचारी को अपने ट्रस्ट या ईपीएफओ पोर्टल के माध्यम से मैन्युअल ट्रांसफर फॉर्म की पारंपरिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

सर्विस निरंतरता और पेंशन (EPS) का सबसे बड़ा फायदा

बार-बार नौकरी बदलने वाले प्रोफेशनल्स के लिए पीएफ को एक ही UAN के तहत ऑटो-मर्ज कराने का सबसे बड़ा फायदा सर्विस की निरंतरता (Continuity of Service) बनाए रखना है। कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) के नियमों के अनुसार, 58 वर्ष की आयु के बाद आजीवन मासिक पेंशन पाने के लिए न्यूनतम 10 वर्ष की कुल सेवा अवधि पूरी होना अनिवार्य है। जब आपके सभी पिछले खाते समय पर नए खाते से जुड़ते रहते हैं, तो आपकी पुरानी सेवा अवधि भी बिना किसी नुकसान के जुड़ती जाती है।

इसके अलावा, यदि आपकी कुल सेवा अवधि 5 वर्ष या उससे अधिक हो जाती है, तो पीएफ से निकाली जाने वाली राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री हो जाती है। ऑटो-ट्रांसफर होने से आपको यह ट्रैक करने में आसानी रहती है कि आपकी कुल सर्विस कितने साल की हो चुकी है। कर्मचारी अपने ईपीएफओ पासबुक पोर्टल पर लॉगिन करके 'View Passbook' और 'Service History' सेक्शन में जाकर यह आसानी से देख सकते हैं कि उनका पुराना बैलेंस नए खाते में सफलतापूर्वक जुड़ चुका है या नहीं।