भारत की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन (B-28) तैयार: 280 Kmph की रफ्तार और 557 यात्रियों की क्षमता के साथ जानें सभी खूबियां
भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन, जिसे कोडनेम B-28 दिया गया है, का निर्माण कार्य बेंगलुरु स्थित बीईएमएल (BEML) के अत्याधुनिक 'आदित्य कॉम्प्लेक्स' में जोरों पर चल रहा है। रेल मंत्रालय और इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) के संयुक्त मार्गदर्शन में तैयार हो रही यह ट्रेन हाई-स्पीड रेल तकनीक में भारत की वैश्विक निर्भरता को समाप्त कर 'मेक इन इंडिया' की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी। अब तक जहां जापानी शिंकानसेन (Shinkansen) तकनीक पर मुख्य फोकस था, वहीं इस स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट का विकास भारतीय परिस्थितियों, धूल और भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर विशेष रूप से किया गया है।
रफ्तार और तकनीकी क्षमता का दम
यह पहली मेड-इन-इंडिया बुलेट ट्रेन अपनी गति और क्षमता के मामले में विश्वस्तरीय मानकों को टक्कर देने के लिए डिजाइन की गई है। इस 8-कोच वाले ट्रेनसेट की अधिकतम डिजाइन व टेस्टिंग स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है, जबकि पटरियों पर इसकी परिचालन गति (Operational Speed) 249 से 250 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। लगभग 202 मीटर लंबी इस पूरी ट्रेन में 4 मोटर कोच और 4 ट्रेलर कोच होंगे, जिससे ट्रेन को गति पकड़ने और नियंत्रित करने में बेहतरीन बैलेंस मिलता है। 25 केवी (KV) एसी ट्रैक्शन सिस्टम से लैस यह ट्रेन आधुनिक डिस्ट्रीब्यूटेड ट्रैक्शन तकनीक पर संचालित होगी। भविष्य में भारी यात्री दबाव को संभालने के लिए ऐसे दो 8-कोच वाले रैक को आपस में जोड़कर 16-कोच की विशाल ट्रेन में भी बदला जा सकेगा।
557 सीटों की क्षमता और शानदार कोच लेआउट
ट्रेन की बैठक व्यवस्था को यात्रियों की सुविधा और स्पेस को प्राथमिकता देकर तैयार किया गया है। पूरे 8-कोच सेट में कुल 557 यात्रियों के बैठने की क्षमता होगी। इसमें 7 कोच स्टैंडर्ड (चेयर कार) क्लास के होंगे, जिनमें 3x2 का सिटिंग कॉन्फिगरेशन रहेगा, जबकि 1 कोच प्रीमियम एग्जीक्यूटिव क्लास का होगा, जिसमें 2x2 लेआउट में बेहद आरामदायक कुर्सियां लगाई गई हैं। एग्जीक्यूटिव क्लास में सीटें 360-डिग्री घूमने (Rotating) और झुकने (Reclining) की सुविधा के साथ आएंगी, जिससे सफर के दौरान यात्रियों को विमान के बिजनेस क्लास जैसा अनुभव प्राप्त होगा। हर सीट पर मोबाइल-लैपटॉप चार्जिंग के लिए व्यक्तिगत पावर आउटलेट और बड़ा लेग-स्पेस दिया गया है।
विमान जैसा आराम और आधुनिक सुरक्षा फीचर्स
इस स्वदेशी बुलेट ट्रेन का केबिन पूरी तरह से सीलबंद और साउंड-प्रूफ होगा, जिससे 250 किमी/घंटे की रफ्तार पर भी ट्रेन के अंदर का केबिन बिल्कुल शांत रहेगा। हवा के दबाव और घर्षण को न्यूनतम करने के लिए ट्रेन के अगले हिस्से (Nose Cone) को कम्प्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स (CFD) तकनीक से एयरोडायनामिक डिजाइन दिया गया है। ट्रेन के अंदर का तापमान और नमी नियंत्रित रखने के लिए हाई-कैपेसिटी सेंट्रलाइज्ड HVAC (एयर कंडीशनिंग) सिस्टम लगा है, जिसमें डस्ट और पॉल्यूशन फिल्टर लगे हैं। ऊर्जा बचत के लिए इसमें रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम शामिल किया गया है, जो ब्रेक लगाने पर ऊर्जा पैदा कर पावर ग्रिड को वापस भेजता है। इसके साथ ही ऑनबोर्ड वाई-फाई आधारित इंफोटेनमेंट और हिंदी, अंग्रेजी व क्षेत्रीय भाषाओं में सूचनाएं देने वाली बड़ी एलसीडी स्क्रीन्स लगाई गई हैं।
दिव्यांग यात्रियों के लिए विशेष इंतजाम
भारतीय रेलवे ने इस प्रोजेक्ट में सुगम्य भारत अभियान को पूरी तरह लागू किया है। ट्रेन का फर्श सीधे स्टेशन प्लेटफॉर्म की ऊंचाई के बराबर रखा गया है (Level Boarding), जिससे व्हीलचेयर आसानी से अंदर जा सकेगी। प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच के खाली स्थान को खत्म करने के लिए दरवाजों पर ऑटोमैटिक फुटस्टेप लगाए गए हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए अलग से चौड़े दरवाजे, समर्पित सीटें और विशेष डिजाइन वाले बायो-डाइजेस्टर टॉयलेट बनाए गए हैं। दृष्टिबाधित यात्रियों की सहायता के लिए पूरे कोच में ब्रेल लिपि वाले साइनेज बोर्ड लगाए गए हैं।
कब तक शुरू होगा ट्रायल और संचालन
बीईएमएल और रेलवे के अनुसार, इस स्वदेशी हाई-स्पीड ट्रेनसेट का पहला प्रोटोटाइप 2027 की शुरुआत में ट्रैक पर उतार दिया जाएगा। इसका प्राथमिक ट्रायल मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पूरे हो चुके खंडों (जैसे सूरत-बिलिमोरा सेक्शन) पर किया जाएगा। यह परियोजना न केवल देश के सबसे बड़े बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के ट्रायल और शुरुआती संचालन को गति देगी, बल्कि भविष्य में 350 किमी/घंटा की रफ्तार वाली ट्रेनों (B-35) के निर्माण के लिए भारत की तकनीकी नींव भी मजबूत करेगी।