लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे विवाद में NHAI का बड़ा एक्शन, PNC इंफ्राटेक पर 3 साल का बैन लगते ही शेयर लुढ़का
भारतीय इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में उस समय खलबली मच गई जब देश के चर्चित और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई (NHAI) ने बेहद कड़ा कदम उठाया। इस परियोजना का निर्माण करने वाली प्रमुख प्रमोटर कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड (PNC Infratech Ltd) पर नियमों की अनदेखी और सड़क निर्माण में गंभीर खामियों के चलते अगले तीन साल के लिए कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस प्रशासनिक और विनियामक कार्रवाई का सीधा असर कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और शेयर बाजार में उसके प्रदर्शन पर देखने को मिला है। स्टॉक मार्केट के कारोबार में कंपनी का शेयर औंधे मुंह गिरकर अपने 52 हफ्ते के नए निचले स्तर पर जा पहुंचा है, जिससे निवेशकों में भारी निराशा और चिंता का माहौल है।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर क्यों गिरी गाज और क्या है पूरा मामला
यह पूरा घटनाक्रम बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (जिसे अवध एक्सप्रेसवे के रूप में भी जाना जाता है) के निर्माण कार्यों और उसकी गुणवत्ता से जुड़ा हुआ है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ ही हफ्तों के भीतर सड़क के कुछ हिस्सों में धंसने और संरचनात्मक खराबी आने की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जब आईआईटी खड़गपुर के वरिष्ठ विशेषज्ञों की तकनीकी टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर जांच की, तो एक चौंकाने वाला सच सामने आया। जांच रिपोर्ट में यह बात खुलकर सामने आई कि सड़क निर्माण के दौरान उसके बेस में बेहद कमजोर और अमानक प्लास्टिक मिट्टी का इस्तेमाल किया गया था। इसी बड़ी तकनीकी चूक और घटिया सामग्री के प्रयोग के कारण भारी वाहनों के गुजरते ही एक्सप्रेसवे की परतें बैठने लगी थीं। जनता की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर खतरे को देखते हुए एनएचएआई ने बिना किसी नरमी के इसकी कंसेशनायर कंपनी अवध एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड और उसकी मुख्य प्रमोटर कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक के खिलाफ यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।
तीन साल के प्रतिबंध से सड़क परिवहन मंत्रालय और एनएचएआई के टेंडर से बाहर हुई कंपनी
एनएचएआई और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा उठाये गए इस सख्त कदम के तहत पीएनसी इंफ्राटेक को आगामी तीन साल की अवधि के लिए पूरी तरह से प्रतिबंधित यानी डिबार (Debar) कर दिया गया है। इस प्रतिबंध के दायरे में आने के बाद अब यह कंपनी अगले तीन वर्षों तक देश भर में एनएचएआई, सड़क परिवहन मंत्रालय या उनकी किसी भी अन्य कार्यकारी सरकारी एजेंसियों द्वारा निकाली जाने वाली नई सड़क और राजमार्ग परियोजनाओं की बोलियों (Bidding) में किसी भी रूप में हिस्सा नहीं ले सकेगी। हालांकि, कंपनी की ओर से शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक सफाई में स्पष्ट किया गया है कि इस नए प्रतिबंध का असर उसके उन मौजूदा प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा जो पहले से ही गतिमान हैं या जिन पर काम चल रहा है। इसके बावजूद भविष्य के नए ऑर्डर्स हासिल करने के रास्ते बंद होने से कंपनी के बिजनेस मॉडल पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उसके कुल ऑर्डर बुक का एक बड़ा हिस्सा सरकारी परियोजनाओं पर ही निर्भर रहता है।
शेयर बाजार में हाहाकार, 20% के लोअर सर्किट के साथ 52 हफ्ते के लो पर पहुंचा PNC Infratech का शेयर
सरकारी प्राधिकरण के इस कड़े फैसले का सबसे तीव्र और नकारात्मक असर दलाल स्ट्रीट यानी शेयर बाजार पर देखने को मिला। सप्ताह के कारोबारी सत्र के दौरान पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड के शेयरों में बिकवाली का ऐसा भारी दबाव दिखा कि स्टॉक में सीधे 20 प्रतिशत का भारी-भरकम लोअर सर्किट लग गया। इस बड़ी गिरावट के बाद कंपनी का शेयर टूटकर सीधे 140.32 रुपये के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया, जो कि इसका इस पूरे एक साल यानी 52 हफ्ते का सबसे निचला स्तर (52-Week Low) भी है। पिछले कुछ समय से बाजार के दबाव झेल रहे इस स्टॉक के एक ही दिन में पांचवां हिस्सा गंवा देने से निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है। विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कंपनी कानूनी मोर्चे पर राहत हासिल नहीं करती या स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस काउंटर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर बना रह सकता है।
कंपनी की कानूनी तैयारी और भविष्य की चुनौतियां
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पीएनसी इंफ्राटेक प्रबंधन ने कहा है कि वे नियामक प्राधिकरण के इस फैसले का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। कंपनी इस अप्रत्याशित और कठोर कार्रवाई के खिलाफ सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों (Legal Remedies) पर विचार कर रही है ताकि इस बैन को चुनौती दी जा सके और वित्तीय नुकसान को कम किया जा सके। दूसरी ओर, इस मामले ने देश भर के बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में काम करने वाली अन्य निर्माण कंपनियों के लिए भी गुणवत्ता और कंप्लायंस को लेकर एक कड़ी चेतावनी दे दी है। एक्सप्रेसवे की मरम्मत का काम पूरा होने और सुरक्षा मानक दोबारा बहाल होने तक जनता के लिए इस मार्ग पर आवागमन और टोल को लेकर स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में कंपनी के त्रैमासिक वित्तीय परिणामों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।