Blinkit, Zepto और Instamart के 14 वेयरहाउस के लाइसेंस सस्पेंड; एक्सपायर्ड फूड, कॉकरोच और गंभीर खामियां मिलने पर FDA का बड़ा एक्शन
देशभर में 10 मिनट के भीतर ग्रोसरी और खाने-पीने का सामान घर पहुंचाने का दावा करने वाली क्विक कॉमर्स कंपनियों पर खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक बड़े राज्यव्यापी औचक निरीक्षण अभियान के बाद ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto) और स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) से जुड़े 14 वेयरहाउस व डार्क स्टोर्स के फूड बिजनेस लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिए हैं।
नियामक की इस सख्त कार्रवाई ने ऑनलाइन राशन और पैक्ड फूड मंगाने वाले लाखों उपभोक्ताओं को हिलाकर रख दिया है। एफडीए की अलग-अलग टीमों ने मुंबई, ठाणे, पुणे और सातारा सहित महाराष्ट्र के कई प्रमुख शहरों में फैले 86 ऑनलाइन डिलीवरी प्रतिष्ठानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस दौरान 60 प्रतिष्ठानों को गंभीर सुधार नोटिस (इम्प्रूवमेंट नोटिस) थमाए गए, जबकि एक यूनिट को तुरंत कामकाज पूरी तरह बंद करने का फरमान जारी किया गया। जिन 14 प्रतिष्ठानों के परमिट सस्पेंड किए गए हैं, उनमें पांच ब्लिंकिट, पांच जेप्टो, दो स्विगी इंस्टामार्ट और दो उनके एसोसिएट वेंडर शामिल हैं।
एक्सपायर्ड चिकन, कॉकरोच और चूहों की मौजूदगी: जांच में सामने आईं चौंकाने वाली खामियां
एफडीए अधिकारियों द्वारा तैयार की गई निरीक्षण रिपोर्ट किसी भी आम उपभोक्ता के रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है। अंधेरी, बांद्रा, मलाड, मुलुंड और घाटकोपर जैसे पॉश इलाकों के डार्क स्टोर्स में भारी गंदगी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। बांद्रा स्थित इंस्टामार्ट के वेयरहाउस में खाद्य सामग्रियों के पैकेटों के ठीक पास चूहों की लीद (रोडेंट ड्रॉपिंग्स), छिपकलियां और कॉकरोचों का झुंड रेंगता हुआ मिला।
अंधेरी वेस्ट की एक फैसिलिटी में तो एक्सपायर्ड करी-कट चिकन खुलेआम रखा हुआ था, जिसे अधिकारियों ने मौके पर ही नष्ट करवाया। कई डार्क स्टोर्स में कच्ची सब्जियां और फल सड़ रहे थे, जिन पर कीड़े पनप रहे थे। इसके अलावा, दाल, आटा, ब्रेड और दूध जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के पैकेट बिना किसी पैलेट या स्टैंड के सीधे गंदे और टूटे हुए फर्श पर रखे हुए मिले। स्टोरेज रैक पूरी तरह जंग खाए हुए थे और दीवारों पर जाले लगे थे।
कोल्ड-चेन फेलियर और FIFO-FEFO नियमों की खुली अनदेखी
खाद्य सुरक्षा में सबसे संवेदनशील पहलू 'कोल्ड-चेन मेंटेनेंस' का होता है। फ्रोजन फूड, डेयरी उत्पाद, पनीर, मक्खन और नॉन-वेज आइटम्स को निर्धारित माइनस डिग्री या न्यूनतम तापमान पर रखा जाना अनिवार्य होता है ताकि उनमें बैक्टीरिया न पनपें। एफडीए की जांच में मलाड के ब्लिंकिट स्टोर और पुणे के जेप्टो वेयरहाउस में चिलर रूम और डीप फ्रीजर का तापमान मानकों से कहीं ज्यादा गर्म पाया गया। फ्रोजन आइटम्स के लिए जरूरी एंटी-रूम तक मौजूद नहीं थे।
इसके साथ ही, वेयरहाउस इन्वेंट्री के सबसे बुनियादी नियम FIFO (First In, First Out) और FEFO (First Expired, First Out) की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। पुणे के लोहगांव स्थित जेप्टो आउटलेट में 'यूज बाई' (Use By) डेट पार कर चुके खाद्य उत्पाद अलमारियों में सजे हुए मिले। एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुके उत्पादों को आगे रखने के बजाय नए और पुराने सामान को बिना किसी छंटनी के एक साथ ठूंस दिया गया था।
डिलीवरी राइडर्स और स्टाफ की मेडिकल फिटनेस पर भी उठे गंभीर सवाल
जांच का दायरा सिर्फ गोदामों की दीवारों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान को पैक करने वाले कर्मचारियों और ग्राहकों तक पहुंचाने वाले डिलीवरी राइडर्स के स्वास्थ्य मानकों की भी पड़ताल की गई। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों को संभालने वाले (फूड हैंडलर्स) कर्मचारियों का नियमित मेडिकल चेकअप और फिटनेस सर्टिफिकेट होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
मलाड के ब्लिंकिट डार्क स्टोर में लगभग 40 कर्मचारी बिना किसी मेडिकल जांच रिकॉर्ड के काम करते पाए गए। कर्मचारी बिना ग्लव्स (दस्ताने), एप्रन और हेयर कैप के खुले खाद्य पदार्थों को संभाल रहे थे। वहीं सातारा के कराड में जब एफडीए ने ब्लिंकिट के 125 टू-व्हीलर डिलीवरी पार्टनर्स की औचक जांच की, तो किसी के पास भी जरूरी मेडिकल फिटनेस रिकॉर्ड या पहचान पत्र नहीं मिला। इतना ही नहीं, डिलीवरी बैग्स और राइडर बॉक्सेज पर अनिवार्य एफएसएसएआई (FSSAI) लाइसेंस नंबर तक प्रदर्शित नहीं किया गया था, जिसके बाद कंपनी की दोपहिया डिलीवरी सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी गई।
10 मिनट की अंधी दौड़ और फूड सेफ्टी का संकट: क्विक कॉमर्स का कमजोर पहलू
भारत में क्विक कॉमर्स का बाजार पिछले दो सालों में अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। जहां पारंपरिक ई-कॉमर्स कंपनियां 24 से 48 घंटे में डिलीवरी करती थीं, वहीं ब्लिंकिट, जेप्टो और इंस्टामार्ट जैसी कंपनियों ने 10 से 15 मिनट में डिलीवरी देकर उपभोक्ताओं की आदतें बदल दी हैं। लेकिन इस सुपरफास्ट डिलीवरी मॉडल की रीढ़ कहे जाने वाले 'डार्क स्टोर्स' (शहर के भीतर छोटे-छोटे बंद गोदाम) अब सुरक्षा और गुणवत्ता के मोर्चे पर गंभीर सवालों के घेरे में हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिलीवरी की स्पीड बढ़ाने और कम जगह में हजारों प्रोडक्ट्स ठूंसने के चक्कर में डार्क स्टोर्स में वेंटिलेशन, हाइजीन, वेस्ट डिस्पोजल और पेस्ट कंट्रोल (कीटनाशक नियंत्रण) की उपेक्षा हो रही है। 10 मिनट में पैकेट पिक और पैक करने के दबाव में वेयरहाउस कर्मचारी गुणवत्ता की जांच किए बिना एक्सपायर्ड या डैमेज पैकेट ग्राहकों को भेज देते हैं। एफडीए के इस व्यापक एक्शन ने साफ कर दिया है कि व्यापारिक रफ्तार किसी भी हाल में नागरिकों के स्वास्थ्य से ऊपर नहीं हो सकती।
उपभोक्ताओं के लिए चेतावनी: ऑनलाइन खाद्य सामग्री मंगाते समय इन 5 बातों का रखें ध्यान
यदि आप भी रोजाना दूध, ब्रेड, पनीर, सब्जियां या अन्य पैक्ड फूड क्विक कॉमर्स ऐप्स से ऑर्डर करते हैं, तो अपनी सुरक्षा के लिए इन जरूरी बातों का सख्ती से पालन करें:
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डिलीवरी लेते ही 'Use By' और 'Expiry Date' चेक करें: पैकेट पर छपी अंतिम तिथि को तुरंत देखें। यदि तारीख मिटाई गई हो, ओवरराइटिंग हो या एक्सपायरी पास हो, तो सामान तुरंत रिटर्न करें।
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पैकेजिंग और सील की जांच: फ्रोजन फूड या डेयरी उत्पाद लेते समय यह सुनिश्चित करें कि पैकेट फूला हुआ (पफ्ड), फटा हुआ या गीला न हो। अगर आइसक्रीम या फ्रोजन मटर पिघली हुई अवस्था में मिले, तो उसका सेवन न करें क्योंकि वह कोल्ड-चेन टूटने का संकेत है।
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फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोएं: डार्क स्टोर्स में पेस्ट कंट्रोल की कमी के चलते फल-सब्जियों पर कीटाणु या केमिकल हो सकते हैं। इन्हें पकाने या खाने से पहले गुनगुने पानी और नमक/सिरके से अच्छी तरह साफ करें।
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संदिग्ध गुणवत्ता पर शिकायत दर्ज करें: यदि आपको किसी ऐप से खराब, सड़ा हुआ या एक्सपायर्ड सामान मिलता है, तो ऐप पर रिफंड लेने के साथ-साथ राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) और FSSAI के 'FoSCoS' पोर्टल पर सबूत (तस्वीर/बिल) के साथ शिकायत जरूर दर्ज करें।
महाराष्ट्र एफडीए की इस कड़ी कार्रवाई के बाद अब अन्य राज्यों के खाद्य सुरक्षा विभाग भी अपने-अपने शहरों में मौजूद डार्क स्टोर्स का ऑडिट करने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले दिनों में क्विक कॉमर्स कंपनियों के कामकाज में कड़े नीतिगत और ढांचागत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।