ITR Filing Mistakes: आयकर रिटर्न भरते समय भूलकर भी न करें ये 15 गलतियां, वरना सीधे घर आएगा इनकम टैक्स का नोटिस
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आ गया है। अगर आप समय पर और सही तरीके से अपना टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आपको इनकम टैक्स नोटिस, रिफंड में देरी, अतिरिक्त ब्याज और भारी जुर्माने जैसी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और एडवांस डेटा एनालिटिक्स की मदद से हर एक टैक्सपेयर के डेटा की बारीक जांच कर रहा है। ऐसे में अनजाने में की गई एक छोटी सी गलती भी आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। आइए जानते हैं ITR भरते समय किन 15 मुख्य गलतियों से आपको हर हाल में बचना चाहिए।
1. गलत कटौती (Deduction) या छूट (Exemption) का दावा करना
इन दिनों इनकम टैक्स विभाग ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा सख्त है। गलत सेक्शन में टैक्स कटौती दिखाना, बिना किसी पुख्ता सबूत या रसीद के हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या अन्य छूट का दावा करना सीधे तौर पर टैक्स चोरी की श्रेणी में आता है, जिससे विभाग से तुरंत नोटिस आ सकता है।
2. गलत ITR फॉर्म का चुनाव करना
टैक्सपेयर्स के लिए अपनी आय के स्रोत के अनुसार सही फॉर्म चुनना बेहद जरूरी है:
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ITR-1 (सहज): यह फॉर्म उन नौकरीपेशा (Salaried) लोगों के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक है और उन्हें कोई कैपिटल गेन नहीं हुआ है।
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ITR-3: यह फॉर्म उन लोगों के लिए है जिनकी आय का जरिया कोई बिजनेस या प्रोफेशन है।
गलत फॉर्म चुनने पर आयकर विभाग आपके रिटर्न को अमान्य घोषित कर 'डिफेक्टिव नोटिस' जारी कर सकता है।
3. गलत असेसमेंट ईयर (AY) भरना
वित्तीय वर्ष (Financial Year) और असेसमेंट ईयर (Assessment Year) के बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सही असेसमेंट ईयर 2026-27 होगा। गलत AY चुनने पर आपका टैक्स कैलकुलेशन बिगड़ जाएगा और आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है।
4. व्यक्तिगत और बैंक जानकारी गलत दर्ज करना
ITR फॉर्म में आपका नाम, पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्मतिथि और पैन (PAN) नंबर हमेशा आपके आधिकारिक पैन रिकॉर्ड के अनुसार ही होना चाहिए। इसके अलावा, यदि आपका कोई टैक्स रिफंड बनता है, तो अपना बैंक खाता नंबर और IFSC कोड बिल्कुल सही और वैलिडेटेड दर्ज करें, अन्यथा आपका रिफंड अधर में लटक सकता है।
5. आय के सभी स्रोतों को छिपाना
कई लोग सोचते हैं कि केवल सैलरी की जानकारी देना ही काफी है, जो कि बिल्कुल गलत है। आपको अपनी हर छोटी-बड़ी कमाई का ब्यौरा देना अनिवार्य है, जैसे—
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सेविंग अकाउंट और फिक्स डिपॉजिट (FD) से मिलने वाला ब्याज
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मकान या दुकान से आने वाली किराए की आय (Rental Income)
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शेयरों या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेन
याद रखें, भले ही कोई आय टैक्स-फ्री (Tax-Free) दायरे में आती हो, फिर भी उसे रिटर्न में दिखाना जरूरी है।
6. जानकारी को गलत फॉर्मेट में भरना
ITR दाखिल करते समय तारीख जैसी महत्वपूर्ण जानकारियों को हमेशा तय फॉर्मेट यानी DD/MM/YYYY में ही भरें। गलत फॉर्मेट का उपयोग करने से सिस्टम सॉफ्टवेयर आपके रिटर्न में एरर (त्रुटि) दिखा देगा।
7. Form 26AS से मिलान न करना
रिटर्न सबमिट करने से पहले अपने Form 26AS और Form 16 का मिलान जरूर कर लें। अगर आपकी कंपनी या बैंक द्वारा काटा गया टीडीएस (TDS) आपके Form 26AS में रिफ्लेक्ट नहीं हो रहा है, तो आपको उस कटे हुए टैक्स का क्रेडिट (लाभ) नहीं मिल पाएगा।
8. AIS और TIS की जांच न करना
आयकर विभाग के पास आपके हर बड़े वित्तीय लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड होता है, जो आपके Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) में दिखाई देता है। ITR भरने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी घोषित आय इन दोनों स्टेटमेंट से पूरी तरह मैच कर रही हो।
9. दो कंपनियों के Form 16 का सही इस्तेमाल न करना
यदि आपने संबंधित वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी नौकरी बदली है और आपको दो अलग-अलग नियोक्ताओं (Companies) से Form 16 मिला है, तो आपको दोनों कंपनियों से मिली कुल सैलरी को जोड़कर ITR में दिखाना होगा। ऐसा न करने पर टैक्स देनदारी कम दिखती है, जिससे विभाग नोटिस भेजता है।
10. एम्प्लॉयर के पास HRA का दावा न कर पाना
अगर आप अपनी कंपनी में समय पर किराए की रसीद (Rent Receipts) जमा नहीं कर पाए थे और फॉर्म-16 में एचआरए छूट नहीं मिली है, तो घबराएं नहीं। आप सीधे ITR दाखिल करते समय भी HRA छूट का क्लेम कर सकते हैं, हालांकि इसके लिए मकान मालिक का पैन कार्ड नंबर देना आवश्यक हो सकता है।
11. उपलब्ध टैक्स कटौतियों का फायदा न उठाना
जागरूकता की कमी के कारण कई लोग आयकर कानून के तहत मिलने वाली विभिन्न वैध कटौतियों (जैसे हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम, बच्चों की ट्यूशन फीस, आदि) का लाभ उठाना भूल जाते हैं। ITR फाइल करने से पहले सभी वैध कटौतियों को अच्छे से समझ लें ताकि कानूनी रूप से टैक्स बचाया जा सके।
12. एडवांस टैक्स न भरना या देरी से भरना
यदि आपकी कुल अनुमानित टैक्स देनदारी (TDS कटने के बाद) 10,000 रुपये से अधिक बनती है, तो आपको तिमाही आधार पर एडवांस टैक्स जमा करना होता है। इसमें देरी करने या कम भुगतान करने पर आयकर अधिनियम के तहत 1% प्रति माह की दर से दंडात्मक ब्याज देना पड़ता है।
13. समय पर ITR का ई-वेरिफिकेशन न करना
ITR फॉर्म को ऑनलाइन सबमिट करना ही प्रक्रिया का अंत नहीं है। रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) करना अनिवार्य है। आप इसे नेट बैंकिंग, बैंक खाता नंबर, ओटीपी या इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए आसानी से कर सकते हैं। ऐसा न करने पर आपका भरा हुआ ITR अमान्य (Invalid) माना जाएगा।
14. Schedule AL की जानकारी न देना
यदि आपकी वार्षिक कुल आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है, तो आपके लिए ITR में 'Schedule AL' भरना अनिवार्य हो जाता है। इस शेड्यूल में आपको देश-विदेश में मौजूद अपनी सभी चल-अचल संपत्तियों (Assets) और उनसे जुड़ी देनदारियों (Liabilities) का पूरा ब्यौरा देना होता है।
15. विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी छिपाना
यदि आप भारत के निवासी (Resident and Ordinarily Resident) हैं और आपके पास विदेश में कोई बैंक खाता है, विदेशी कंपनियों के शेयर्स, म्यूचुअल फंड, या ESOP जैसी कोई भी संपत्ति है, तो उसकी जानकारी Schedule FA में देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। भले ही उस विदेशी संपत्ति पर भारत में कोई टैक्स न लगता हो, इसे छिपाने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।