IRCTC का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड: एक दिन में बुक हुए 20 लाख से ज्यादा ट्रेन टिकट; जानें कैसे क्रैश हुए बिना सिस्टम ने झेला करोड़ों यूजर्स का लोड
भारतीय रेलवे की टिकट बुकिंग शाखा इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) ने डिजिटल टिकटिंग के इतिहास में एक नया मील का पत्थर हासिल कर लिया है। आगामी त्योहारी सीजन (दिवाली और छठ पूजा) के लिए शुरू हुई 120 दिन पहले की एडवांस रिजर्वेशन पीरियड (ARP) बुकिंग के दौरान IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट और मोबाइल ऐप पर भारी ट्रैफिक देखने को मिला। रेलवे के अनुसार, 7 सितंबर को इतिहास में पहली बार एक ही दिन में कुल 20,06,353 (20.06 लाख से अधिक) टिकट बुक किए गए।
यह रिकॉर्ड यहीं नहीं थमा, बल्कि इसके अगले दिन यानी 8 सितंबर को भी सिस्टम पर दबाव बना रहा और 19,50,699 टिकटों की सफल बुकिंग दर्ज की गई। वर्तमान में भारतीय रेलवे के कुल आरक्षित टिकटों में से लगभग 89 प्रतिशत हिस्सेदारी ऑनलाइन बुकिंग की हो चुकी है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि करोड़ों लोगों द्वारा एक साथ लॉग इन करने के बावजूद न तो वेबसाइट क्रैश हुई और न ही पेमेंट गेटवे पर पहले जैसा लंबा अटकाव देखने को मिला।
1.74 करोड़ लॉगिन और सुबह 8 बजे का पीक लोड: सिस्टम ने कैसे झेला दबाव?
रेलवे द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, सुबह 8:00 बजे जब एसी और नॉन-एसी क्लास की एडवांस बुकिंग विंडो खुलती है, तब सिस्टम पर ट्रैफिक सबसे चरम पर होता है:
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15 मिनट में सबसे ज्यादा बुकिंग: दिनभर के कुल ट्रैफिक का सबसे बड़ा हिस्सा सुबह 8:00 बजे से 8:15 बजे के बीच दर्ज किया जाता है।
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1.74 करोड़ तक दैनिक लॉगिन: रिजर्वेशन विंडो के दौरान प्रतिदिन 1.33 करोड़ से 1.74 करोड़ यूजर्स ने सिस्टम में लॉगिन किया।
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सफल ट्रांजैक्शन फ्लो: केवल पहले एक घंटे (8:00 AM से 9:00 AM) में दिन की 8.43% से 14.14% बुकिंग्स पूरी हुईं, जबकि 85% से अधिक टिकट दिन के बाकी घंटों में सुचारू रूप से बुक हुए।
कैसे संभला इतना विशालकाय ट्रैफिक? 4 बड़े तकनीकी बदलाव जिन्होंने बदली तस्वीर
रेलवे अधिकारियों और सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) ने इस भारी लोड को संभालने के लिए बैकएंड पर कई बड़े अपग्रेड्स किए हैं:
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1. NGeT इंफ्रास्ट्रक्चर का सर्वर रिफ्रेश (दोगुनी क्षमता):
IRCTC ने अपने नेक्स्ट-जेनरेशन ई-टिकटिंग (NGeT) सर्वर आर्किटेक्चर को पूरी तरह से अपग्रेड किया है। पुराने सर्वरों को हटाकर अत्याधुनिक हाई-स्पीड सर्वर्स लगाए गए, जिससे सिस्टम की ओवरऑल प्रोसेसिंग क्षमता पहले के मुकाबले दोगुनी हो गई। सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन के जरिए डेटाबेस क्वेरी का रिस्पॉन्स टाइम मिलीसेकंड्स में आ गया।
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2. एंटी-बॉट टेक्नोलॉजी से दलालों के 65% बॉट्स ब्लॉक:
टिकट बुकिंग में सबसे बड़ी बाधा अनाधिकृत बॉट ट्रैफिक (Scripts/Bots) होते हैं, जो सेकंड्स में हजारों सीटें ब्लॉक कर देते थे। IRCTC ने शीर्ष टेक पार्टनर्स के साथ मिलकर 'एंटी-बॉट' (Anti-BOT) और कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) तैनात किया। इससे दुर्भावनापूर्ण बॉट ट्रैफिक में 55% से 65% की भारी गिरावट आई और वास्तविक आम यात्रियों को तुरंत टिकटिंग विंडो का एक्सेस मिला।
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3. 3.04 करोड़ फर्जी यूजर आईडी पर कड़ा एक्शन:
सिस्टम पर लोड कम करने और निष्पक्ष बुकिंग के लिए रेलवे विजिलेंस ने कड़ा अभियान चलाया। इसके तहत 3.04 करोड़ संदेहास्पद यूजर आईडी को हमेशा के लिए डिएक्टिवेट कर दिया गया, जबकि 6.33 करोड़ आईडी को पुनः सत्यापन (Revalidation) के दायरे में डाला गया। इसके अलावा 16,000 से अधिक संदिग्ध ईमेल डोमेन को पूरी तरह ब्लॉक किया गया।
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4. आधार ऑथेंटिकेशन और एजेंटों पर 10 मिनट की पाबंदी:
सुबह 8:00 बजे से 8:10 बजे के शुरुआती 10 मिनट में ऑथराइज्ड टिकटिंग एजेंट्स (YTSK, RTSA आदि) के बुकिंग करने पर पूरी तरह रोक लगाई गई है। साथ ही, ओपनिंग विंडो के दौरान केवल आधार से प्रमाणित (Aadhaar-authenticated) वास्तविक उपयोगकर्ताओं को ही टिकट बुक करने की अनुमति दी गई, जिससे सर्वर पर फेक ट्रैफिक खत्म हो गया।
15 जुलाई को लॉन्च हुआ नया ग्लासमोर्फिज्म यूआई (User Interface)
इस तकनीकी मजबूती को सहारा दिया IRCTC के नए यूजर इंटरफेस (UI) ने, जिसका बीटा वर्जन 15 जुलाई को पेश किया गया था। आधुनिक ग्लासमोर्फिज्म डिजाइन पर आधारित इस नए इंटरफेस में स्लीपर, थर्ड एसी और सेकंड एसी की सीट उपलब्धता एक ही स्क्रीन पर एक साथ दिख जाती है। इससे यात्रियों को बार-बार अलग-अलग क्लास के लिए पेज रिफ्रेश नहीं करना पड़ता, जिससे सर्वर पर लोड कई गुना कम हो जाता है। इन समन्वित प्रयासों के चलते भारतीय रेल ने तकनीकी स्थिरता का यह नया कीर्तिमान स्थापित किया।