ट्रेन में बजाया बाजा तो बजेगी बैंड: मोबाइल के स्पीकर पर गाना या वीडियो चलाया तो लगेगा ₹1,000 जुर्माना और होगी जेल
ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर बिना ईयरफोन के तेज आवाज में रील देखना, लाउडस्पीकर पर गाने बजाना या देर रात तक फोन पर चिल्ला-चिल्लाकर बातें करना अब यात्रियों को बहुत भारी पड़ने वाला है। भारतीय रेलवे ने सह-यात्रियों की शांति और नींद में खलल डालने वाले उपद्रवी तत्वों के खिलाफ अपने रुख को बेहद सख्त कर दिया है। रेलवे बोर्ड के कड़े निर्देशों के बाद रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और टिकट जांच दल (TTE) को ऐसे मामलों में तुरंत ऑन-द-स्पॉट सख्त कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है। यदि कोई यात्री ट्रेन की बोगी में मोबाइल स्पीकर पर तेज आवाज में संगीत बजाता या वीडियो चलाता पकड़ा गया, तो उस पर न केवल 1,000 रुपये तक का नकद जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि रेलवे एक्ट के तहत सीधी कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।
लंबी दूरी की ट्रेनों में अक्सर यह शिकायत देखने को मिलती रही है कि कुछ यात्रियों की गैर-जिम्मेदाराना हरकतों से पूरे डिब्बे का माहौल खराब हो जाता है। विशेष रूप से बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों, महिलाओं और छोटे बच्चों को तेज आवाज और शोरगुल से भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। सोशल मीडिया पर यात्रियों की लगातार बढ़ती शिकायतों और 'रेल मदद' पोर्टल पर दर्ज मामलों का संज्ञान लेते हुए रेलवे प्रशासन ने अब 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है ताकि हर मुसाफिर का सफर शांतिपूर्ण और सुरक्षित बना रहे।
रेलवे एक्ट की धारा 145 के तहत होगी सीधी कार्रवाई: जानें क्या कहता है कानून
ट्रेन के भीतर अनावश्यक शोर मचाना और अन्य यात्रियों के लिए उपद्रव पैदा करना भारतीय रेलवे अधिनियम (The Railways Act, 1989) के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। रेलवे एक्ट की धारा 145 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति ट्रेन के डिब्बे या रेलवे परिसर में नशा करता है, अभद्र भाषा का प्रयोग करता है या किसी भी तरह से अन्य यात्रियों की शांति भंग करने वाला 'न्यूसेंस' (Nuisance) पैदा करता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जा सकता है।
इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर संबंधित यात्री पर ₹1,000 तक का जुर्माना लगाने का स्पष्ट प्रावधान है। यदि यात्री जुर्माना भरने से इनकार करता है या टीटीई और सह-यात्रियों से विवाद पर उतर आता है, तो उसे अगले स्टेशन पर आरपीएफ के हवाले कर सीधे 6 महीने तक की कैद की सजा दिलाई जा सकती है। इसके साथ ही, ट्रेन टिकट परीक्षक (TTE) के पास यह भी कानूनी अधिकार है कि वह ऐसे उपद्रवी यात्री का टिकट तत्काल प्रभाव से रद्द कर उसे अगले ही स्टेशन पर ट्रेन से नीचे उतार दे।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लागू हैं 'साइलेंट जोन' के बेहद सख्त नियम
रेलवे ने रात के सफर को सुरक्षित और बाधा-मुक्त बनाने के लिए विशेष गाइडलाइन लागू कर रखी हैं, जिसका पालन करना प्रत्येक यात्री के लिए अनिवार्य है। रात 10:00 बजे के बाद ट्रेन की सभी कोच (विशेषकर एसी और स्लीपर क्लास) स्वतः 'साइलेंट जोन' में तब्दील हो जाती हैं। इस समयावधि के दौरान निम्नलिखित गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाई गई है:
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मोबाइल पर लाउडस्पीकर का उपयोग: रात 10 बजे के बाद मोबाइल पर बिना हेडफोन या ईयरबड्स के किसी भी प्रकार का ऑडियो, गाना या वीडियो चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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लाउड बातचीत पर पाबंदी: फोन पर तेज आवाज में बात करना या समूह में बैठकर जोर-जोर से ठहाके लगाना और गपशप करना गैर-कानूनी माना जाएगा।
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लाइट्स बंद करने का नियम: रात 10 बजे के बाद कोच की सभी मुख्य लाइटें बंद कर दी जाती हैं, केवल हल्की नाइट लाइट्स ही चालू रखी जा सकती हैं ताकि सोने वाले यात्रियों को व्यवधान न हो।
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टीटीई जांच की समय सीमा: रात 10 बजे के बाद टीटीई को भी नियमित टिकट चेकिंग करने की मनाही है, जब तक कि कोई विशेष सुरक्षा इनपुट न हो।
सह-यात्री परेशान करें तो तुरंत कहां और कैसे करें शिकायत
यदि आपके कोच में कोई सह-यात्री मना करने के बावजूद तेज आवाज में संगीत बजा रहा है या विवाद की स्थिति पैदा कर रहा है, तो आपको उससे उलझने या खुद विवाद में पड़ने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। रेलवे ने यात्रियों की त्वरित सहायता के लिए डिजिटल और ऑन-कॉल तंत्र तैयार किया है:
यात्री तुरंत अपने फोन से रेलवे की एकीकृत हेल्पलाइन संख्या 139 पर कॉल कर सकते हैं। कॉल कनेक्ट होते ही ऑपरेटर को अपना पीएनआर (PNR) नंबर, ट्रेन नंबर और कोच संख्या बताएं। इसके अलावा आप रेल मदद मोबाइल ऐप (Rail Madad App) या आधिकारिक पोर्टल railmadad.indianrailways.gov.in पर जाकर 'Nuisance by Co-passenger' श्रेणी के तहत रियल-टाइम शिकायत दर्ज करा सकते हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर @RailMinIndia और संबंधित रेलवे जोन को टैग करके भी सहायता मांगी जा सकती है। शिकायत मिलते ही अगले प्रमुख स्टेशन पर या चलती ट्रेन में गश्त कर रही आरपीएफ/जीआरपी की टीम सीधे उस कोच में पहुंचकर आरोपी के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।
जागरूक मुसाफिर बनें: सफर में ईयरफोन का इस्तेमाल करें और नियम निभाएं
रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तकनीक का आनंद लेना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन यह आनंद किसी दूसरे के अधिकार और शांति का हनन करके नहीं लिया जा सकता। यात्रा के दौरान हमेशा अच्छे क्वालिटी के ईयरफोन, हेडफोन या ईयरबड्स का इस्तेमाल करें और आवाज का स्तर इतना सीमित रखें कि वह आपके कानों से बाहर न फैले।
ट्रेन एक सार्वजनिक संपत्ति और साझा संसाधन है, जहां विभिन्न उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और पृष्ठभूमियों के लोग एक साथ सफर करते हैं। नियमों की अनदेखी न केवल आपकी जेब खाली करा सकती है, बल्कि आपके कानूनी रिकॉर्ड पर भी दाग लगा सकती है। इसलिए एक जिम्मेदार और समझदार नागरिक की तरह रेलवे के दिशा-निर्देशों का सम्मान करें और खुद भी आरामदायक सफर का आनंद लेते हुए दूसरों के सफर को भी सुकूनदेह बनाएं।