पत्नी को पैसे गिफ्ट करके टैक्स बचाने की सोच रहे हैं? तो सावधान! इनकम टैक्स का यह 'क्लबिंग' नियम फेर देगा आपकी प्लानिंग पर पानी
कई बार लोग टैक्स का बोझ कम करने के लिए एक बहुत आम तरीका अपनाते हैं—वे अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा अपनी पत्नी के बैंक अकाउंट में ट्रांसफर या गिफ्ट कर देते हैं. इसके बाद पत्नी उन पैसों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सोना, म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में निवेश कर देती हैं. अगर आप भी ऐसा ही कुछ प्लान कर रहे हैं, तो रुकिए! इनकम टैक्स का एक बेहद कड़ा नियम आपकी इस पूरी प्लानिंग को बिगाड़ सकता है. आयकर कानून के मुताबिक, पत्नी के नाम पर किए गए इस निवेश से जो भी मुनाफा या ब्याज (Income) मिलेगा, उस पर टैक्स आपकी पत्नी को नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आपको (पति को) ही चुकाना होगा.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ऐसे मामलों पर 'क्लबिंग ऑफ इनकम' (Clubbing of Income) के तहत कड़ी नजर रखता है. इसका सीधा उद्देश्य परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्ति या धन का हेर-फेर कर टैक्स चोरी करने की कोशिशों को रोकना है. आइए एक एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से इस नियम के पीछे की पूरी बारीकी और इससे बचने के कानूनी तरीकों को आसान भाषा में समझते हैं.
क्या है आयकर अधिनियम की धारा 64? समझिए 'क्लबिंग ऑफ इनकम' का खेल
आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की धारा 64 के तहत 'क्लबिंग ऑफ इनकम' का प्रावधान किया गया है. सीधे शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा कमाई गई आय को आपकी कुल सालाना आय में जोड़ (Club) दिया जाता है और फिर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार उस पर टैक्स वसूला जाता है.
यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी को कोई धनराशि उपहार (Gift Money) में देता है और पत्नी उस रकम को किसी भी वित्तीय स्कीम जैसे FD, गोल्ड, शेयर या म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करती हैं, तो उस निवेश से मिलने वाला सालाना ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन कानूनी रूप से पति की ही आय माना जाएगा.
कब लागू नहीं होते क्लबिंग के नियम? जानिए ये जरूरी अपवाद
इनकम टैक्स के इस कड़े नियम में कुछ राहत भरे अपवाद भी शामिल हैं, जहां क्लबिंग के प्रावधान पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाते हैं:
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खुद की पेशेवर योग्यता: यदि आपकी पत्नी अपनी किसी तकनीकी, व्यावसायिक या पेशेवर योग्यता (Technical or Professional Qualification) के दम पर स्वयं कमाई करती हैं, तो उनकी उस कमाई पर क्लबिंग का नियम लागू नहीं होगा.
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वर्किंग प्रोफेशनल्स: उदाहरण के लिए, यदि पत्नी डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA), फ्रीलांसर या अपनी किसी विशेष कला के आधार पर आय अर्जित करती हैं, तो वह आय पूरी तरह उनकी अपनी मानी जाएगी और उन्हें अपने पैन कार्ड पर खुद टैक्स देना होगा.
टैक्स प्लानिंग के 3 पूरी तरह सुरक्षित और कानूनी तरीके
अगर आप नियमों के दायरे में रहकर पूरी तरह लीगल तरीके से टैक्स की प्लानिंग करना चाहते हैं, तो आयकर कानून आपको ये बेहतरीन विकल्प देता है:
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माता-पिता को पैसे गिफ्ट करें: यदि आप अपनी पत्नी के बजाय अपने माता-पिता (Parents) को पैसे उपहार में देते हैं और वे उस रकम को सीनियर सिटीजन एफडी या अन्य सुरक्षित निवेश में लगाते हैं, तो उससे होने वाली आय उन्हीं की मानी जाएगी. चूंकि इस पर क्लबिंग का नियम लागू नहीं होता, इसलिए अगर आपके माता-पिता कम टैक्स स्लैब में आते हैं, तो आप कानूनी रूप से टैक्स बचा सकते हैं.
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शादी में मिले उपहार (Wedding Gifts): हिंदू विवाह या किसी भी शादी के शुभ अवसर पर रिश्तेदारों और दोस्तों से मिलने वाले कैश या प्रॉपर्टी पर टैक्स नहीं लगता है. अगर उस शादी में मिले गिफ्ट्स की रकम को कहीं इन्वेस्ट किया जाता है, तो उससे होने वाली आय भी प्राप्तकर्ता (जिसकी शादी थी) के हाथों में ही टैक्स योग्य होती है, इस पर कोई क्लबिंग नहीं होती.
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PPF में निवेश का जादुई विकल्प: यदि आप अपनी पत्नी या नाबालिग बच्चे के नाम पर पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) खाते में पैसे जमा करते हैं, तो उस पर मिलने वाला सालाना ब्याज (Interest) कानूनन पूरी तरह टैक्स-फ्री (Tax-Free) होता है. ब्याज पर टैक्स न होने के कारण यहां क्लबिंग नियम का कोई विपरीत असर नहीं पड़ता. हालांकि, ध्यान रहे कि एक वित्त वर्ष में प्रति PPF खाते में निवेश की अधिकतम सीमा ₹1.5 लाख ही निर्धारित है.