पहली बार खरीद रहे हैं आशियाना? कर्ज के जाल से बचना है तो गांठ बांध लें ये 5 स्मार्ट मनी टिप्स
अपना खुद का घर होना हर किसी का सबसे बड़ा सपना होता है। लेकिन अक्सर लोग इस उत्साह में कुछ ऐसी वित्तीय गलतियां कर बैठते हैं, जिसके चलते उनका यह प्यारा आशियाना भविष्य में कर्ज का एक बड़ा जाल बन जाता है। अगर आप भी पहली बार प्रॉपर्टी मार्केट में कदम रखने जा रहे हैं, तो बिना सोचे-समझे होम लोन की तरफ भागने के बजाय कुछ बेहद जरूरी और 'स्मार्ट मनी टिप्स' को समझ लेना समझदारी होगी।
आइए जानते हैं कि बिना किसी मानसिक और वित्तीय तनाव के आप अपने घर का सपना कैसे पूरा कर सकते हैं।
1. 20/30/50 का गोल्डन रूल जरूर अपनाएं
होम लोन लेते समय सबसे पहली गलती लोग यह करते हैं कि वे अपनी पूरी जमा-पूंजी डाउन पेमेंट में लगा देते हैं या फिर क्षमता से अधिक का लोन ले लेते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, आपको हमेशा '20/30/50' का नियम याद रखना चाहिए। इसका सीधा मतलब है कि घर की कुल कीमत का कम से कम 20% हिस्सा डाउन पेमेंट के रूप में खुद देना चाहिए। इसके अलावा, आपके घर की कुल ईएमआई (EMI) आपकी मासिक आय के 30% से अधिक नहीं होनी चाहिए, और आपका कुल कर्ज (होम लोन + अन्य लोन) आपकी सैलरी के 50% को पार नहीं करना चाहिए।
2. क्रेडिट स्कोर को रखें टॉप गियर में
लोन की अर्जी डालने से पहले अपने सिबिल (CIBIL) या क्रेडिट स्कोर की जांच जरूर कर लें। अगर आपका क्रेडिट स्कोर 750 या उससे अधिक है, तो बैंक आपको सबसे कम ब्याज दरों (Interest Rates) पर लोन ऑफर करते हैं। महज 0.5% ब्याज दर कम होने से भी आपके लाखों रुपये बच सकते हैं। इसलिए लोन अप्लाई करने से कम से कम 6 महीने पहले से ही अपने सभी पुराने बिलों और क्रेडिट कार्ड के बकाये का समय पर भुगतान करना शुरू कर दें।
3. सिर्फ EMI नहीं, 'हिडन कॉस्ट' का भी रखें हिसाब
पहली बार घर खरीदने वाले अक्सर सिर्फ प्रॉपर्टी की कीमत और बैंक की ईएमआई का ही बजट बनाते हैं। लेकिन असल खेल इसके बाद शुरू होता है। घर खरीदते समय आपको स्टैम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स, मेंटेनेंस कॉस्ट और ब्रोकरेज जैसे कई छुपे हुए खर्चों (Hidden Costs) का सामना करना पड़ता है। अपने बजट में इन अतिरिक्त खर्चों के लिए कम से कम 10% से 15% का अलग फंड जरूर रखें, ताकि ऐन वक्त पर आपको किसी से उधार न मांगना पड़े।
4. रीसेल वैल्यू और लोकेशन का सही आंकलन
घर खरीदते समय सिर्फ वर्तमान की जरूरतें न देखें। वह इलाका या सोसाइटी आने वाले 5 से 10 सालों में कैसी होगी, वहां कनेक्टिविटी (मेट्रो, हाईवे), स्कूल और अस्पतालों की क्या स्थिति है, इस पर गहन रिसर्च करें। लोकल एरिया ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से यह बेहद जरूरी है कि आप उस क्षेत्र के फ्यूचर डेवलपमेंट प्लान को समझें। एक खराब लोकेशन पर लिया गया सस्ता घर भी भविष्य में आपको घाटा दे सकता है, क्योंकि उसकी रीसेल वैल्यू (Resale Value) नहीं बढ़ती।
5. इमरजेंसी फंड से कभी न करें समझौता
नया घर खरीदने और उसका इंटीरियर सजाने के चक्कर में कभी भी अपनी पूरी लाइफ सेविंग्स या इमरजेंसी फंड (Emergency Fund) को खत्म न करें। भविष्य अनिश्चित है; नौकरी में बदलाव या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति में आपके पास कम से कम 6 महीने की ईएमआई और घर के खर्च के बराबर का बैकअप फंड हमेशा लिक्विड (कैश या सेविंग्स अकाउंट) रूप में होना चाहिए।